27 जून 2026
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राम मंदिर CEO नियुक्ति पर 'आप' का विरोध: केजरीवाल बोले — साधु-संतों को सौंपा जाए प्रबंधन

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राम मंदिर CEO नियुक्ति पर 'आप' का विरोध: केजरीवाल बोले — साधु-संतों को सौंपा जाए प्रबंधन

सारांश

AAP ने राम मंदिर में CEO नियुक्ति की सरकारी तैयारी को सिरे से नकारा — केजरीवाल ने हनुमानगढ़ी का उदाहरण देकर कहा कि साधु-संत ही मंदिर की गरिमा के असली रक्षक हैं। पार्टी ने चढ़ावे की चोरी के आरोपों से ध्यान भटकाने का भी इल्ज़ाम लगाया।

मुख्य बातें

AAP ने 27 जून 2025 को अयोध्या श्रीराम मंदिर में CEO नियुक्ति की केंद्र सरकार की तैयारी का विरोध किया।
अरविंद केजरीवाल ने माँग की कि मंदिर प्रबंधन नेताओं-अधिकारियों के बजाय धर्माचार्यों एवं साधु-संतों को सौंपा जाए।
हनुमानगढ़ी का उदाहरण देते हुए कहा — करोड़ों के चढ़ावे के बावजूद वहाँ कभी वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं लगा।
दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया — ट्रस्ट और CEO दोनों सरकार बनाए, तो बदलाव क्या?
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कदम मंदिर से अरबों रुपये के कथित चढ़ावा-चोरी मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 27 जून 2025 को अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के प्रबंधन हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए जाने की केंद्र सरकार की तैयारी का कड़ा विरोध किया। पार्टी की स्पष्ट माँग है कि मंदिर का संचालन राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के हाथों में नहीं, बल्कि धर्माचार्यों एवं साधु-संतों को सौंपा जाए।

केजरीवाल का रुख: आस्था का केंद्र, राजनीति से दूर

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और इसका संचालन उन्हीं लोगों को करना चाहिए जिनका जीवन धार्मिक मूल्यों और सेवा भावना से अनुप्राणित हो। उन्होंने कहा कि किसी नेता या सरकारी अधिकारी के बजाय धर्माचार्यों को मंदिर की बागडोर सौंपी जानी चाहिए।

इससे पहले, शुक्रवार को रामलला के दर्शन के पश्चात केजरीवाल ने कहा कि पूरे हिंदू समाज की यही माँग है कि मंदिर ट्रस्ट में बैठे नेताओं और अधिकारियों का मंदिर के संचालन से कोई सीधा संबंध नहीं होना चाहिए।

हनुमानगढ़ी का उदाहरण: साधु-संतों की विश्वसनीयता

केजरीवाल ने हनुमानगढ़ी जैसे प्राचीन मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्षों से साधु-संत इन मंदिरों का संचालन कर रहे हैं और करोड़ों रुपये के चढ़ावे के बावजूद वहाँ कभी वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं लगा। उनके अनुसार, साधु-संत निर्मोही होते हैं और मंदिर की गरिमा एवं परंपराओं को बेहतर ढंग से संरक्षित कर सकते हैं।

सौरभ भारद्वाज की तीखी आलोचना

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब मंदिर ट्रस्ट का गठन भी केंद्र सरकार ने किया और अब CEO की नियुक्ति भी वही करेगी, तो व्यवस्था में आखिर क्या बदलाव आएगा। भारद्वाज ने कहा कि देश के करोड़ों हिंदुओं की माँग किसी नए CEO की नियुक्ति नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन को साधु-संतों के हाथों में सौंपने की है।

उन्होंने धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में सरकार की दखलंदाजी को अनुचित बताते हुए कहा कि धार्मिक मामलों का संचालन धर्माचार्यों एवं संत समाज द्वारा ही किया जाना चाहिए।

चढ़ावे की चोरी के आरोप और ध्यान भटकाने का आरोप

AAP ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम कथित तौर पर श्रीराम मंदिर से अरबों रुपये के चढ़ावे की चोरी के मामले से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में जवाबदेही तय नहीं होती, महज प्रशासनिक फेरबदल से समस्या का समाधान नहीं होगा।

AAP की केंद्र सरकार से माँग

आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से माँग की है कि श्रीराम मंदिर के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी पूरी तरह साधु-संतों और धर्माचार्यों को सौंपी जाए, ताकि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित हो सके। यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक रणनीति है — हिंदू आस्था के प्रतीक पर दावेदारी जताकर BJP के एकाधिकार को चुनौती देना। गौरतलब है कि केजरीवाल ने अभी हाल ही में रामलला के दर्शन किए, जो इस माँग को राजनीतिक संदर्भ देता है। साधु-संतों की विश्वसनीयता का तर्क भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि किन साधु-संतों को, किस प्रक्रिया से, और किसकी निगरानी में यह जिम्मेदारी दी जाए। चढ़ावे की चोरी के आरोप — जिनकी अभी स्वतंत्र जाँच नहीं हुई है — को CEO विवाद से जोड़कर AAP ने एजेंडा तय करने की कोशिश की है, लेकिन जब तक ये आरोप सिद्ध नहीं होते, इन्हें कथित ही माना जाना चाहिए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर में CEO नियुक्ति का विवाद क्या है?
केंद्र सरकार अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के प्रबंधन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की तैयारी में है। AAP सहित कई पक्षों का विरोध है कि यह नियुक्ति सरकारी नियंत्रण को और मज़बूत करेगी, जबकि मंदिर का संचालन धर्माचार्यों को सौंपा जाना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर प्रबंधन पर क्या कहा?
केजरीवाल ने कहा कि श्रीराम मंदिर आस्था का केंद्र है और इसका संचालन धार्मिक मूल्यों से जुड़े धर्माचार्यों को सौंपा जाना चाहिए, न कि नेताओं या सरकारी अधिकारियों को। उन्होंने हनुमानगढ़ी का उदाहरण देते हुए साधु-संतों की वित्तीय ईमानदारी की सराहना की।
AAP ने चढ़ावे की चोरी का आरोप क्यों लगाया?
पार्टी ने कथित तौर पर राम मंदिर से अरबों रुपये के चढ़ावे की चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि CEO नियुक्ति की घोषणा इस मुद्दे से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश है। हालाँकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर क्या सवाल उठाए?
दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि जब मंदिर ट्रस्ट का गठन भी केंद्र सरकार ने किया और CEO भी वही नियुक्त करेगी, तो प्रबंधन में वास्तविक बदलाव कैसे आएगा। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप को अनुचित बताया।
हनुमानगढ़ी का उदाहरण क्यों दिया गया?
केजरीवाल ने हनुमानगढ़ी का उदाहरण यह बताने के लिए दिया कि वर्षों से साधु-संत इस प्राचीन मंदिर का संचालन कर रहे हैं और करोड़ों रुपये के चढ़ावे के बावजूद वहाँ कभी वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं लगा। इससे उन्होंने यह तर्क दिया कि साधु-संत राम मंदिर को भी उतनी ही निष्ठा से संचालित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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