असम में मुहर्रम शांतिपूर्वक संपन्न, मार्गेरिटा से गुवाहाटी तक दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
असम में 26 जून 2026 को मुहर्रम पूरे धार्मिक श्रद्धा, शोक और अमन के साथ संपन्न हुआ। गुवाहाटी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ समेत राज्य के दर्जनभर से अधिक जिलों में ताजिया जुलूस, मजलिस और विशेष नमाज के आयोजन हुए, जिनमें मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हुए।
मार्गेरिटा में मुख्य आयोजन
तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा कस्बे में मुहर्रम का केंद्रीय आयोजन सेंट्रल मार्गेरिटा ईदगाह मैदान में हुआ, जिसे विशेष रूप से सजाया गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
मुख्य आकर्षण के रूप में भव्य ताजिया जुलूस ईदगाह मैदान से निकलकर राष्ट्रीय राजमार्ग-315 से होते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरा। जुलूस में मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धर्मों, जातियों और भाषाई पृष्ठभूमि के लोग भी सम्मिलित हुए। आयोजकों के अनुसार, इस भागीदारी ने मार्गेरिटा की धार्मिक सहिष्णुता की पुरानी परंपरा को एक बार फिर रेखांकित किया।
राज्यभर में शांतिपूर्ण माहौल
गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, नगांव, बारपेटा, धुबरी, हैलाकांडी, श्रीभूमि, कछार और गोलपाड़ा सहित राज्य के अन्य जिलों में भी मुहर्रम के आयोजन बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुए। जुलूसों में शामिल लोगों ने विश्व शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और समृद्धि के लिए दुआ की।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी
जिला प्रशासन और पुलिस ने संवेदनशील इलाकों तथा जुलूस मार्गों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए। कई शहरों में जुलूसों के सुचारू संचालन के लिए यातायात मार्ग अस्थायी रूप से बदले गए। अधिकारियों के अनुसार, पूरे राज्य में स्थिति नियंत्रण में रही।
मुहर्रम का महत्व
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इस दिन पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में शोक मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय इस अवसर पर इबादत, मजलिस और ताजिया जुलूस के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है।
सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश
आयोजकों ने कहा कि इस वर्ष के आयोजन ने यह सिद्ध किया कि असम के विभिन्न समुदाय एकता और आपसी सम्मान के साथ सभी त्योहार मिल-जुलकर मनाते हैं। गौरतलब है कि असम एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक राज्य है, जहाँ इस तरह की सामूहिक भागीदारी की परंपरा वर्षों पुरानी है। इस वर्ष भी उस परंपरा का निर्वहन बखूबी हुआ।