26 जुलाई 2026
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आंध्र प्रदेश में AI आधारित 'सिटी फ्लड अलर्ट' प्रणाली, विजयवाड़ा को 48 घंटे पहले मिलेगी बाढ़ चेतावनी

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आंध्र प्रदेश में AI आधारित 'सिटी फ्लड अलर्ट' प्रणाली, विजयवाड़ा को 48 घंटे पहले मिलेगी बाढ़ चेतावनी

सारांश

आंध्र प्रदेश ने RTGS, APSDMA और IIT गांधीनगर के सहयोग से 'सिटी फ्लड अलर्ट' प्लेटफॉर्म विकसित किया है — जो 48 घंटे पहले बारिश और 6 घंटे पहले फ्लैश फ्लड की चेतावनी देगा। विजयवाड़ा से शुरू होकर यह राज्यभर के शहरी निकायों तक विस्तारित होगा।

मुख्य बातें

RTGS, APSDMA और IIT गांधीनगर ने मिलकर AI आधारित 'सिटी फ्लड अलर्ट' प्रणाली विकसित की है।
यह प्रणाली 48 घंटे पहले बारिश का पूर्वानुमान और 6 घंटे पहले फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी करेगी।
प्रणाली का प्रेडिक्टिव मॉडल बुडामेरु नदी के 30 वर्षों के बाढ़ आंकड़ों पर आधारित है।
प्रारंभिक चरण में विजयवाड़ा में लागू होगी, बाद में आंध्र प्रदेश के सभी ULB तक विस्तार किया जाएगा।
अलर्ट स्वतः नगर आयुक्तों, जिला कलेक्टरों और वार्ड अधिकारियों को भेजे जाएंगे।
यह पहल मुख्यमंत्री एन.
चंद्रबाबू नायडू की क्लाइमेट-रेज़िलिएंट शहर परिकल्पना का हिस्सा है।

आंध्र प्रदेश सरकार की रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) ने आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) और IIT गांधीनगर के विशेषज्ञों के सहयोग से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित एक अत्याधुनिक शहरी बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है। 'सिटी फ्लड अलर्ट' नाम का यह प्लेटफॉर्म प्रारंभिक चरण में विजयवाड़ा में लागू किया जाएगा और 48 घंटे पहले बारिश का सटीक पूर्वानुमान तथा फ्लैश फ्लड आने से छह घंटे पहले अलर्ट जारी करने में सक्षम है। 26 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य सरकार इसे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और शहरों को अधिक आपदा-सहनशील बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मान रही है।

प्रणाली में क्या-क्या है खास

RTGS के AWARE डिवीजन ने APSDMA और IIT गांधीनगर के साथ मिलकर इस प्लेटफॉर्म को तैयार किया है। इसमें AI, सैटेलाइट आधारित भू-मानचित्रण (टेरेन मैपिंग), प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग जैसी उन्नत तकनीकों का एकीकरण किया गया है। इस प्रणाली का आधार उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) है, जिसे सैटेलाइट तस्वीरों की सहायता से तैयार किया गया है।

विजयवाड़ा के प्रत्येक वार्ड का डिजिटल मानचित्र बनाया गया है, जिसमें भू-स्तर, जल निकासी नेटवर्क और बाढ़-संभावित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण दर्ज है। यह प्रणाली केवल संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान ही नहीं करेगी, बल्कि उन नालों और जल निकासी मार्गों को भी चिन्हित करेगी जहाँ गाद (सिल्ट) जमने से पानी की निकासी बाधित हो सकती है।

बुडामेरु के 30 वर्षों के डेटा पर आधारित पूर्वानुमान मॉडल

इस प्लेटफॉर्म का प्रेडिक्टिव मॉडल बुडामेरु नदी के करीब 30 वर्षों के बाढ़ आंकड़ों पर आधारित है। इस व्यापक डेटासेट की सहायता से सिस्टम विभिन्न वर्षा परिस्थितियों में बाढ़ के संभावित प्रभाव का सटीक आकलन कर सकता है। गौरतलब है कि विजयवाड़ा लंबे समय से बुडामेरु नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की गंभीर समस्या से जूझता रहा है, और भारी बारिश के दौरान शहर के निचले इलाकों में अक्सर जलभराव हो जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित और अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ पूरे भारत में बढ़ रही हैं, और शहरी बाढ़ प्रबंधन की पारंपरिक व्यवस्थाएँ अपर्याप्त साबित हो रही हैं।

