23 अगस्त 2026
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हरियाणा स्कूलों में मीडिया प्रवेश पर नया आदेश: शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा बोले — बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि

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हरियाणा स्कूलों में मीडिया प्रवेश पर नया आदेश: शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा बोले — बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि

सारांश

हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री के लिए प्रिंसिपल की लिखित अनुमति अनिवार्य कर दी है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इसे बच्चों की सुरक्षा का कदम बताया, जबकि विपक्ष इसे मीडिया पर अघोषित प्रतिबंध करार दे रहा है।

मुख्य बातें

हरियाणा सरकार ने 22 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूलों में बाहरी प्रवेश के लिए प्रिंसिपल की लिखित अनुमति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया।
छात्रों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर पूर्ण रोक लगाई गई है।
नियम उल्लंघन पर BNS, पोक्सो, JJ एक्ट और IT एक्ट के तहत कार्रवाई और पुलिस को सूचना देने का प्रावधान।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा — SMC सदस्यों के साथ जाने पर कोई रोक नहीं, जवाबदेही सुनिश्चित करना उद्देश्य है।
विपक्ष ने आदेश को पारदर्शिता विरोधी बताते हुए सवाल उठाए हैं।

हरियाणा सरकार ने 22 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों की एंट्री को लेकर एक नया आदेश जारी किया, जिसके तहत प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। इस आदेश को विपक्ष मीडिया पर अघोषित प्रतिबंध बता रहा है, जबकि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने स्पष्ट किया कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

नए आदेश में क्या है

हरियाणा सरकार के इस आदेश के अनुसार, स्कूल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक बाहरी व्यक्ति को विजिटर रजिस्टर में अपनी एंट्री दर्ज करानी होगी। छात्रों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर पूर्ण रोक लगाई गई है। इसके अलावा, बिना प्रिंसिपल या शिक्षक की मौजूदगी के कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, शौचालय या खेल मैदान में जाना वर्जित है।

नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी तथा पुलिस को सूचित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री का पक्ष

शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने हंसी (हरियाणा) में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'गांव में एसएमसी है, गांव के ही लोग हैं, गांव के सरपंच हैं, पंचायत के चुने नुमाइंदे हैं, तो कोई भी अगर वहां पर जाए, कल कोई गड़बड़ करके आ जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?'

उन्होंने आगे कहा, 'गांव का स्कूल इस देश की राष्ट्रीय धरोहर है। अगर कोई भी व्यक्ति जा रहा है, तो गांव के प्राबुद्ध लोगों को लेकर जाइए। वहां पर हमने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) बनाई हुई है — आप एसएमसी के सदस्यों के साथ बातचीत करें।' ढांडा ने स्पष्ट किया कि प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना इस आदेश का मूल उद्देश्य है।

मीडिया कवरेज पर मंत्री की सफाई

मीडिया पर प्रतिबंध के आरोपों को खारिज करते हुए ढांडा ने कहा, 'मीडिया को पता है कि उन्हें कितना और क्या कवरेज करना है। मीडिया की आड़ में इधर-उधर करके प्रश्नचिह्न मत लगाइए।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि बच्चों के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए स्कूलों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि ढांडा ने यह भी कहा कि वे स्वयं मंत्री बनने के बाद से नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करते रहे हैं और समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का रुख

विपक्षी दलों ने इस आदेश को सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता खत्म करने की कोशिश बताया है। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर दिए बयान पर पलटवार करते हुए ढांडा ने कहा कि पंजाब के लोग मुख्यमंत्री सैनी को पसंद करते हैं और उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम राष्ट्रीय दल हैं, इसलिए वहां जाना हमारा राजनीतिक अधिकार है।'

आगे क्या होगा

यह आदेश हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि बिना स्पष्ट अपील प्रक्रिया के यह नियम पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सार्वजनिक जवाबदेही को प्रभावित कर सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि SMC की भूमिका को मजबूत करना सकारात्मक है, लेकिन मीडिया की पहुँच पर रोक से सरकारी स्कूलों की स्थिति की स्वतंत्र निगरानी कठिन हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक SMC स्वयं स्वतंत्र और सक्रिय न हों, यह व्यवस्था जवाबदेही का विकल्प नहीं बन सकती। पोक्सो और IT एक्ट जैसे कड़े कानूनों का उल्लेख पत्रकारों और अभिभावकों को भी हतोत्साहित कर सकता है — यह असंतुलन चिंताजनक है। असली सवाल यह है कि सरकार बच्चों की सुरक्षा चाहती है या सरकारी स्कूलों की खामियों पर पर्दा।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा सरकार ने स्कूलों में प्रवेश को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है?
हरियाणा सरकार ने आदेश दिया है कि प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति सरकारी स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकता। इसके साथ ही छात्रों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई है।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इस आदेश को क्यों सही ठहराया?
ढांडा ने कहा कि यह आदेश बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। उनके अनुसार, गांव के स्कूलों में SMC और स्थानीय जिम्मेदार लोगों के साथ जाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन बिना जवाबदेही के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा सकता।
नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
आदेश के अनुसार, नियम उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही पुलिस को तत्काल सूचना देने का प्रावधान भी है।
विपक्ष इस आदेश का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्षी दलों का कहना है कि यह आदेश मीडिया की पहुँच को रोककर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को जनता से छुपाने का प्रयास है। आलोचकों का तर्क है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होगी।
स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की इसमें क्या भूमिका है?
शिक्षा मंत्री के अनुसार, कोई भी बाहरी व्यक्ति SMC सदस्यों के साथ स्कूल जा सकता है। SMC में गांव के सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय जिम्मेदार लोग शामिल होते हैं, जो विजिट की जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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