असम सरकार का खंडन: स्कूलों में अभिभावकों और जनता के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं, गलत खबर फैलाने पर होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
असम सरकार ने 30 सितंबर 2026 को उन खबरों को पूरी तरह नकार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि सरकारी स्कूलों में आम जनता और अभिभावकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी खबरें 'झूठी और बेबुनियाद' हैं और इन्हें फैलाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
असम सीएमओ का आधिकारिक बयान
असम मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'कुछ मीडिया संस्थानों में सरकारी स्कूलों में लोगों के जाने पर पाबंदी और अनुमति की जरूरत के बारे में आई खबरें पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद हैं। जनता और अभिभावक बिना किसी रोक-टोक के हमेशा की तरह स्कूलों में जा सकते हैं।' सीएमओ ने यह भी चेतावनी दी कि असम की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने के लिए दुर्भावनापूर्ण झूठ फैलाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु का स्पष्टीकरण
असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने भी एक्स पर अलग से स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, 'स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी या प्रांतीय स्कूलों में जाने पर किसी भी तरह की रोक लगाने वाला कोई नोटिस या सर्कुलर जारी नहीं किया है।' उन्होंने जोड़ा कि अभिभावकों और नागरिकों का स्कूलों में आने और सुझाव देने के लिए स्वागत है, बशर्ते नियमित कक्षाओं में कोई बाधा न आए और अध्ययन का वातावरण बना रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएँ तेज़ी से फैल रही हैं, जो कई बार स्थापित सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर अनावश्यक भ्रम पैदा करती हैं।
गलत संदेश फैलाने वाले सीआरसीसी को कारण बताओ नोटिस
शिक्षा मंत्री ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि व्हाट्सऐप पर स्कूल दौरों पर पाबंदी से संबंधित गलत संदेश फैलाने के लिए नूरुल हुसैन नामक एक सीआरसीसी (क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर) को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया है।
कामरूप मेट्रो जिले के स्कूल इंस्पेक्टर की ओर से नूरुल हुसैन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उन्होंने आधिकारिक क्लस्टर ग्रुप में एक अनधिकृत और आपत्तिजनक संदेश भेजा, जिसमें 'इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स' का नाम और पद बिना पूर्व मंजूरी, अधिकार या निर्देश के इस्तेमाल किया गया। पत्र में स्पष्ट किया गया कि कोई भी सीआरसीसी इंस्पेक्टर की ओर से कोई सूचना जारी करने या फैलाने के लिए अधिकृत नहीं है, जब तक कि सक्षम अधिकारी ने उसे विधिवत मंजूरी न दी हो।
नूरुल हुसैन को 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
असम की शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता
गौरतलब है कि असम सरकार हाल के वर्षों में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कदम उठा रही है। अभिभावकों की भागीदारी इस सुधार प्रक्रिया का अहम हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में स्कूल प्रवेश पर पाबंदी की अफवाहें न केवल भ्रामक हैं, बल्कि शिक्षा विभाग की साख को भी नुकसान पहुँचाती हैं।
आने वाले दिनों में सरकार यह देखेगी कि गलत सूचना के इस मामले में जाँच के बाद क्या आधिकारिक कदम उठाए जाते हैं।