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अरुणाचल प्रदेश: राज्यपाल केटी परनाइक ने प्रशासनिक सुधार आयोग के साथ जन-केंद्रित शासन पर की समीक्षा

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अरुणाचल प्रदेश: राज्यपाल केटी परनाइक ने प्रशासनिक सुधार आयोग के साथ जन-केंद्रित शासन पर की समीक्षा

सारांश

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने इटानगर में प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष प्रमोद जैन के साथ बैठक कर जन-केंद्रित, विकेंद्रीकृत और डेटा-आधारित शासन पर ज़ोर दिया। सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाना इस पहल का केंद्रीय लक्ष्य है।

मुख्य बातें

राज्यपाल केटी परनाइक ने 21 अगस्त को इटानगर में प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष प्रमोद जैन के साथ समीक्षा बैठक की।
सुधारों में सुदूर सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुँच, पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष बल।
राज्यपाल ने डेटा-आधारित शासन और प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग का आह्वान किया।
आयोग मुख्यमंत्री पेमा खांडू को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पहले ही सौंप चुका है।
खांडू ने सुधारों को प्रशासनिक ढाँचे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम बताया।

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने शुक्रवार, 21 अगस्त को इटानगर स्थित लोक भवन में स्पष्ट किया कि राज्य के प्रशासनिक सुधार व्यावहारिक, जन-केंद्रित और भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप होने चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने और नागरिकों को उत्तरदायी एवं जवाबदेह शासन देने पर बल दिया।

आयोग अध्यक्ष से मुलाकात और सुधारों की समीक्षा

अरुणाचल प्रदेश प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रमोद जैन ने राज्यपाल परनाइक से लोक भवन में मुलाकात की। इस बैठक में जन विश्वास को सुदृढ़ करने, जमीनी स्तर की संस्थाओं को सशक्त बनाने, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने तथा सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता एवं दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से चल रहे और प्रस्तावित सुधारों की विस्तृत समीक्षा की गई।

राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश के प्रशासनिक ढाँचे को लोगों की आकांक्षाओं और शासन की बदलती माँगों के अनुरूप ढालने का आह्वान किया। उन्होंने सहभागी और विकेंद्रीकृत शासन, डिजिटलीकरण, समय पर सेवा वितरण और परिणामोन्मुखी प्रशासन के महत्व को रेखांकित किया।

भौगोलिक चुनौतियाँ और प्रौद्योगिकी का आह्वान

राज्यपाल परनाइक ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश अपने विशाल पर्वतीय भूभाग, बिखरी हुई बस्तियों, समृद्ध जनजातीय एवं सांस्कृतिक विविधता और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण एक ऐसी प्रशासनिक प्रणाली की माँग करता है जो कुशल, लचीली और स्थानीय परिस्थितियों के प्रति उत्तरदायी हो। उन्होंने भौगोलिक बाधाओं से पार पाने और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित शासन के व्यापक उपयोग का आह्वान किया।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल गवर्नेंस को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें नई पहलें शुरू कर रही हैं। अरुणाचल जैसे दूरस्थ और सीमावर्ती राज्य में तकनीक-आधारित शासन की प्रासंगिकता और भी अधिक हो जाती है।

मुख्यमंत्री को सौंपी जा चुकी है प्रारंभिक रिपोर्ट

अरुणाचल प्रदेश प्रशासनिक सुधार आयोग इससे पहले मुख्यमंत्री पेमा खांडू को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप चुका है, जिसे राज्य में शासन सुदृढ़ करने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट प्राप्त करते हुए मुख्यमंत्री खांडू ने इसे प्रशासनिक ढाँचे के आधुनिकीकरण और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार की दिशा में अहम पहल बताया।

खांडू ने स्पष्ट किया कि ये सुधार केवल प्रणालियों में बदलाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शासन को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं।

आगे की राह

आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार आगामी चरणों में नीतिगत बदलावों को अमल में लाने की दिशा में काम करेगी। जमीनी स्तर की संस्थाओं को मज़बूत करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समुदायों के करीब लाने पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी सिफारिशों को नीति में बदलने की समयसीमा अभी अस्पष्ट है। देश के अन्य पहाड़ी राज्यों के अनुभव बताते हैं कि डिजिटलीकरण की घोषणाएँ अक्सर कनेक्टिविटी की बुनियादी कमियों से टकराकर धीमी पड़ जाती हैं। बिना स्पष्ट जवाबदेही ढाँचे और सत्यापन-योग्य लक्ष्यों के, ये सुधार भी नीतिगत दस्तावेज़ों तक सिमटने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचल प्रदेश प्रशासनिक सुधार आयोग क्या है?
यह अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक आयोग है जो राज्य के प्रशासनिक ढाँचे को आधुनिक बनाने, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और जमीनी स्तर की संस्थाओं को सशक्त करने के लिए सिफारिशें तैयार करता है। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रमोद जैन हैं।
राज्यपाल केटी परनाइक ने किन सुधारों पर जोर दिया?
राज्यपाल परनाइक ने सहभागी और विकेंद्रीकृत शासन, पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटलीकरण, समय पर सेवा वितरण और परिणामोन्मुखी प्रशासन पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाने के लिए प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित शासन के उपयोग का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू को आयोग की रिपोर्ट कब सौंपी गई?
अरुणाचल प्रदेश प्रशासनिक सुधार आयोग मुख्यमंत्री पेमा खांडू को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पहले ही सौंप चुका है। खांडू ने इसे प्रशासनिक ढाँचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अरुणाचल प्रदेश में प्रशासनिक सुधार क्यों ज़रूरी हैं?
अरुणाचल प्रदेश का विशाल पर्वतीय भूभाग, बिखरी हुई बस्तियाँ, जनजातीय विविधता और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ इसे एक विशिष्ट प्रशासनिक चुनौती बनाती हैं। यहाँ नागरिकों तक उत्तरदायी शासन पहुँचाने के लिए लचीली और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रणाली की आवश्यकता है।
इन सुधारों से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
इन सुधारों का उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाना, अंतिम छोर तक सेवाएँ पहुँचाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समुदायों के करीब लाना है। विशेष रूप से सुदूर ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी शासन मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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