3 सितंबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका: राजस्थान-UP के सरकारी स्कूलों में मीडिया प्रवेश प्रतिबंध बरकरार

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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका: राजस्थान-UP के सरकारी स्कूलों में मीडिया प्रवेश प्रतिबंध बरकरार

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों व यूट्यूबर्स के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई से इनकार के बाद दोनों राज्यों के आदेश फिलहाल बरकरार हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 सितंबर 2026 को याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की जनहित याचिका अनुच्छेद 32 के तहत खारिज की।
राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 16 अगस्त 2026 को सर्कुलर जारी कर बाहरी लोगों, पत्रकारों और यूट्यूबर्स के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की पूर्व अनुमति अनिवार्य की।
अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 19 अगस्त 2026 को काउंसिल स्कूलों में बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाई।
आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा सहित कई UP जिलों में भी समान निर्देश लागू।
पीठ ने इन आदेशों की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की; संबंधित उच्च न्यायालयों में चुनौती का विकल्प खुला।

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 सितंबर 2026 को राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर विचार करने की स्थिति में नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा ने यह जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें दो राज्यों के अलग-अलग प्रशासनिक आदेशों को निशाना बनाया गया था। राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 16 अगस्त 2026 को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसके तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति अनिवार्य कर दी गई। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग पर भी पहले से लिखित स्वीकृति की शर्त लगाई गई।

उत्तर प्रदेश में अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 19 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी किया, जिसमें बाहरी व्यक्तियों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना काउंसिल स्कूलों में प्रवेश और फोटो या वीडियो बनाने पर रोक लगाई गई। याचिका के अनुसार आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत कई अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के निर्देश लागू किए गए हैं।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिका में तर्क दिया गया कि इस तरह के प्रशासनिक प्रतिबंधों से सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति — बुनियादी ढाँचे की कमियाँ, सुविधाओं का अभाव — को सार्वजनिक दायरे में लाना कठिन हो जाएगा। यह मामला कथित तौर पर 'स्कूल ठीक करो' अभियान के संदर्भ में भी चर्चा में आया, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों की कमियों को उजागर करना बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

पीठ ने इन आदेशों की वैधता पर कोई विस्तृत टिप्पणी किए बिना याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने केवल यह स्पष्ट किया कि वह अनुच्छेद 32 के तहत इस मामले में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं रखता। गौरतलब है कि अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया जा सकता है, परंतु न्यायालय अपने विवेकाधिकार से ऐसी याचिकाओं को उच्च न्यायालय जाने का संकेत देते हुए भी खारिज कर सकता है।

आगे की स्थिति

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद दोनों राज्यों के प्रशासनिक आदेश फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में किसी सक्रिय चुनौती के दायरे में नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल मीडिया और नागरिक पत्रकारिता की भूमिका को लेकर व्यापक बहस जारी है। भविष्य में संबंधित उच्च न्यायालयों में इन आदेशों को चुनौती देने का विकल्प खुला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक रूप से यह दोनों राज्यों के आदेशों को फिलहाल अप्रभावित रखता है। असली सवाल यह है कि क्या 'स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा' के नाम पर जारी ये सर्कुलर नागरिक निगरानी और पत्रकारिता की उस भूमिका को सीमित करते हैं जो सार्वजनिक शिक्षा की जवाबदेही के लिए ज़रूरी है। सरकारी स्कूलों की दशा उजागर करने में नागरिक पत्रकारिता की भूमिका अब स्थापित है — ऐसे में अनुमति-आधारित प्रवेश व्यवस्था पारदर्शिता और नौकरशाही नियंत्रण के बीच की रेखा को धुंधला करती है। संबंधित उच्च न्यायालयों में इन आदेशों को चुनौती देने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस जनहित याचिका पर विचार करने की स्थिति में नहीं है। न्यायालय ने इन प्रतिबंधों की वैधता पर कोई विस्तृत राय नहीं दी।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?
राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 16 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति अनिवार्य की है। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग के लिए भी पहले से लिखित स्वीकृति लेनी होगी।
उत्तर प्रदेश के किन जिलों में ऐसे आदेश जारी हुए हैं?
अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 19 अगस्त 2026 को पहला आदेश जारी किया। याचिका के अनुसार आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश लागू किए गए हैं।
इन प्रतिबंधों को चुनौती देने का अब क्या रास्ता बचा है?
सर्वोच्च न्यायालय के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई से इनकार के बाद संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों — राजस्थान उच्च न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय — में इन आदेशों को चुनौती देने का विकल्प खुला है। सर्वोच्च न्यायालय ने इन आदेशों को वैध नहीं ठहराया, केवल अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप से इनकार किया।
'स्कूल ठीक करो' अभियान इस मामले से कैसे जुड़ा है?
याचिका के संदर्भ में 'स्कूल ठीक करो' अभियान का उल्लेख किया गया, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं की कमियों को उजागर करना बताया गया है। आलोचकों का कहना है कि इन प्रतिबंधों से ऐसे अभियानों की गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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