एपेक वित्त मंत्रियों का 33वां सम्मेलन हांगकांग में शुरू, चीनी मंत्री लान फोआन ने की अध्यक्षता
सारांश
मुख्य बातें
एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) के वित्त मंत्रियों का 33वां सम्मेलन 20 अक्टूबर 2026 को हांगकांग में उद्घाटित हुआ। चीनी वित्त मंत्री लान फोआन ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बढ़ती जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी परिवर्तन वैश्विक अर्थव्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।
वैश्विक परिदृश्य पर लान फोआन का आकलन
सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में लान फोआन ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति मुठभेड़ और परिवर्तन से भरी हुई है। उन्होंने रेखांकित किया कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रभाव लगातार फैल रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है।
साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई पीढ़ी की वैज्ञानिक व तकनीकी क्रांति और व्यावसायिक सुधार तेज़ गति से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार विकास की नई प्रेरक शक्तियाँ एकत्रित हो रही हैं और वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में एशिया व प्रशांत क्षेत्र अधिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
क्षेत्रीय समृद्धि के लिए तीन सूत्रीय एजेंडा
लान फोआन ने सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी पक्षों से एपेक नेताओं की अनौपचारिक बैठक में बनी सहमति को लागू करने और क्षेत्रीय समृद्धि में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने तीन प्राथमिकताएँ सामने रखीं।
पहली, समग्र आर्थिक नीतियों को मज़बूत कर क्षेत्रीय आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता बनाए रखना। दूसरी, आर्थिक रूपांतरण को गति देकर आर्थिक लचीलापन बढ़ाना। तीसरी, विकास को प्राथमिकता देते हुए समान समृद्धि को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ वित्तीय क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग को गहरा कर खुला क्षेत्रीय आर्थिक वातावरण तैयार करना और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना।
एपेक और भारत का संदर्भ
गौरतलब है कि एपेक में 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं, जो विश्व की लगभग 60% जीडीपी और 47% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उठापटक का असर एशिया-प्रशांत की आर्थिक संभावनाओं पर पड़ रहा है।
आलोचकों का कहना है कि एपेक जैसे मंचों की प्रासंगिकता तभी सिद्ध होती है जब घोषणाएँ ठोस नीतिगत कार्रवाई में तब्दील हों। वित्त मंत्रियों का यह सम्मेलन वर्ष के अंत में होने वाले एपेक शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
आगे क्या होगा
सम्मेलन में वित्त मंत्रियों के बीच विचार-विमर्श के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी होने की उम्मीद है। इसमें मुद्रास्फीति नियंत्रण, ऋण स्थिरता और डिजिटल वित्त से जुड़े क्षेत्रीय सहयोग की रूपरेखा सामने आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, AI-आधारित तकनीकी परिवर्तन और हरित ऊर्जा में निवेश भी इस बार चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।