अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग, पूर्व वीसी और वकीलों ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

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अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग, पूर्व वीसी और वकीलों ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

सारांश

देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर और वरिष्ठ वकीलों ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की। पत्र में न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

मुख्य बातें

अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप हैं।
पत्र में अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।
न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता है।
हस्तक्षरकर्ताओं ने उचित कार्रवाई की अपील की है।
यह मामला भविष्य में अन्य मिसालें स्थापित कर सकता है।

नई दिल्ली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वर्तमान और सेवानिवृत्त वाइस चांसलरों, झारखंड की पूर्व पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ वकीलों के एक समूह ने भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को पत्र भेजकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं और अपने केस को दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की मांग न्यायपालिका की गरिमा को कमज़ोर करती है और यह एक गलत परंपरा को बढ़ावा दे सकती है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि किसी भी पक्षकार को यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करे कि उसका मामला किस न्यायाधीश के सामने सुना जाएगा। अदालतों की प्रक्रिया निश्चित नियमों के तहत चलती है और इसमें हस्तक्षेप करना न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। बिना ठोस सबूत के किसी न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप लगाना भी गंभीर मामला है और इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।

पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि इस तरह के व्यवहार को नजरअंदाज किया गया, तो यह भविष्य में एक खतरनाक मिसाल बन सकता है। इससे अन्य लोग भी इसी तरह के आरोप लगाकर अपने मामलों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने चीफ जस्टिस से अपील की है कि इस मामले में हस्तक्षेप करें और उचित कार्रवाई करें, ताकि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता बनी रहे। इस तरह के मामलों में समय पर सख्त कदम उठाना आवश्यक है, जिससे न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रह सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह न्याय प्रणाली को कमजोर कर सकता है। इस संदर्भ में उचित कार्रवाई आवश्यक है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद केजरीवाल पर आरोप क्या हैं?
अरविंद केजरीवाल पर आरोप हैं कि उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए और अपने केस को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की।
पत्र में क्या मांगा गया है?
पत्र में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है।
इस घटना का न्यायपालिका पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
इस घटना से न्यायपालिका की गरिमा कमजोर हो सकती है और यह गलत परंपरा को बढ़ावा दे सकती है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने किससे अपील की है?
हस्ताक्षरकर्ताओं ने चीफ जस्टिस से हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की अपील की है।
इस मामले की गंभीरता क्या है?
यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा है, जो इसे गंभीर बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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