28 अक्टूबर 2026
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अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात; 5 नवंबर को अंबाला में ₹800 करोड़ के शहीद स्मारक का उद्घाटन

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अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात; 5 नवंबर को अंबाला में ₹800 करोड़ के शहीद स्मारक का उद्घाटन

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के साथ ही 5 नवंबर को अंबाला छावनी में ₹800 करोड़ के उस शहीद स्मारक का उद्घाटन तय हुआ, जो 1857 के उस विद्रोह को सम्मान देगा — जो कथित तौर पर मेरठ से 10 घंटे पहले अंबाला में शुरू हुआ था।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।
5 नवंबर को शाह अंबाला छावनी में 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' का उद्घाटन करेंगे; इसके बाद गांधी ग्राउंड में जनसभा।
स्मारक का निर्माण लगभग ₹800 करोड़ की लागत से हुआ है; 6 नवंबर से आम जनता के लिए खुलेगा।
हरियाणा मंत्री अनिल विज के अनुसार, 1857 में अंबाला की 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री ने मेरठ से 10 घंटे पहले संग्राम का बिगुल बजाया था।
राज्य सरकार ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को स्मारक का दौरा कराने के निर्देश दिए हैं।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश BJP अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने की।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स पोस्ट में इस भेंट की जानकारी दी गई। इसी दिन हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने घोषणा की कि शाह 5 नवंबर को अंबाला छावनी में ₹800 करोड़ की लागत से निर्मित 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' का उद्घाटन करेंगे।

उद्घाटन कार्यक्रम का पूरा कार्यक्रम

परिवहन मंत्री अनिल विज ने अंबाला क्लब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि 5 नवंबर को शहीद स्मारक के उद्घाटन के बाद गृह मंत्री शाह गांधी ग्राउंड, अंबाला छावनी में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश BJP अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने की, जिसमें उद्घाटन कार्यक्रम की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। स्मारक को 6 नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

स्मारक का ऐतिहासिक महत्व

विज के अनुसार, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों में उल्लेख है कि 1857 में सुबह 9 बजे अंबाला छावनी में 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट ने स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजाया था। उनका दावा है कि यह मेरठ में विद्रोह शुरू होने से 10 घंटे पहले की घटना थी। विज ने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में इन वीरों को उचित स्थान नहीं मिला — जिन्हें पेड़ों से बांधकर गोली मार दी गई या जिन पर घानियाँ चलाई गईं — और यह स्थिति दुखद है।

इतिहास पर राजनीतिक दृष्टिकोण

विज ने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस की भूमिका पर अधिक जोर दिया जाता रहा है, जबकि उनके अनुसार 1857 में कांग्रेस की स्थापना से पहले ही देशभर में सशस्त्र संघर्ष शुरू हो चुका था और इसकी शुरुआत अंबाला में हुई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले 25-30 वर्षों से इस स्मारक के निर्माण के लिए प्रयास किए, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी दबाव बनाया, किंतु तब इसे नहीं बनाया गया। 2014 में BJP सरकार बनने के बाद इस स्मारक के निर्माण को मंजूरी दी गई।

स्मारक में क्या दिखेगा

राज्य सरकार ने प्रदेश के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को इस स्मारक का दौरा कराने के निर्देश दिए हैं। स्मारक में हरियाणा, बिहार, पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में 1857 के दौरान हुई लड़ाइयों के स्थानों और घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। विज ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले हर व्यक्ति को श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए, चाहे वह कांग्रेस का सदस्य रहा हो या नहीं।

आगे क्या

5 नवंबर को गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में होने वाले उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों के शामिल होने की अपील की गई है। 6 नवंबर से यह स्मारक आम जनता और विद्यार्थियों के लिए खुला रहेगा, जिससे इसे देश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में स्थान मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 1857 के इतिहास को पुनर्परिभाषित करने का राजनीतिक प्रयास भी है — जिसमें अंबाला को मेरठ से पहले स्थापित किया जा रहा है। अनिल विज का यह दावा कि कांग्रेस ने इस स्मारक को दशकों तक रोका, सत्ता-बदलाव की उस कथा को पुष्ट करता है जिसे BJP राष्ट्रीय स्तर पर भुनाती रही है। गौरतलब है कि इतिहासकारों के बीच 1857 की घटनाओं के कालक्रम पर सहमति नहीं है, इसलिए 'पहली लड़ाई' के दावे की स्वतंत्र पड़ताल ज़रूरी है। स्मारक में आधुनिक तकनीक से इतिहास का जो संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा, वह शैक्षिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा — और उसकी निष्पक्षता ही इसकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कब और कहाँ मुलाकात की?
गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इसकी जानकारी राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स पोस्ट के माध्यम से दी गई।
अंबाला में शहीद स्मारक का उद्घाटन कब होगा और इसकी लागत क्या है?
गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला छावनी में 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' का उद्घाटन करेंगे। इस स्मारक का निर्माण लगभग ₹800 करोड़ की लागत से हुआ है और यह 6 नवंबर से आम जनता के लिए खुलेगा।
अंबाला के शहीद स्मारक का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज के अनुसार, दस्तावेज़ों में उल्लेख है कि 1857 में सुबह 9 बजे अंबाला छावनी की 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट ने स्वतंत्रता संग्राम का आगाज़ किया था — जो मेरठ विद्रोह से 10 घंटे पहले था। स्मारक इन्हीं बलिदानियों को समर्पित है।
शहीद स्मारक में क्या प्रदर्शित किया जाएगा?
स्मारक में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का पूरा इतिहास प्रदर्शित होगा। हरियाणा, बिहार, पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में उस दौर की लड़ाइयों के स्थानों व घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।
5 नवंबर के कार्यक्रम में और क्या होगा?
उद्घाटन के बाद गृह मंत्री अमित शाह गांधी ग्राउंड, अंबाला छावनी में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। हरियाणा सरकार ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को स्मारक का भ्रमण कराने के निर्देश भी दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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