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अमित शाह ने कोलकाता में 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' का उद्घाटन किया, बोले — भाषा के बिना संस्कृति की अभिव्यक्ति असंभव

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अमित शाह ने कोलकाता में 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' का उद्घाटन किया, बोले — भाषा के बिना संस्कृति की अभिव्यक्ति असंभव

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' का उद्घाटन कर एक स्पष्ट सांस्कृतिक संदेश दिया — भाषा के बिना संस्कृति अधूरी है। पाणिनि से ऋग्वेद तक के संदर्भों के साथ उन्होंने इसे मोदी सरकार के सांस्कृतिक पुनरुत्थान अभियान की अहम कड़ी बताया।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जुलाई 2026 को कोलकाता में 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' के पहले चरण का लोकार्पण किया।
संग्रहालय का निर्माण नेशनल लाइब्रेरी और नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम ने संयुक्त रूप से किया है।
शाह ने कहा कि भाषा के बिना किसी भी देश या प्रदेश की संस्कृति की अभिव्यक्ति संभव नहीं ।
उन्होंने पाणिनि के व्याकरण-दर्शन और ऋग्वेद के श्लोकों का संदर्भ देते हुए भारतीय भाषाई विरासत की महत्ता समझाई।
इस संग्रहालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनरुत्थान संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 19 जुलाई 2026 को कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी और नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम द्वारा निर्मित 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' (शब्द संग्रहालय) के पहले चरण का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी देश या प्रदेश की संस्कृति की अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव नहीं, और भाव से उत्पन्न शब्दों के बिना भाषा का निर्माण ही नहीं हो सकता।

म्यूजियम ऑफ वर्ड: सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में कदम

शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोलकाता का यह 'शब्द संग्रहालय' सांस्कृतिक पुनरुत्थान की मूल कमी को पूरा करेगा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को देशभर की भाषाओं और संस्कृति से परिचित कराएगा, उन्हें शिक्षित करेगा और जीवन जीने का तरीका भी सिखाएगा।

पाणिनि के उद्धरण से समझाया भाषा का महत्व

गृह मंत्री ने महर्षि पाणिनि का संदर्भ देते हुए भाषा की संरचना को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि जब पाणिनि के एक शिष्य ने विशाल व्याकरण ढाँचे का उद्देश्य पूछा, तो पाणिनि ने कहा था — 'मनुष्य के भाव से शब्द की उत्पत्ति होती है, व्याकरण शब्दों को बाँधता है, शुद्ध और भावपूर्ण उच्चारण वाक्य को अर्थ देता है, और अर्थयुक्त वाक्यों का समूह भाषा की संरचना करता है।' शाह ने कहा कि यही भाषा सदियों तक संस्कृति की वाहक बनकर समस्त जीवों का कल्याण करती है।

विरासत पर गर्व की अपील

शाह ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विरासत को आगे बढ़ाने में किसी को संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े विचारों की ऐसी व्याख्या की गई कि हम दूसरों में गौरव खोजते रहे और अपनी जड़ों से दूर होते गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकुचितता भारतीय संस्कृति का चिह्न नहीं है — भारत वह भूमि है जहाँ शांति मंत्र में पशुओं, वनस्पतियों और समस्त ब्रह्मांड के कल्याण की कामना की जाती है।

ऋग्वेद का संदर्भ और सामाजिक संदेश

अपने संबोधन के अंत में शाह ने ऋग्वेद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वह देश है जहाँ कहा गया है — सभी दिशाओं से कल्याणकारी और शुभ विचार आते रहें, जो किसी से दबे नहीं और जिन्हें कोई बाधित न कर सके। उन्होंने आह्वान किया कि इन्हीं विचारों के आधार पर भारत अपने सामाजिक जीवन को नई ऊँचाइयों तक ले जाए। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन को नीतिगत प्राथमिकता दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दशकों से वामपंथी बौद्धिक परंपरा का केंद्र रहा है, वहाँ भाषा और विरासत की इस पुनर्व्याख्या का राजनीतिक संदर्भ नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। पाणिनि और ऋग्वेद के संदर्भ सांस्कृतिक पुनरुत्थान की उस वृहद परियोजना के हिस्से हैं जिसे BJP सरकार नीतिगत और प्रतीकात्मक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ा रही है। असली कसौटी यह होगी कि यह संग्रहालय केवल एक उद्घाटन-समारोह बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तव में युवा पीढ़ी को भारतीय भाषाओं से जोड़ने में सक्षम हो — जो डिजिटल युग में एक कठिन लेकिन ज़रूरी चुनौती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' क्या है?
'म्यूजियम ऑफ वर्ड' (शब्द संग्रहालय) कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी और नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित एक संग्रहालय है, जो भारतीय भाषाओं, शब्दों और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है। इसके पहले चरण का उद्घाटन 19 जुलाई 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने किया।
अमित शाह ने इस संग्रहालय के उद्घाटन पर क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि किसी भी देश या प्रदेश की संस्कृति की अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव नहीं है और भाव से उत्पन्न शब्दों के बिना भाषा का निर्माण नहीं हो सकता। उन्होंने इस संग्रहालय को आने वाली पीढ़ियों को भारतीय भाषाओं और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बताया।
अमित शाह ने पाणिनि का संदर्भ क्यों दिया?
शाह ने पाणिनि के व्याकरण-दर्शन के ज़रिए यह समझाया कि भाव से शब्द, शब्द से भाषा और भाषा से संस्कृति का निर्माण होता है। यह उदाहरण उन्होंने भारतीय भाषाई परंपरा की गहराई और प्रासंगिकता को रेखांकित करने के लिए दिया।
यह संग्रहालय किस सरकारी पहल का हिस्सा है?
शाह ने इस संग्रहालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनरुत्थान संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। यह केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत भारतीय भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस संग्रहालय से आम जनता को क्या लाभ होगा?
गृह मंत्री के अनुसार, यह शब्द संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को देशभर की भाषाओं और संस्कृति से परिचित कराएगा, उन्हें शिक्षित करेगा और जीवन जीने का तरीका भी सिखाएगा। यह विशेष रूप से युवाओं को भारतीय भाषाई विरासत से जोड़ने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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