महाराष्ट्र: अश्विनी बिद्रे के परिवार ने राष्ट्रपति और सीजेआई से इच्छामृत्यु की याचिका की

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महाराष्ट्र: अश्विनी बिद्रे के परिवार ने राष्ट्रपति और सीजेआई से इच्छामृत्यु की याचिका की

सारांश

महिला पुलिस अधिकारी अश्विनी बिद्रे की हत्या के मामले में उनके परिवार ने राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश से इच्छामृत्यु की मांग की। यह मामला न्याय के लिए संघर्ष और प्रशासनिक विफलता का उदाहरण है जो राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Key Takeaways

  • अश्विनी बिद्रे के परिवार ने इच्छामृत्यु की याचिका दी है।
  • न्याय नहीं मिलने के कारण परिवार का दर्द स्पष्ट है।
  • मामला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है।
  • परिवार ने राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश से मदद की मांग की है।
  • यह घटना महाराष्ट्र पुलिस के लिए एक बड़ा सवाल है।

कोल्हापुर, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। महिला पुलिस अधिकारी अश्विनी बिद्रे की मृत्यु के संदर्भ में उनके परिवार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

परिवार का कहना है कि अश्विनी बिद्रे की हत्या के मामले में एक दशक बीत जाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से इच्छामृत्यु की याचिका प्रस्तुत की है। परिवार ने यह भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अदालत में हत्या साबित होने के बावजूद प्रशासन ने आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है। उन्हें यह भी बताया गया कि सेवा के दौरान मिलने वाले लाभ से भी वंचित रखा गया है।

मृत अश्विनी बिद्रे के पति राजू गोरे ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि अश्विनी बिद्रे हत्याकांड का निर्णय आए एक वर्ष हो चुका है, फिर भी हमें उनका मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हमें नवी मुंबई पुलिस से मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। इसके अलावा, महाराष्ट्र सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का भी कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा बैंक लॉकर में जो पैसा है, वह भी हमें नहीं दिया गया।

राजू गोरे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार के किसी भी विभाग ने उनकी बात नहीं सुनी, इसलिए उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति को प्रार्थना पत्र दिया है कि हमारी इच्छामृत्यु का आवेदन स्वीकार किया जाए।

यह मामला महाराष्ट्र पुलिस में भ्रष्टाचार, रिश्तों के दुरुपयोग और जांच की कमियों का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। अश्विनी बिद्रे को एक मेहनती और ईमानदार अधिकारी के रूप में याद किया जाता है, जिनकी मृत्यु ने पूरे राज्य में हलचल पैदा कर दी थी।

Point of View

परिवार का दर्द और प्रशासनिक विफलता दोनों ही स्पष्ट हैं। न्याय की मांग करते हुए परिवार ने उच्चतम अधिकारियों से इच्छामृत्यु की याचिका दी है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

अश्विनी बिद्रे का परिवार इच्छामृत्यु की मांग क्यों कर रहा है?
अश्विनी बिद्रे के परिवार का आरोप है कि उन्हें न्याय नहीं मिला है और प्रशासन ने आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है।
क्या अश्विनी बिद्रे की हत्या का मामला अदालत में चल रहा है?
हाँ, अश्विनी बिद्रे की हत्या का मामला अदालत में है, लेकिन परिवार का कहना है कि फैसला आने के बावजूद उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिला।
अश्विनी बिद्रे को किस प्रकार की सेवाएं नहीं मिल रही हैं?
परिवार का कहना है कि उन्हें सेवा के दौरान मिलने वाले लाभ और अन्य सुविधाएं नहीं दी गई हैं।
परिवार ने किससे इच्छामृत्यु की मांग की है?
परिवार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से इच्छामृत्यु की मांग की है।
इस मामले में प्रशासन की भूमिका क्या है?
परिवार का आरोप है कि प्रशासन ने अदालत के फैसले के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की है।
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