इलाहाबाद हाईकोर्ट का एनएचआरसी पर कड़ा प्रहार: मदरसा जांच में हस्तक्षेप पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त किया कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि अन्य गंभीर मानवाधिकार मुद्दों पर उसकी भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। इस टिप्पणी के बाद न्यायपालिका और मानवाधिकार आयोग की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी का केंद्रबिंदु
न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में यह भी रेखांकित किया कि एनएचआरसी कथित लिंचिंग जैसे संवेदनशील मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता, जबकि मदरसों से जुड़े मामलों में वह असाधारण सक्रियता दिखा रहा है। यह विरोधाभास ही कोर्ट की आपत्ति का मुख्य आधार बना। गौरतलब है कि फिलहाल इस जांच पर रोक लगी हुई है।
एनएचआरसी सदस्य का पक्ष
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नई दिल्ली में समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने कहा कि जांच पर रोक लगी होने के बावजूद यह ज़रूरी है कि प्रक्रिया पूरी होने दी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कानूनगो ने यह भी जोड़ा कि आयोग को प्राप्त शिकायत में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।
कोविड लॉकडाउन में कथित धोखाधड़ी का आरोप
प्रियंक कानूनगो ने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब अधिकांश संस्थान बंद थे, उस समय कथित रूप से 308 लोगों की नियुक्ति धोखाधड़ी से की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला बच्चों के शिक्षा के अधिकार और संस्थागत पारदर्शिता से भी जुड़ा है, इसलिए आयोग ने इसे गंभीरता से लिया। यह ऐसे समय में आया है जब मदरसा शिक्षा प्रणाली पहले से ही कई कानूनी और नीतिगत विवादों के केंद्र में है।
जांच रोकने के नुकसान पर चेतावनी
कानूनगो ने आगाह किया कि यदि जांच के बीच में ही रोक लगा दी जाती है, तो आम जनता को अपने अधिकारों और संभावित अनियमितताओं के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाएगी। उन्होंने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने पर बल दिया। इस पूरे विवाद में एनएचआरसी का कहना है कि वह प्राप्त शिकायतों के आधार पर ही कार्रवाई कर रहा है।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़र आने वाली जांच रिपोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है। इस विवाद का अंतिम निपटारा न केवल मदरसा जांच की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि एनएचआरसी जैसे संवैधानिक निकायों की प्राथमिकताएँ किस आधार पर तय होती हैं।