28 जुलाई 2026
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प्रॉपर्टी जालसाजी मामले में अख्तर हसन रिजवी की अग्रिम जमानत खारिज, बोले — ₹2 करोड़ की उगाही न देने पर फंसाया

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प्रॉपर्टी जालसाजी मामले में अख्तर हसन रिजवी की अग्रिम जमानत खारिज, बोले — ₹2 करोड़ की उगाही न देने पर फंसाया

सारांश

मुंबई सेशन कोर्ट ने पूर्व राज्यसभा सदस्य अख्तर हसन रिजवी की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। 1978 के फर्जी दस्तावेजों से संपत्ति हड़पने का आरोप है। रिजवी का दावा है कि ₹2 करोड़ की उगाही न देने पर उन्हें फंसाया गया। अब मामला बॉम्बे हाईकोर्ट जाएगा।

मुख्य बातें

मुंबई सेशन कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को पूर्व राज्यसभा सदस्य अख्तर हसन रिजवी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
आरोप है कि 1978 के दस्तावेजों में जालसाजी कर संपत्ति मालिक हजानी कालू (निधन 26 अप्रैल 1978 ) के नाम पर फर्जी कन्वेयंस डीड बनाई गई।
मामला बांद्रा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत दर्ज।
रिजवी ने सभी आरोप नकारते हुए दावा किया कि ₹2 करोड़ की उगाही न देने के कारण उन्हें फंसाया गया।
बचाव पक्ष के अनुसार 84 वर्षीय रिजवी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं; अब बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल होगी।

मुंबई की सेशन कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को पूर्व राज्यसभा सदस्य और रिजवी एस्टेट एंड होटल्स के निदेशक अख्तर हसन रिजवी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति धोखाधड़ी और जालसाजी के इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

मामले का पृष्ठभूमि

यह मामला मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, रिजवी पर 1978 के दस्तावेजों में हेरफेर कर एक संपत्ति पर अवैध कब्जे की कोशिश का आरोप है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि संपत्ति की मालिक हजानी कालू का 26 अप्रैल 1978 को निधन हो चुका था, और उनकी मृत्यु के बाद कथित तौर पर एक फर्जी कन्वेयंस डीड तैयार कराई गई।

पुलिस का आरोप है कि इस फर्जी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने के लिए एक अन्य महिला को हजानी कालू के रूप में पेश किया गया और उससे संबंधित कागजात पर दस्तखत कराए गए। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

रिजवी का पक्ष

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अख्तर हसन रिजवी ने सभी आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए एक बयान जारी किया। उन्होंने दावा किया कि यह मामला ₹2 करोड़ की उगाही की मांग ठुकराने के बाद उन्हें फंसाने की साजिश का परिणाम है।

रिजवी ने कहा, 'मेरे खिलाफ शिकायत कुछ स्वार्थी तत्वों ने जानबूझकर दर्ज कराई है, क्योंकि मैंने ₹2 करोड़ की उगाही की मांग मानने से इनकार किया था। मेरे विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं।'

कानूनी अगला कदम

रिजवी ने बताया कि उनकी कानूनी टीम अब बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करेगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता पर उनका अटूट विश्वास है।

बचाव पक्ष की दलील

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि 84 वर्षीय पूर्व राज्यसभा सदस्य का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।

आगे की सुनवाई

अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में होने की संभावना है, जहाँ जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई अपेक्षित है। यह मामला मुंबई की संपत्ति विवादों की उस लंबी श्रृंखला में एक और कड़ी है जिनमें दशकों पुराने दस्तावेजों को लेकर कानूनी लड़ाइयाँ चल रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह संकेत देता है कि न्यायपालिका ने आरोपों को सतही नहीं माना। 84 वर्षीय व्यक्ति की आयु और स्वास्थ्य को लेकर बचाव पक्ष की दलील बॉम्बे हाईकोर्ट में निर्णायक हो सकती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अख्तर हसन रिजवी पर क्या आरोप हैं?
अख्तर हसन रिजवी पर मुंबई के बांद्रा में एक संपत्ति पर कब्जे के लिए 1978 के दस्तावेजों में जालसाजी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति मालिक हजानी कालू की मृत्यु के बाद एक अन्य महिला को उनके रूप में पेश कर फर्जी कन्वेयंस डीड तैयार कराई गई।
मुंबई सेशन कोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?
अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। संपत्ति धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोपों में अदालत ने जमानत देना उचित नहीं समझा।
रिजवी ने आरोपों पर क्या कहा?
रिजवी ने सभी आरोपों को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया। उन्होंने दावा किया कि ₹2 करोड़ की उगाही की मांग ठुकराने के बाद उनके खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई गई है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
रिजवी की कानूनी टीम अब बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करेगी। यदि वहाँ राहत नहीं मिली तो सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने की भी बात कही गई है।
अख्तर हसन रिजवी कौन हैं?
अख्तर हसन रिजवी 84 वर्षीय पूर्व राज्यसभा सदस्य और रिजवी एस्टेट एंड होटल्स के निदेशक हैं। बचाव पक्ष के अनुसार उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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