हरियाणा स्कूलों में मीडिया प्रवेश पर नया आदेश: शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा बोले — बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा सरकार ने 22 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों की एंट्री को लेकर एक नया आदेश जारी किया, जिसके तहत प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। इस आदेश को विपक्ष मीडिया पर अघोषित प्रतिबंध बता रहा है, जबकि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने स्पष्ट किया कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
नए आदेश में क्या है
हरियाणा सरकार के इस आदेश के अनुसार, स्कूल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक बाहरी व्यक्ति को विजिटर रजिस्टर में अपनी एंट्री दर्ज करानी होगी। छात्रों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर पूर्ण रोक लगाई गई है। इसके अलावा, बिना प्रिंसिपल या शिक्षक की मौजूदगी के कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, शौचालय या खेल मैदान में जाना वर्जित है।
नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी तथा पुलिस को सूचित किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री का पक्ष
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने हंसी (हरियाणा) में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'गांव में एसएमसी है, गांव के ही लोग हैं, गांव के सरपंच हैं, पंचायत के चुने नुमाइंदे हैं, तो कोई भी अगर वहां पर जाए, कल कोई गड़बड़ करके आ जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?'
उन्होंने आगे कहा, 'गांव का स्कूल इस देश की राष्ट्रीय धरोहर है। अगर कोई भी व्यक्ति जा रहा है, तो गांव के प्राबुद्ध लोगों को लेकर जाइए। वहां पर हमने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) बनाई हुई है — आप एसएमसी के सदस्यों के साथ बातचीत करें।' ढांडा ने स्पष्ट किया कि प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना इस आदेश का मूल उद्देश्य है।
मीडिया कवरेज पर मंत्री की सफाई
मीडिया पर प्रतिबंध के आरोपों को खारिज करते हुए ढांडा ने कहा, 'मीडिया को पता है कि उन्हें कितना और क्या कवरेज करना है। मीडिया की आड़ में इधर-उधर करके प्रश्नचिह्न मत लगाइए।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि बच्चों के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए स्कूलों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
गौरतलब है कि ढांडा ने यह भी कहा कि वे स्वयं मंत्री बनने के बाद से नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करते रहे हैं और समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का रुख
विपक्षी दलों ने इस आदेश को सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता खत्म करने की कोशिश बताया है। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर दिए बयान पर पलटवार करते हुए ढांडा ने कहा कि पंजाब के लोग मुख्यमंत्री सैनी को पसंद करते हैं और उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम राष्ट्रीय दल हैं, इसलिए वहां जाना हमारा राजनीतिक अधिकार है।'
आगे क्या होगा
यह आदेश हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि बिना स्पष्ट अपील प्रक्रिया के यह नियम पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सार्वजनिक जवाबदेही को प्रभावित कर सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि SMC की भूमिका को मजबूत करना सकारात्मक है, लेकिन मीडिया की पहुँच पर रोक से सरकारी स्कूलों की स्थिति की स्वतंत्र निगरानी कठिन हो सकती है।