इलाहाबाद हाईकोर्ट का एनएचआरसी पर कड़ा प्रहार: मदरसा जांच में हस्तक्षेप पर उठे गंभीर सवाल

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का एनएचआरसी पर कड़ा प्रहार: मदरसा जांच में हस्तक्षेप पर उठे गंभीर सवाल

सारांश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी से सीधा सवाल पूछा — लिंचिंग पर चुप्पी, मदरसों पर सक्रियता क्यों? आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कोविड लॉकडाउन के दौरान 308 कथित फर्जी नियुक्तियों का हवाला देते हुए जांच को उचित ठहराया। यह टकराव न्यायपालिका और मानवाधिकार निकायों के बीच की खाई को उजागर करता है।

Key Takeaways

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मदरसा जांच में हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि आयोग कथित लिंचिंग जैसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता, लेकिन मदरसों में असाधारण सक्रियता दिखाता है। एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से 308 लोगों की धोखाधड़ी से नियुक्ति का आरोप शिकायत में था। फिलहाल मदरसा जांच पर रोक लगी हुई है; आयोग का कहना है कि जांच पूरी होने देना ज़रूरी है। सभी की नज़र अब आने वाली जांच रिपोर्ट और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त किया कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि अन्य गंभीर मानवाधिकार मुद्दों पर उसकी भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। इस टिप्पणी के बाद न्यायपालिका और मानवाधिकार आयोग की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी का केंद्रबिंदु

न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में यह भी रेखांकित किया कि एनएचआरसी कथित लिंचिंग जैसे संवेदनशील मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता, जबकि मदरसों से जुड़े मामलों में वह असाधारण सक्रियता दिखा रहा है। यह विरोधाभास ही कोर्ट की आपत्ति का मुख्य आधार बना। गौरतलब है कि फिलहाल इस जांच पर रोक लगी हुई है।

एनएचआरसी सदस्य का पक्ष

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नई दिल्ली में समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने कहा कि जांच पर रोक लगी होने के बावजूद यह ज़रूरी है कि प्रक्रिया पूरी होने दी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कानूनगो ने यह भी जोड़ा कि आयोग को प्राप्त शिकायत में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

कोविड लॉकडाउन में कथित धोखाधड़ी का आरोप

प्रियंक कानूनगो ने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब अधिकांश संस्थान बंद थे, उस समय कथित रूप से 308 लोगों की नियुक्ति धोखाधड़ी से की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला बच्चों के शिक्षा के अधिकार और संस्थागत पारदर्शिता से भी जुड़ा है, इसलिए आयोग ने इसे गंभीरता से लिया। यह ऐसे समय में आया है जब मदरसा शिक्षा प्रणाली पहले से ही कई कानूनी और नीतिगत विवादों के केंद्र में है।

जांच रोकने के नुकसान पर चेतावनी

कानूनगो ने आगाह किया कि यदि जांच के बीच में ही रोक लगा दी जाती है, तो आम जनता को अपने अधिकारों और संभावित अनियमितताओं के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाएगी। उन्होंने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने पर बल दिया। इस पूरे विवाद में एनएचआरसी का कहना है कि वह प्राप्त शिकायतों के आधार पर ही कार्रवाई कर रहा है।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़र आने वाली जांच रिपोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है। इस विवाद का अंतिम निपटारा न केवल मदरसा जांच की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि एनएचआरसी जैसे संवैधानिक निकायों की प्राथमिकताएँ किस आधार पर तय होती हैं।

Point of View

तो जांच ज़रूरी है — लेकिन प्राथमिकताओं में असंतुलन की आलोचना को नज़रअंदाज़ करना भी आयोग की विश्वसनीयता के लिए नुकसानदेह होगा। न्यायपालिका और मानवाधिकार निकायों के बीच यह टकराव आगे और गहरा हो सकता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी पर क्या टिप्पणी की?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि कथित लिंचिंग जैसे गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता। यह विरोधाभास ही कोर्ट की आपत्ति का आधार बना।
मदरसा जांच में एनएचआरसी की भूमिका क्यों विवादास्पद है?
एनएचआरसी को एक शिकायत मिली थी जिसमें कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से 308 लोगों की धोखाधड़ी से नियुक्ति का आरोप लगाया गया था। आयोग ने इसे बच्चों के शिक्षा अधिकार और संस्थागत पारदर्शिता से जुड़ा मानते हुए जांच शुरू की, जिस पर अब हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई है।
मदरसा जांच पर रोक क्यों लगी है?
फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही के चलते मदरसा जांच पर रोक लगी हुई है। एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो का कहना है कि जांच पूरी होने देना ज़रूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस विवाद में आगे क्या होने की उम्मीद है?
सभी की नज़र इलाहाबाद हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और एनएचआरसी की जांच रिपोर्ट पर है। इन दोनों के आधार पर ही यह तय होगा कि मदरसा जांच आगे बढ़ेगी या नहीं और एनएचआरसी की भूमिका पर क्या रुख अपनाया जाएगा।
प्रियंक कानूनगो कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
प्रियंक कानूनगो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने शिकायत में उल्लिखित गंभीर अनियमितताओं के आधार पर जांच शुरू की और जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष व पारदर्शी बनाए रखना ज़रूरी है।
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