समावेशी विकास से साकार होगा विकसित भारत: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का विवेकानंद पुण्यतिथि पर संदेश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 4 जुलाई को लखनऊ के जन भवन में स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब देश के अंतिम नागरिक तक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, पोषण और गरिमापूर्ण जीवन की समान पहुँच सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास ही वास्तविक विकास है और स्वामी विवेकानंद को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को आचरण में उतारने से मिलेगी।
कार्यक्रम का स्वरूप और श्रद्धांजलि
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। जन भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पुष्प अर्पित कर राष्ट्र एवं समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। शिक्षा विभाग की ओर से स्वामी विवेकानंद के जीवन, व्यक्तित्व और विचारों पर आधारित सांस्कृतिक एवं शैक्षिक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं।
शिकागो भाषण की नाट्य प्रस्तुति और डॉक्यूमेंट्री
'स्वामी विवेकानंद की बातें अमल में लाओ' गीत पर समूह गायन और वर्ष 1893 की विश्व धर्म संसद, शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित जनों को सार्वभौमिक बंधुत्व, सहिष्णुता और भारतीय संस्कृति के संदेश से परिचित कराया। इसके साथ ही विवेकानंद के जीवन और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर एक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया।
राज्यपाल का मुख्य संबोधन
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का जीवंत प्रकाश-स्तंभ है। उन्होंने अल्पायु में ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का ऐसा संचार किया, जिसका प्रभाव आज भी विश्वभर में महसूस किया जाता है। 1893 में शिकागो में दिया गया उनका संबोधन विश्व मानवता के इतिहास का अमर अध्याय बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि किसी भी महापुरुष का सच्चा सम्मान उनके विचारों को व्यवहार, कार्य और जीवन में उतारने से होता है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
युवाओं से आह्वान
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज का युवा तकनीक और नवाचार से लैस है, किंतु तकनीक तभी सार्थक होगी जब उसके साथ अनुशासन, संवेदनशीलता, नैतिकता और राष्ट्रहित का भाव भी जुड़ा हो। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के 'उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको' के संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने समाज से जाति-भेद से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना विकसित करने, बेटा-बेटी को समान शिक्षा के अवसर देने तथा पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का भी आग्रह किया। राज्यपाल का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश विकसित भारत-2047 के रोडमैप पर तेज़ी से काम कर रहा है।