27 जुलाई 2026
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परीक्षा सुधार कार्य बल पर हिमंता बिस्वा सरमा ने की मोदी की तारीफ, नंदन नीलेकणी की अगुआई को बताया सही चुनाव

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परीक्षा सुधार कार्य बल पर हिमंता बिस्वा सरमा ने की मोदी की तारीफ, नंदन नीलेकणी की अगुआई को बताया सही चुनाव

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी के परीक्षा सुधार कार्य बल पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुलकर समर्थन जताया और नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता को सटीक चुनाव बताया। सरमा के अनुसार, यह पहल छात्रों के विश्वास और योग्यता-आधारित परीक्षा प्रणाली की बुनियाद को नई मज़बूती देगी।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा सुधार कार्य बल का स्वागत किया।
सरमा ने कहा कि विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली पारदर्शिता, निष्पक्षता और छात्रों के विश्वास पर टिकी होती है।
कार्य बल के अध्यक्ष के रूप में नंदन नीलेकणी की नियुक्ति को सरमा ने 'सर्वश्रेष्ठ चुनाव' बताया।
सरमा ने समिति के अन्य सदस्यों को भी राष्ट्र निर्माण को समर्पित 'विशिष्ट व्यक्ति' कहकर सराहा।
कार्य बल से उम्मीद है कि यह छात्र-केंद्रित और योग्यता-आधारित परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार, 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय कार्य बल का खुलकर स्वागत किया। सरमा ने कहा कि यह पहल सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और योग्यता-आधारित चयन को नई मज़बूती देगी।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में सरमा ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय का वे 'तहे दिल से' स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि एक विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली 'पारदर्शिता, निष्पक्षता और छात्रों के विश्वास' की नींव पर खड़ी होती है। सरमा के अनुसार, इन लक्ष्यों को पाने के लिए ईमानदार आत्मनिरीक्षण और अधिक मज़बूत, छात्र-केंद्रित प्रक्रिया के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता अनिवार्य है।

नंदन नीलेकणी की नियुक्ति पर विशेष प्रशंसा

कार्य बल की अध्यक्षता के लिए नंदन नीलेकणी को चुने जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का नेतृत्व करने के लिए उनसे बेहतर कोई व्यक्ति नहीं हो सकता। सरमा ने रेखांकित किया कि नीलेकणी के पास यह प्रदर्शित करने का 'समृद्ध अनुभव' है कि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक प्रणालियों को किस तरह अधिक त्रुटिरहित और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। गौरतलब है कि नीलेकणी आधार परियोजना की आर्किटेक्चर में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

समिति के अन्य सदस्यों की सराहना

सरमा ने कार्य बल के अन्य सदस्यों को भी 'विशिष्ट व्यक्ति' बताया, जिन्होंने नवोन्मेष और दृढ़ संकल्प के ज़रिये अपना जीवन राष्ट्र निर्माण को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि उनकी शुभकामनाएँ समिति के सभी सदस्यों के साथ हैं।

सुधार एजेंडे पर असर

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह कार्य बल भारत के व्यापक सुधार एजेंडे को और पुख़्ता करेगा और छात्रों के लिए निष्पक्ष, योग्यता-आधारित और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक बहस चल रही है। आने वाले हफ्तों में कार्य बल की कार्ययोजना और सिफारिशों पर सभी की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि कार्य बल की सिफारिशें कितनी बाध्यकारी होंगी और क्या उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। हिमंता बिस्वा सरमा जैसे BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का समर्थन केंद्र की पहल को राजनीतिक ताक़त देता है, पर विपक्ष-शासित राज्यों की भागीदारी के बिना यह सुधार अधूरा रह सकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परीक्षा सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय कार्य बल क्या है?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति है, जिसका उद्देश्य देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता-आधारित बनाना है। इसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस कार्य बल पर क्या कहा?
सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय का 'तहे दिल से' स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि एक विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली पारदर्शिता, निष्पक्षता और छात्रों के विश्वास पर टिकी होती है।
नंदन नीलेकणी को कार्य बल का प्रमुख क्यों बनाया गया?
सरमा के अनुसार, नीलेकणी के पास यह प्रदर्शित करने का 'समृद्ध अनुभव' है कि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक प्रणालियों को त्रुटिरहित और नागरिक-केंद्रित कैसे बनाया जाए। वे आधार जैसी बड़ी सार्वजनिक डिजिटल परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं।
इस कार्य बल से छात्रों को क्या फायदा होगा?
कार्य बल का लक्ष्य सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्ष और योग्यता-आधारित प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, जिससे परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल हो सके। यह पहल परीक्षा अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
यह कार्य बल कब तक अपनी सिफारिशें देगा?
अभी तक कार्य बल की सिफारिशों की कोई आधिकारिक समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। इसकी कार्ययोजना और रिपोर्ट आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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