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अनुपम खेर ने शेयर कीं 1981 के पहले पोर्टफोलियो की तस्वीरें, बोले — 'सूटकेस में सपने, दिल में विश्वास'

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अनुपम खेर ने शेयर कीं 1981 के पहले पोर्टफोलियो की तस्वीरें, बोले — 'सूटकेस में सपने, दिल में विश्वास'

सारांश

1981 में एक सूटकेस और अटूट विश्वास लेकर शिमला से मुंबई पहुँचे 25 वर्षीय अनुपम खेर ने दशकों बाद अपने पहले पोर्टफोलियो की तस्वीरें साझा कीं — बाल झड़ने की चिंता, महानगर की रफ्तार और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से मिले हुनर की एक भावुक दास्तान।

मुख्य बातें

अनुपम खेर ने 24 जुलाई को इंस्टाग्राम पर 1981 के अपने पहले पोर्टफोलियो की तस्वीरें साझा कीं।
वे 25 साल की उम्र में शिमला से मुंबई आए थे — एक सूटकेस में सपने और दिल में विश्वास लेकर।
करियर की शुरुआत में समय से पहले बाल झड़ने की समस्या ने उन्हें परेशान किया, लेकिन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से मिले आत्मविश्वास ने उन्हें संभाला।
खेर ने कहा कि उन्हें सफलता की गारंटी नहीं थी, पर कोशिश न छोड़ने का संकल्प पक्का था।
पोस्ट में युवाओं को संदेश: 'सपने पर सच्चा विश्वास हो, तो सपना भी आप पर विश्वास करने लगता है।'

अभिनेता अनुपम खेर ने शुक्रवार, 24 जुलाई को इंस्टाग्राम पर अपने करियर के शुरुआती दिनों की यादें साझा कीं — वे तस्वीरें जो उनके पहले पोर्टफोलियो की हैं और जो 1981 में खींची गई थीं, जब वे पहली बार शिमला से मुंबई आए थे। इस भावुक पोस्ट में उन्होंने संघर्ष, बालों के झड़ने की चिंता और अटूट जुनून की कहानी बयान की।

मुंबई में पहला कदम: 'विशाल समुद्र में एक बूंद'

अपनी पोस्ट में अनुपम खेर ने लिखा कि जब वे 25 साल की उम्र में मुंबई पहुँचे, तो उनके पास एक सूटकेस में ढेर सारे सपने और दिल में पूरा विश्वास था। उन्होंने लिखा, 'उस समय मुंबई में आकर ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे विशाल समुद्र में मैं एक छोटी सी बूंद हूं। हर चेहरा ज्यादा आत्मविश्वासी दिखता था और हर सड़क मेरी उम्मीदों से भी तेज भागती हुई लगती थी।'

यह वह दौर था जब बॉलीवुड में नए चेहरों के लिए जगह बनाना आसान नहीं था। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्रशिक्षित होने के बावजूद, महानगर की रफ्तार और प्रतिस्पर्धा ने उन्हें भीतर से हिला दिया था।

बाल झड़ने की चिंता और आत्मविश्वास की जंग

खेर ने खुलकर स्वीकार किया कि करियर की शुरुआत में समय से पहले बाल झड़ने की समस्या उन्हें परेशान करती थी। उन्होंने लिखा, 'मुझे डर लगता था कि कहीं लोग मेरी प्रतिभा देखने से पहले मेरे बालों को न देखने लगें।'

लेकिन इस डर को उन्होंने अपने हुनर और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से मिले आत्मविश्वास से पाटा। उनके शब्दों में, 'जब मेहनत के साथ जुनून जुड़ जाता है, तो वह एक बहुत बड़ी ताकत बन जाता है।'

