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कोलकाता में 'शब्द संग्रहालय' का उद्घाटन: अमित शाह बोले — भाषा के बिना सांस्कृतिक पुनरुत्थान असंभव

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कोलकाता में 'शब्द संग्रहालय' का उद्घाटन: अमित शाह बोले — भाषा के बिना सांस्कृतिक पुनरुत्थान असंभव

सारांश

कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में उद्घाटित 'शब्द संग्रहालय' 22 भारतीय भाषाओं और 9 डिजिटल गैलरियों को एक छत के नीचे लाता है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे मोदी सरकार के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प का अहम पड़ाव बताया — जहाँ भाषा को संस्कृति की नींव के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जुलाई 2026 को कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में 'शब्द संग्रहालय' के पहले चरण का लोकार्पण किया।
संग्रहालय में 22 भारतीय भाषाओं और बोलियों का समावेश और 9 अत्याधुनिक डिजिटल गैलरियाँ स्थापित हैं।
इसे नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम और नेशनल लाइब्रेरी ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
शाह ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प की दिशा में 'महत्वपूर्ण पड़ाव' बताया।
संग्रहालय का लक्ष्य भाषा-प्रेमियों, शोधार्थियों और अध्यापकों को एक केंद्रीय ज्ञान-संसाधन उपलब्ध कराना है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 19 जुलाई 2026 को कोलकाता स्थित नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' — जिसे हिंदी में 'शब्द संग्रहालय' कहा जा रहा है — के पहले चरण का लोकार्पण किया। यह संग्रहालय नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम और नेशनल लाइब्रेरी के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है। शाह ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प को आगे बढ़ाया जा रहा है।

संग्रहालय की विशेषताएँ

शाह ने बताया कि यह संग्रहालय 22 भारतीय भाषाओं और बोलियों को समाहित करता है और इसमें 9 अत्याधुनिक डिजिटल गैलरियाँ स्थापित की गई हैं। उनके अनुसार यह संस्थान भाषा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह संग्रहालय देशभर के भाषा-प्रेमियों, शोधार्थियों और अध्यापकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।

गृह मंत्री का संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, 'किसी भी देश या प्रदेश की संस्कृति की अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव ही नहीं हो सकती और भाव से उत्पन्न शब्दों के बिना भाषा बन ही नहीं सकती।' उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक आने वाली पीढ़ियाँ यह नहीं समझेंगी कि भाषा शब्दों से बनती है और शब्द भाव से उत्पन्न होते हैं, तब तक देश का सांस्कृतिक पुनरुत्थान अधूरा रहेगा। शाह ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान की इसी 'मूल कमी' को कोलकाता का यह संग्रहालय पूरा करेगा।

सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें

शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया गया है। उन्होंने इसे देशभर की भाषाओं और संस्कृति के लिए 'बहुत बड़ा दिन' बताया।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को लेकर कई पहल कर चुकी है — जिनमें नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को प्राथमिकता देना और राजभाषा सम्मेलनों का आयोजन शामिल है। 'शब्द संग्रहालय' इसी कड़ी का नवीनतम विस्तार माना जा रहा है। संग्रहालय के शेष चरणों की समयसीमा अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह आम नागरिकों — विशेषकर युवाओं — तक कितनी पहुँच बना पाता है, न कि केवल शोधार्थियों और नीति-निर्माताओं तक। 22 भाषाओं को डिजिटल रूप में संरक्षित करना महत्वाकांक्षी है, पर भारत में दर्जनों संकटग्रस्त बोलियाँ अभी भी किसी संस्थागत दस्तावेज़ीकरण से बाहर हैं। साथ ही, यह ध्यान देने योग्य है कि संग्रहालय के शेष चरणों की न तो समयसीमा घोषित हुई है, न बजट — जो किसी भी दीर्घकालिक सांस्कृतिक परियोजना के लिए अनिवार्य पारदर्शिता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'शब्द संग्रहालय' (म्यूजियम ऑफ वर्ड) क्या है?
यह कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में स्थापित एक नया संग्रहालय है, जिसे नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम और नेशनल लाइब्रेरी ने मिलकर बनाया है। इसमें 22 भारतीय भाषाओं-बोलियों और 9 डिजिटल गैलरियों के माध्यम से भारतीय भाषा एवं ज्ञान परंपरा को प्रदर्शित किया गया है।
'शब्द संग्रहालय' का उद्घाटन किसने और कब किया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जुलाई 2026 को रविवार को इसके पहले चरण का लोकार्पण किया। कार्यक्रम कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में आयोजित हुआ।
इस संग्रहालय से किसे फायदा होगा?
गृह मंत्री शाह के अनुसार यह संग्रहालय भाषा-प्रेमियों, शोधार्थियों और अध्यापकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा। साथ ही, इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।
संग्रहालय में कितनी भाषाएँ और गैलरियाँ हैं?
संग्रहालय के पहले चरण में 22 भारतीय भाषाओं और बोलियों को शामिल किया गया है और 9 अत्याधुनिक डिजिटल गैलरियाँ स्थापित की गई हैं।
यह पहल मोदी सरकार के सांस्कृतिक एजेंडे से कैसे जुड़ती है?
गृह मंत्री शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को प्राथमिकता देने जैसी अनेक भाषा-संरक्षण पहलों के तहत इस दिशा में काम कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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