केजरीवाल 'चुनावी हिंदू' हैं, सुंदरकांड पाठ पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनोज तिवारी ने 15 जुलाई 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा आयोजित सुंदरकांड पाठ को लेकर उन पर कड़ा प्रहार किया। तिवारी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल केवल चुनावी मौसम में हिंदू आस्था का प्रदर्शन करते हैं, जबकि शेष समय वे हिंदू धार्मिक मान्यताओं के विरोध में खड़े रहते हैं।
मुख्य आरोप: 'चुनावी हिंदू'
तिवारी ने सीधे शब्दों में कहा, 'अरविंद केजरीवाल चुनावी हिंदू हैं। बाकी समय वे हिंदू नहीं होते। असल में, बाकी समय वे हिंदुओं और उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ होते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब AAP और BJP के बीच दिल्ली की राजनीति में धार्मिक मुद्दों पर तनातनी लगातार बढ़ रही है।
मथुरा मुद्दे पर केजरीवाल से सवाल
तिवारी ने केजरीवाल की धार्मिक निष्ठा को चुनौती देते हुए मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, 'सुंदरकांड का समर्थक कभी भी मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को मुक्त कराने का विरोध नहीं कर सकता। अरविंद केजरीवाल अगर सच में सुंदरकांड के समर्थक हैं, तो एक बार बयान दें कि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मुक्त होकर, जैसे अयोध्या में राम जी का मंदिर बना, वैसा वहाँ बनना चाहिए। मैं इंतजार करूँगा।' यह बयान AAP पर धार्मिक राजनीति में अस्पष्ट रुख अपनाने का आरोप लगाने की BJP की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
मंडोली में वृक्षारोपण अभियान
इसी दौरान तिवारी ने दिल्ली के मंडोली ग्रीन एरिया में आयोजित एक वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने पौधे लगाए और नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उनका कहना था कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का उल्लेख
तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर शुरू किए गए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इसके तहत देशभर में करोड़ों पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में दिल्ली में 70 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण एक दीर्घकालिक संकट रहा है, और इस पृष्ठभूमि में यह लक्ष्य राजनीतिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या
आम आदमी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिल्ली की राजनीति में धार्मिक पहचान का मुद्दा आने वाले चुनावी चक्र में और तीखा होने की संभावना है।