भाजपा का केजरीवाल पर हमला: 'चुनावी हिंदू' की संज्ञा, AAP पर धार्मिक पाखंड का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 12 जुलाई 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें 'चुनावी हिंदू' करार दिया। पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्टर जारी कर आरोप लगाया कि केजरीवाल चुनावी दबाव में आकर धार्मिक कार्यक्रमों का सहारा ले रहे हैं।
मुख्य आरोप और भाजपा का पक्ष
भाजपा दिल्ली ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ने पहले राम मंदिर निर्माण पर खुशी नहीं जताई, मंदिरों और गुरुद्वारों के बाहर शराब के ठेके खुलवाए, तथा AAP सरकार के दौरान इमामों को वेतन दिया लेकिन पुजारियों को नहीं। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल कभी बजरंगबली का मजाक उड़ाते थे और राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाने की बात करते थे।
भाजपा ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत और पंजाब में आगामी चुनाव में संभावित हार की आशंका से घबराकर केजरीवाल ने 'चुनावी हिंदू' बनने की 'नौटंकी' शुरू की है।
केजरीवाल का सुंदरकांड पाठ का आमंत्रण
अरविंद केजरीवाल ने अपने एक्स अकाउंट पर लोगों को रोहिणी के सेक्टर-10 स्थित जापानी पार्क के पास जेएमडी टेंट में आयोजित सुंदरकांड पाठ में शामिल होने का न्योता दिया। उन्होंने बताया कि यह धार्मिक कार्यक्रम रविवार सुबह 11:30 बजे आयोजित होगा।
केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि वे श्री राम मंदिर में हुई कथित डकैती के आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की प्रार्थना हनुमान जी से करेंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि इस मुद्दे पर देशभर में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत भी की जाएगी।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर
भाजपा ने केजरीवाल के इस धार्मिक कार्यक्रम को शुद्ध रूप से चुनावी राजनीति का हिस्सा बताया और कहा कि यह धार्मिक आस्था का राजनीतिक दोहन है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की सियासत में धार्मिक मुद्दों पर बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।
गौरतलब है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा और AAP के बीच धार्मिक राजनीति को लेकर तीखी नोकझोंक जारी है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पार्टियाँ मतदाताओं को लुभाने के लिए धर्म का सहारा ले रही हैं।
आगे क्या
केजरीवाल के हस्ताक्षर अभियान और भाजपा की जवाबी रणनीति के बीच दिल्ली की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा होने की संभावना है। पंजाब के आगामी चुनाव को देखते हुए दोनों पार्टियों के बीच यह प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।