27 जून 2026
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असम में मुहर्रम शांतिपूर्वक संपन्न, मार्गेरिटा से गुवाहाटी तक दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

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असम में मुहर्रम शांतिपूर्वक संपन्न, मार्गेरिटा से गुवाहाटी तक दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

सारांश

असम में मुहर्रम इस बार भी शांति और भाईचारे की मिसाल बना। मार्गेरिटा से गुवाहाटी तक दर्जनभर जिलों में ताजिया जुलूस निकले, जिनमें मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हुए — बहु-धार्मिक असम की सामूहिक एकता का जीवंत प्रमाण।

मुख्य बातें

असम में 26 जून 2026 को मुहर्रम पूरे राज्य में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा में केंद्रीय ताजिया जुलूस राष्ट्रीय राजमार्ग-315 से होकर गुजरा।
गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, नगांव, बारपेटा, धुबरी, हैलाकांडी, कछार सहित दर्जनभर जिलों में आयोजन हुए।
जुलूसों में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों और जातियों के लोगों ने भी भागीदारी की।
जिला प्रशासन और पुलिस ने संवेदनशील इलाकों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

असम में 26 जून 2026 को मुहर्रम पूरे धार्मिक श्रद्धा, शोक और अमन के साथ संपन्न हुआ। गुवाहाटी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ समेत राज्य के दर्जनभर से अधिक जिलों में ताजिया जुलूस, मजलिस और विशेष नमाज के आयोजन हुए, जिनमें मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हुए।

मार्गेरिटा में मुख्य आयोजन

तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा कस्बे में मुहर्रम का केंद्रीय आयोजन सेंट्रल मार्गेरिटा ईदगाह मैदान में हुआ, जिसे विशेष रूप से सजाया गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

मुख्य आकर्षण के रूप में भव्य ताजिया जुलूस ईदगाह मैदान से निकलकर राष्ट्रीय राजमार्ग-315 से होते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरा। जुलूस में मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धर्मों, जातियों और भाषाई पृष्ठभूमि के लोग भी सम्मिलित हुए। आयोजकों के अनुसार, इस भागीदारी ने मार्गेरिटा की धार्मिक सहिष्णुता की पुरानी परंपरा को एक बार फिर रेखांकित किया।

राज्यभर में शांतिपूर्ण माहौल

गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, नगांव, बारपेटा, धुबरी, हैलाकांडी, श्रीभूमि, कछार और गोलपाड़ा सहित राज्य के अन्य जिलों में भी मुहर्रम के आयोजन बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुए। जुलूसों में शामिल लोगों ने विश्व शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और समृद्धि के लिए दुआ की।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी

जिला प्रशासन और पुलिस ने संवेदनशील इलाकों तथा जुलूस मार्गों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए। कई शहरों में जुलूसों के सुचारू संचालन के लिए यातायात मार्ग अस्थायी रूप से बदले गए। अधिकारियों के अनुसार, पूरे राज्य में स्थिति नियंत्रण में रही।

मुहर्रम का महत्व

मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इस दिन पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में शोक मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय इस अवसर पर इबादत, मजलिस और ताजिया जुलूस के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है।

सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश

आयोजकों ने कहा कि इस वर्ष के आयोजन ने यह सिद्ध किया कि असम के विभिन्न समुदाय एकता और आपसी सम्मान के साथ सभी त्योहार मिल-जुलकर मनाते हैं। गौरतलब है कि असम एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक राज्य है, जहाँ इस तरह की सामूहिक भागीदारी की परंपरा वर्षों पुरानी है। इस वर्ष भी उस परंपरा का निर्वहन बखूबी हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिर्फ शांति की खबर को 'सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल' के रूप में प्रस्तुत करना एक निम्न पैमाना है — असली परीक्षा यह है कि यह सौहार्द रोज़मर्रा के सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी दिखे। प्रशासनिक तैयारी की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन दीर्घकालिक सामाजिक एकता केवल पुलिस तैनाती से नहीं, बल्कि समुदायों के बीच संवाद और विश्वास से बनती है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में मुहर्रम 2026 कब और कैसे मनाया गया?
असम में मुहर्रम 26 जून 2026 को शांतिपूर्वक मनाया गया। राज्य के दर्जनभर से अधिक जिलों में ताजिया जुलूस, मजलिस और विशेष नमाज के आयोजन हुए, जिनमें विभिन्न धर्मों के लोग सम्मिलित हुए।
मार्गेरिटा में मुहर्रम का मुख्य आयोजन कहाँ हुआ?
तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा कस्बे में मुख्य आयोजन सेंट्रल मार्गेरिटा ईदगाह मैदान में हुआ। यहाँ से निकला ताजिया जुलूस राष्ट्रीय राजमार्ग-315 से होते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरा।
मुहर्रम क्यों मनाया जाता है?
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। इस दिन पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में शोक और इबादत की जाती है। मुस्लिम समुदाय ताजिया जुलूस, मजलिस और विशेष नमाज के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है।
असम के किन जिलों में मुहर्रम के आयोजन हुए?
गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, नगांव, बारपेटा, धुबरी, हैलाकांडी, श्रीभूमि, कछार, गोलपाड़ा और तिनसुकिया सहित राज्य के कई अन्य जिलों में मुहर्रम के आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुए।
आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
जिला प्रशासन और पुलिस ने संवेदनशील इलाकों और जुलूस मार्गों पर पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए। कई शहरों में यातायात मार्ग अस्थायी रूप से बदले गए और पूरे राज्य में स्थिति नियंत्रण में रही।
राष्ट्र प्रेस
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