योगी आदित्यनाथ बोले — आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, आस्था नहीं; जन्माष्टमी पर लखनऊ में दिया संदेश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 सितंबर को लखनऊ की पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन भारतीयों की आस्था को कभी नहीं तोड़ सका। उन्होंने सोमनाथ, अयोध्या और काशी के ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने हर बार अपने धर्मस्थलों को पुनर्जीवित किया है।
मुख्य वक्तव्य और संदर्भ
मुख्यमंत्री ने कहा, 'वे मूर्तियाँ तोड़ सकते हैं, मंदिरों के ऊपर अपनी इमारत खड़ी कर सकते हैं, लेकिन हमारे मन में बसे श्रीराम और श्रीकृष्ण को कभी छू नहीं पाए।' उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भारत को मिटाने और यहाँ की आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में विलुप्त हो गए।
योगी ने इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का भी उल्लेख किया और कहा कि जीवन में जब भ्रम और संशय हो, तब कर्म की प्रेरणा देने वाला श्रीकृष्ण का संदेश हर सनातनी के लिए प्रासंगिक है।
ऐतिहासिक मंदिरों का उल्लेख
सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बार-बार टूटा, लेकिन भारत ने हर बार इसे पुनर्निर्मित किया। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर बार-बार ध्वस्त हुआ, लेकिन आज वह अपनी भव्यता के साथ खड़ा है।
काशी विश्वनाथ धाम के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पहले लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने और आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया। यह उल्लेख उस निरंतरता को रेखांकित करता है जिसे योगी 'भारत की शाश्वत यात्रा' कहते हैं।
वृंदावन-मथुरा यात्रा का अनुभव
मुख्यमंत्री ने बताया कि वे एक दिन पूर्व से 4 सितंबर दोपहर तक वृंदावन और मथुरा में रहे, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा था। उन्होंने कहा कि मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, गोवर्धन, बलदेव और नंदगांव — इन सभी क्षेत्रों में आज भी श्रीकृष्ण की स्मृतियाँ जीवंत हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालु वहाँ पहाड़ों का खनन नहीं करते, पेड़ों की टहनियाँ नहीं तोड़ते और प्रकृति को नुकसान नहीं पहुँचाते — यह भाव स्वयं श्रीकृष्ण की शिक्षा का प्रतिफल है।
गोवर्धन पूजा और श्रीकृष्ण का संदेश
मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पूजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा के स्थान पर उस शक्ति की आराधना का मार्ग दिखाया जो किसानों और पशुपालकों की रक्षा करती है। इसीलिए पिछले 5,000 वर्षों से गोवर्धन की परिक्रमा की परंपरा जीवित है।
विकसित भारत और कर्तव्यबोध
समारोह के अंत में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 140 करोड़ भारतवासियों को मिलकर विकसित भारत की संकल्पना को साकार करना है। उन्होंने कहा कि जब हर व्यक्ति सकारात्मक भाव के साथ अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेगा, तभी उत्तर प्रदेश और भारत सही अर्थों में विकसित होंगे। यह आह्वान श्रीकृष्ण के कर्मयोग के संदेश से सीधे जुड़ता है, जो उन्होंने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में दिया था।