अयोध्या में केजरीवाल के विरोध में 'वापस जाओ' के नारे, साधु-संतों ने पुतला फूंका
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के 26 जून को अयोध्या आगमन पर साधु-संतों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। आक्रोशित संतों ने 'केजरीवाल वापस जाओ' के नारे लगाए और उनका पुतला फूंका। साधु-संतों का स्पष्ट कहना है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा लेकर अयोध्या आने वाले किसी भी नेता का वे स्वागत नहीं करेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
साधु किशोर चेतन दास ने केजरीवाल के आगमन पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रशासन के नियमों के दायरे में किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल का भगवान राम से जुड़ाव पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा, 'भगवान राम सभी के हैं, लेकिन राजनीति करने वालों के बिल्कुल नहीं।' साधु चेतन दास ने यह भी बताया कि पुतला दहन के बाद प्रशासन की ओर से उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा था।
तीर्थ पुरोहितों की प्रतिक्रिया
तीर्थ पुरोहित राजेश महाराज ने केजरीवाल के पुराने बयानों का हवाला देते हुए उनके अयोध्या दौरे पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, केजरीवाल पहले कह चुके हैं कि अयोध्या में राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाया जाए ताकि सभी धर्मों के लोगों का उपचार हो सके। राजेश महाराज ने यह भी कहा कि केजरीवाल यह भी कहते रहे हैं कि भगवान राम मंदिर में नहीं, बल्कि हृदय में विराजमान हैं — ऐसे में मंदिर दर्शन का औचित्य क्या है।
सनातन संरक्षक दल का विरोध
सनातन संरक्षक दल के महासचिव मुकुल माधव त्रिपाठी ने बताया कि उनके संगठन ने पहले ही केजरीवाल के अयोध्या आगमन का विरोध करने का ऐलान किया था। त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल की रामलला में कोई आस्था नहीं है और वे राजनीतिक महत्वाकांक्षा के साथ यहाँ आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन ने उनके संगठन को केजरीवाल को काला झंडा दिखाने से रोक दिया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले विभिन्न दलों के नेताओं के अयोध्या दौरे बढ़ गए हैं। गौरतलब है कि राम मंदिर का उद्घाटन जनवरी 2024 में हुआ था, जिसके बाद से यह स्थल राजनीतिक दलों के लिए एक संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। साधु-संत समुदाय पहले भी कई नेताओं के अयोध्या दौरों पर आपत्ति जता चुका है।
आगे क्या
केजरीवाल के इस दौरे और साधु-संतों के विरोध के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ होने की संभावना है। अयोध्या में धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक गतिविधियों के बीच यह तनाव आने वाले समय में और गहरा हो सकता है।