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राजस्थान स्कूलों में फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी बैन: गहलोत ने आदेश तत्काल वापस लेने की माँग की

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राजस्थान स्कूलों में फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी बैन: गहलोत ने आदेश तत्काल वापस लेने की माँग की

सारांश

राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी पर रोक लगाई — और पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने इसे पारदर्शिता पर हमला बताते हुए तत्काल वापसी की माँग की। सवाल यह है कि यह आदेश किसने और क्यों जारी किया।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 18 अगस्त को राजस्थान सरकार से सरकारी स्कूलों में मीडिया गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध को तत्काल वापस लेने की माँग की।
राज्य सरकार के आदेश के तहत बिना पूर्व अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और अन्य मीडिया गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं।
गहलोत ने सवाल उठाया कि यह निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जानकारी में लिया गया था या कैबिनेट की सामूहिक मंज़ूरी से।
उन्होंने शिक्षा में पेपर लीक रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्यापक सुधारों की माँग भी की।
राजस्थान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार, 18 अगस्त को राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार से माँग की कि सरकारी स्कूलों में बिना पूर्व अनुमति के फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और मीडिया गतिविधियों पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस आदेश ने शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता को और कमज़ोर किया है तथा स्कूलों में पारदर्शिता के लिए यह घातक कदम है।

विवादित आदेश क्या है

राजस्थान सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया जिसके तहत सरकारी स्कूलों में बिना पूर्व अनुमति के किसी भी व्यक्ति — पत्रकार या आम नागरिक — को फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी अथवा अन्य मीडिया गतिविधियाँ करने से रोका गया है। यह आदेश तब सामने आया जब देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस जारी है।

गहलोत ने सवाल उठाया, 'आपने मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी है। बिना अनुमति कोई और भी अंदर नहीं जा सकता। स्कूलों में कई तरह की जरूरतें और गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन आप कह रहे हैं कि बिना अनुमति कोई अंदर नहीं जाएगा।'

निर्णय प्रक्रिया पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह जानना चाहा कि यह आदेश किस स्तर पर लिया गया — क्या इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जानकारी में लाया गया था, या राज्य मंत्रिमंडल ने सामूहिक रूप से इसे स्वीकृति दी थी।

उन्होंने कहा, 'क्या मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से सलाह ली थी? क्या पूरी कैबिनेट ने इस आदेश पर विचार किया था? क्या यह कैबिनेट का सामूहिक फैसला था? हम यह जानना चाहते हैं।' गहलोत का यह सवाल सरकार के आंतरिक समन्वय पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

पारदर्शिता और शिक्षा सुधार पर ज़ोर

गहलोत ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को प्रतिबंध लगाकर नहीं, बल्कि अधिक पारदर्शिता और ठोस सुधारों के ज़रिए मज़बूत किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की माँग की जो पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं को रोक सके और शिक्षा क्षेत्र में नया दृष्टिकोण लाए।

उन्होंने कहा, 'शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों की ज़रूरत है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जो पेपर लीक को रोके और दुनिया को यह संदेश दे कि भारत शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।' गौरतलब है कि राजस्थान में पेपर लीक के मामले पहले भी विवाद का कारण बन चुके हैं।

आम जनता पर असर

गहलोत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य आम नागरिक की सबसे बड़ी प्राथमिकताएँ हैं। उनके अनुसार, 'सामान्य नागरिक अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और अपने बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहता है।' इस प्रतिबंध से अभिभावकों और पत्रकारों की स्कूलों की वास्तविक स्थिति जानने की क्षमता सीमित होती है, जो सार्वजनिक जवाबदेही के लिहाज़ से चिंताजनक है।

आगे क्या

राजस्थान सरकार की ओर से इस माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्ष का दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि भजनलाल शर्मा सरकार इस आदेश पर पुनर्विचार करती है या अपने निर्णय पर अडिग रहती है। शिक्षा विशेषज्ञों और मीडिया संगठनों की प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे को आने वाले दिनों में और गर्म कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके सवाल — कि यह आदेश किसने और किस प्रक्रिया से जारी किया — वैध हैं और सरकार को इनका जवाब देना चाहिए।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान सरकार का स्कूलों में फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी बैन आदेश क्या है?
राजस्थान सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसके तहत सरकारी स्कूलों में बिना पूर्व अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और अन्य मीडिया गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं। इसमें पत्रकारों और आम नागरिकों दोनों पर यह पाबंदी लागू होती है।
अशोक गहलोत ने इस आदेश पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 18 अगस्त को इस आदेश को तत्काल वापस लेने की माँग की। उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध स्कूलों में पारदर्शिता को कमज़ोर करता है और शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाता है।
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर क्या सवाल उठाए?
गहलोत ने पूछा कि क्या यह आदेश मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जानकारी में जारी किया गया या कैबिनेट की सामूहिक मंज़ूरी से। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्णय किस स्तर पर और किस प्रक्रिया से लिया गया।
इस प्रतिबंध से आम लोगों और मीडिया पर क्या असर पड़ेगा?
इस आदेश से पत्रकार और अभिभावक बिना अनुमति सरकारी स्कूलों की स्थिति का दस्तावेज़ीकरण नहीं कर पाएंगे। आलोचकों के अनुसार इससे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सार्वजनिक निगरानी कमज़ोर होगी।
गहलोत ने शिक्षा सुधार को लेकर क्या माँगें रखीं?
गहलोत ने माँग की कि शिक्षा में पेपर लीक जैसी समस्याओं को रोकने के लिए ठोस सुधार किए जाएँ और व्यवस्था को प्रतिबंध नहीं बल्कि पारदर्शिता के ज़रिए मज़बूत किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत को शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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