23 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: राजस्थान-UP के सरकारी स्कूलों में मीडिया प्रवेश और वीडियोग्राफी पर रोक के सर्कुलर को याचिका

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: राजस्थान-UP के सरकारी स्कूलों में मीडिया प्रवेश और वीडियोग्राफी पर रोक के सर्कुलर को याचिका

सारांश

राजस्थान और UP के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों व मीडियाकर्मियों की एंट्री और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने वाले सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में इसे संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।

मुख्य बातें

वकील नरेंद्र मिश्रा ने 23 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राजस्थान और UP के सर्कुलर रद्द करने की माँग की।
याचिका में केंद्र सरकार और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है।
सर्कुलर के तहत पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों की सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति एंट्री प्रतिबंधित है।
फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए प्रिंसिपल की पूर्व अनुमति अनिवार्य।
राजस्थान का सर्कुलर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी किया गया था।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A के उल्लंघन का आरोप।

सर्वोच्च न्यायालय में 23 अगस्त 2026 को एक अहम याचिका दाखिल की गई है, जिसमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों द्वारा सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा वीडियोग्राफी पर रोक लगाने वाले सर्कुलर को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की माँग की गई है। वकील नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र सरकार और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में क्या है

याचिका में तर्क दिया गया है कि दोनों राज्य सरकारों के ये आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) और अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन मौलिक अधिकारों की आड़ में नागरिकों और मीडिया की पहुँच को बाधित नहीं किया जा सकता।

राजस्थान का सर्कुलर: मुख्य प्रावधान

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों सहित किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रिंसिपल या अधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

सर्कुलर के अनुसार, हर आगंतुक को विजिटर रजिस्टर में अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके अलावा, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, छात्रावासों, खेल के मैदानों और रेस्टरूम जैसे क्षेत्रों में बाहरी व्यक्ति तभी जा सकेंगे जब उनके साथ कोई शिक्षक या अधिकृत अधिकारी हो। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए भी पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है।

विवाद का केंद्र: प्रेस की स्वतंत्रता बनाम स्कूल सुरक्षा

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी स्कूलों की दशा और वहाँ की सुविधाओं को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार रिपोर्टिंग हो रही है। आलोचकों का कहना है कि ये सर्कुलर पारदर्शिता पर अंकुश लगाने की कोशिश है, जबकि राज्य सरकारों का तर्क है कि ये आदेश छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल की रक्षा के लिए जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इसी तरह का सर्कुलर जारी किया था, जिसे अब इस याचिका में राजस्थान के आदेश के साथ चुनौती दी गई है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल होने के बाद अब यह देखना होगा कि न्यायालय इसे सुनवाई के लिए स्वीकार करता है या नहीं। यदि मामला स्वीकार होता है, तो केंद्र सरकार और दोनों राज्यों को अपना पक्ष रखना होगा। इस फैसले का असर देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है, जहाँ इसी तरह के प्रतिबंध लागू हो सकते हैं या लागू होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शौचालय की दशा और शिक्षकों की अनुपस्थिति जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में लाने में अहम भूमिका निभाई है। 'छात्र सुरक्षा' की आड़ में लागू ये प्रतिबंध अगर न्यायिक समीक्षा से नहीं गुज़रे, तो अन्य राज्यों के लिए एक नज़ीर बन सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का रुख यह तय करेगा कि सार्वजनिक संस्थानों में जवाबदेही और सुरक्षा के बीच संतुलन कहाँ बनता है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान और UP के सरकारी स्कूलों में क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?
दोनों राज्यों के सर्कुलर के तहत पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों को बिना पूर्व अनुमति सरकारी स्कूलों में प्रवेश की अनुमति नहीं है। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए भी प्रिंसिपल की अनुमति अनिवार्य की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका किसने और क्यों दाखिल की?
वकील नरेंद्र मिश्रा ने 23 अगस्त 2026 को यह याचिका दाखिल की। उनका तर्क है कि ये सर्कुलर संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और इन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
राजस्थान का सर्कुलर कब जारी हुआ और इसमें क्या नियम हैं?
राजस्थान का सर्कुलर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने 16 अगस्त 2026 को जारी किया। इसके तहत हर बाहरी आगंतुक को विजिटर रजिस्टर में जानकारी दर्ज करनी होगी और कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल के मैदान जैसे क्षेत्रों में बिना किसी अधिकृत अधिकारी के प्रवेश वर्जित है।
इस याचिका का असर किन पर पड़ेगा?
इस याचिका का सीधा असर पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया क्रिएटर्स और सिविल सोसाइटी संगठनों पर पड़ेगा, जो सरकारी स्कूलों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह के प्रतिबंधों की दिशा तय कर सकता है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई आदेश दिया है?
अभी तक सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया है। याचिका दाखिल हुई है और अब यह देखना होगा कि न्यायालय इसे सुनवाई के लिए स्वीकार करता है या नहीं, जिसके बाद केंद्र और दोनों राज्यों को अपना पक्ष रखना होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 12 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 5 दिन पहले
  8. 2 महीने पहले