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अनुपम खेर के मुंबई में 45 साल पूरे, भावुक वीडियो में बोले- ‘शहर ने मुझे गढ़ा’

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अनुपम खेर के मुंबई में 45 साल पूरे, भावुक वीडियो में बोले- ‘शहर ने मुझे गढ़ा’

सारांश

शिमला के एक साधारण लड़के से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता तक — अनुपम खेर के लिए मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, ‘गढ़ने वाला’ रहा। 3 जून 1981 को खाली जेब और बड़े सपनों के साथ आए खेर ने 45 साल पूरे होने पर भावुक वीडियो में शहर, उसकी लोकल ट्रेनों और आम आदमी का आभार जताया।

मुख्य बातें

अनुपम खेर ने 3 जून 2026 को मुंबई में 45 साल पूरे होने पर भावुक पोस्ट साझा की।
अभिनेता 3 जून 1981 को शिमला से मुंबई आए थे, जेब में पैसे कम और सपने बड़े थे।
खेर ने मुंबई को ‘उदार शहर’ बताया और मुंबा देवी का भी आभार जताया।
उन्होंने मुंबई की लोकल ट्रेनों और आम आदमी को धैर्य व इंसानियत का शिक्षक बताया।
वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया गया, जिसमें अभिनेता ने ‘बहुत-बहुत धन्यवाद मुंबई’ कहकर समापन किया।

दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने 3 जून 2026 को मुंबई में अपने 45 साल पूरे होने पर एक भावुक वीडियो साझा कर ‘सपनों के शहर’ का आभार जताया। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में अभिनेता ने 3 जून 1981 को शिमला से मुंबई आने के अपने सफर को याद किया और कहा कि इस शहर ने एक साधारण लड़के को कलाकार के रूप में गढ़ा।

मुख्य संदेश

अनुपम खेर ने अपने पोस्ट में लिखा, “डियर मुंबई, 3 जून 1981 को सपनों से भरी आंखों और उम्मीदों भरे दिल के साथ मैं तुम्हारे पास आया था। आज तुम्हारे साथ 45 साल पूरे कर रहा हूं।” उन्होंने मुंबई को ‘उदार शहर’ बताते हुए कहा कि यहाँ का दिल दुनिया के किसी भी शहर से बड़ा है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

अभिनेता ने स्वीकार किया कि जब वे मुंबई पहुँचे थे, तब उनकी जेब में ‘ना के बराबर पैसे थे, लेकिन सपने बहुत बड़े थे।’ उन्होंने कहा, “इस शहर ने शिमला के एक साधारण लड़के को अपनी बाहों में जगह दी। संघर्ष दिए, सफलताएं दी, ठोकरें दी और उनसे सीखने की ताकत भी दी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि शहर ने उन्हें सफलता के साथ-साथ विनम्रता का पाठ भी पढ़ाया।

लोकल ट्रेनों और आम आदमी का जिक्र

खेर ने मुंबई की लोकल ट्रेनों को अपनी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बताया और कहा कि इन्हीं से उन्होंने ‘इंसानों को समझना’ सीखा। सड़कों पर चलते आम आदमी ने उन्हें धैर्य सिखाया। उन्होंने मुंबा देवी का भी आभार व्यक्त किया, जिनके नाम पर इस शहर का नाम पड़ा है।

फिल्म इंडस्ट्री को धन्यवाद

अभिनेता ने अपनी इस यात्रा में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की भूमिका को भी रेखांकित किया, लेकिन इस मौके पर उनका विशेष आभार उस शहर के लिए था जिसने एक छोटे शहर से आए लड़के को सपने देखने की हिम्मत दी। गौरतलब है कि अनुपम खेर ने 1984 में आई फिल्म ‘सारांश’ से अपने करियर की शुरुआत की थी और अब तक 500 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं।

प्रशंसकों की प्रतिक्रिया

पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और साथी कलाकारों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। ‘बहुत-बहुत धन्यवाद मुंबई’ कहते हुए अभिनेता ने वीडियो का समापन किया, जो उनके लंबे करियर और शहर के साथ गहरे रिश्ते की झलक दिखाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अनुपम खेर का यह पोस्ट महज भावुक रस्म नहीं — यह उस पीढ़ी की आवाज़ है जिसने OTT और स्टार किड्स के दौर से पहले मुंबई में जगह बनाई। शिमला से आए एक लड़के का 500+ फिल्मों तक का सफर इस बात की मिसाल है कि शहर अब भी बाहर से आने वालों के लिए ‘गढ़ने वाला’ हो सकता है, बशर्ते टिके रहने का धैर्य हो। यह कहानी आज के नए कलाकारों के लिए उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी 1981 में थी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुपम खेर मुंबई कब आए थे?
अनुपम खेर 3 जून 1981 को शिमला से मुंबई आए थे। उन्होंने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में इस तारीख का ज़िक्र करते हुए शहर में 45 साल पूरे होने की जानकारी दी।
अनुपम खेर ने मुंबई के बारे में क्या कहा?
अभिनेता ने मुंबई को ‘उदार शहर’ बताते हुए कहा कि इसने शिमला के एक साधारण लड़के को अपनी बाहों में जगह दी, संघर्ष, सफलता और विनम्रता सिखाई। उन्होंने कहा कि इस शहर का दिल दुनिया के किसी भी शहर से बड़ा है।
अनुपम खेर ने भावुक वीडियो कहाँ साझा किया?
उन्होंने यह भावुक वीडियो अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। पोस्ट में उन्होंने मुंबई के साथ अपने 45 साल लंबे सफर की यादें ताज़ा कीं।
अनुपम खेर ने मुंबई की किन चीज़ों का खास तौर पर जिक्र किया?
अभिनेता ने मुंबई की लोकल ट्रेनों और सड़कों पर चलते आम आदमी का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकल ट्रेनों ने उन्हें इंसानों को समझना और आम आदमी ने धैर्य रखना सिखाया।
अनुपम खेर ने मुंबा देवी का जिक्र क्यों किया?
अनुपम खेर ने मुंबा देवी का आभार इसलिए जताया क्योंकि उनके नाम पर ही शहर का नाम मुंबई पड़ा है। उन्होंने इसे शहर के प्रति अपनी कृतज्ञता का हिस्सा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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