सफलता की कोई गारंटी नहीं, पर कोशिश की थी

अनुपम खेर ने उस सवाल का जवाब भी दिया जो लोग अक्सर उनसे पूछते हैं — क्या उन्हें पहले से पता था कि वे सफल होंगे? उन्होंने ईमानदारी से लिखा, 'सच कहूं, तो मुझे ये अंदाजा नहीं था कि मैं सफल हो जाऊंगा, लेकिन ये जरूर पता था कि मैं कोशिश करना कभी बंद नहीं करूंगा।'

उन्होंने आगे जोड़ा कि सपने केवल सोचने से पूरे नहीं होते — उनके लिए 'रोज सुबह उठकर कड़ी मेहनत करना, असफलताओं का सामना करना और अपने डर को पीछे छोड़ना' ज़रूरी है।

युवा पीढ़ी के लिए संदेश

पोस्ट के अंत में अनुपम खेर ने अपने अनुयायियों को एक गहरी सीख दी: 'अगर आपको अपने सपने पर सच्चा विश्वास होता है, तो धीरे-धीरे आपका सपना भी आप पर विश्वास करने लगता है।' उन्होंने कहा कि आज जब वे उन पुरानी तस्वीरों को देखते हैं, तो उन्हें एक संघर्षरत अभिनेता नहीं, बल्कि एक ऐसा युवा दिखता है जिसने अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया।

खेर ने उस 25 साल के लड़के को धन्यवाद देते हुए पोस्ट समाप्त की जिसने कभी हार नहीं मानी — एक ऐसा संदेश जो आज के युवा कलाकारों और सपने देखने वालों के लिए समान रूप से प्रेरणादायक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और बालों का झड़ना किसी के लिए करियर की बाधा बन सकता था। खेर ने जिस तरह इस असुरक्षा को स्वीकार किया और उससे पार पाए, वह उनकी पीढ़ी के उन अभिनेताओं से अलग करता है जो 'स्ट्रगल' को रोमांटिसाइज़ करते हैं। यह पोस्ट युवा कलाकारों के लिए उतनी ही प्रासंगिक है जितनी चार दशक पहले थी — क्योंकि महानगर की रफ्तार और भीड़ आज भी वैसी ही है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुपम खेर ने 1981 की तस्वीरें क्यों शेयर कीं?
अनुपम खेर ने अपने करियर की शुरुआत को याद करते हुए 1981 के पहले पोर्टफोलियो की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं। इसके साथ उन्होंने शिमला से मुंबई आने के संघर्ष, बाल झड़ने की चिंता और जुनून की भावुक कहानी लिखी।
अनुपम खेर पहली बार मुंबई कब आए थे?
अनुपम खेर पहली बार 1981 में मुंबई आए थे, तब वे 25 साल के थे और शिमला से आए थे। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके पास एक सूटकेस और दिल में विश्वास के अलावा कुछ नहीं था।
अनुपम खेर ने बाल झड़ने की समस्या के बारे में क्या कहा?
अनुपम खेर ने बताया कि करियर की शुरुआत में समय से पहले बाल झड़ने की वजह से वे परेशान रहते थे और डरते थे कि लोग उनकी प्रतिभा से पहले उनके बालों पर ध्यान देंगे। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से मिले आत्मविश्वास और अपने हुनर पर भरोसे से इस डर को पार किया।
अनुपम खेर ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
अनुपम खेर ने कहा कि सपने केवल सोचने से पूरे नहीं होते — रोज मेहनत करना, असफलताओं का सामना करना और डर को पीछे छोड़ना ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा, 'अगर आपको अपने सपने पर सच्चा विश्वास होता है, तो धीरे-धीरे आपका सपना भी आप पर विश्वास करने लगता है।'
अनुपम खेर ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का ज़िक्र क्यों किया?
अनुपम खेर ने बताया कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने उन्हें वह आत्मविश्वास दिया जिसने मुंबई के शुरुआती संघर्ष के दौरान उन्हें टिके रहने की ताकत दी। यह संस्था उनके अभिनय की नींव बनी और असुरक्षाओं से लड़ने में मददगार रही।
राष्ट्र प्रेस
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