अलर्ट प्रणाली कैसे काम करेगी

जैसे ही संभावित बाढ़ का खतरा सामने आएगा, सिटी फ्लड अलर्ट प्लेटफॉर्म स्वतः अलर्ट तैयार कर APSDMA को भेजेगा। इसके आधार पर नगर आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, वार्ड स्तर के नगर अधिकारियों और अन्य फील्ड एजेंसियों को समय रहते चेतावनी जारी की जाएगी। इससे जल निकासी नालों की अग्रिम सफाई, आपातकालीन राहत टीमों की तैनाती और संवेदनशील इलाकों से लोगों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित हो सकेगी।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर उसे पूर्वानुमान-आधारित और निवारक व्यवस्था में बदलना है।

मुख्यमंत्री की परिकल्पना और विस्तार योजना

बयान के मुताबिक, यह पहल मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की परिकल्पना के अनुरूप शुरू की गई है और आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के उपयोग के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म को विजयवाड़ा में लागू किया जाएगा, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से आंध्र प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULB) तक विस्तारित किया जाएगा।

प्रत्येक शहर और कस्बे का डिजिटल भू-मानचित्रण और बाढ़ जोखिम आकलन कर राज्यव्यापी स्मार्ट शहरी बाढ़ निगरानी नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जो स्थान-विशेष के अनुसार पूर्वानुमान और समय पर चेतावनी जारी करेगा। यदि यह प्रणाली विजयवाड़ा में सफल रहती है, तो यह भारत के अन्य बाढ़-प्रभावित शहरों के लिए एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तकनीक की नहीं, प्रशासनिक प्रतिक्रिया की होगी — क्योंकि भारत में पहले भी अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए गए हैं, पर अलर्ट मिलने के बाद भी निकासी और राहत में देरी होती रही है। 30 वर्षों के बुडामेरु डेटा पर आधारित मॉडल भरोसेमंद लगता है, परंतु जलवायु परिवर्तन के कारण ऐतिहासिक पैटर्न तेज़ी से बदल रहे हैं — यह सवाल बना रहेगा कि मॉडल को कितनी बार अद्यतन किया जाएगा। राज्यव्यापी ULB विस्तार की महत्वाकांक्षा तभी सार्थक होगी जब हर शहर के लिए अलग स्थानीय डेटा और क्षमता-निर्माण सुनिश्चित हो, न कि एक ही मॉडल को सब पर थोपा जाए।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश का 'सिटी फ्लड अलर्ट' प्लेटफॉर्म क्या है?
'सिटी फ्लड अलर्ट' RTGS, APSDMA और IIT गांधीनगर द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक AI-आधारित शहरी बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली है, जो 48 घंटे पहले बारिश का पूर्वानुमान और 6 घंटे पहले फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी करती है। यह प्रणाली सैटेलाइट मैपिंग, हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग करती है।
यह प्रणाली पहले कहाँ लागू होगी?
प्रारंभिक चरण में यह प्रणाली विजयवाड़ा में लागू की जाएगी, जो बुडामेरु नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की समस्या से लंबे समय से प्रभावित रहा है। सफल परीक्षण के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से आंध्र प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULB) तक विस्तारित किया जाएगा।
इस प्रणाली में किन तकनीकों का उपयोग किया गया है?
इस प्लेटफॉर्म में AI, सैटेलाइट आधारित टेरेन मैपिंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग का एकीकरण किया गया है। इसका आधार उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) है, जो बुडामेरु के 30 वर्षों के बाढ़ डेटा पर प्रशिक्षित है।
अलर्ट मिलने पर कौन-कौन से अधिकारियों को सूचित किया जाएगा?
खतरे की स्थिति में सिस्टम स्वतः APSDMA को अलर्ट भेजेगा, जिसके आधार पर नगर आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, वार्ड स्तर के नगर अधिकारियों और फील्ड एजेंसियों को समय रहते चेतावनी जारी की जाएगी। इससे निकासी, राहत टीमों की तैनाती और नालों की अग्रिम सफाई संभव हो सकेगी।
यह पहल विजयवाड़ा के लिए क्यों ज़रूरी थी?
विजयवाड़ा लंबे समय से बुडामेरु नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की गंभीर समस्या से जूझता रहा है और भारी बारिश के दौरान शहर के निचले इलाकों में जलभराव आम बात है। यह प्रणाली आपदा प्रबंधन को प्रतिक्रियात्मक राहत से हटाकर पूर्वानुमान-आधारित निवारक व्यवस्था में बदलने के लिए विकसित की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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