9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम में 5,800 से अधिक हाथी, देश में दूसरा स्थान: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम में 5,800 से अधिक हाथी, देश में दूसरा स्थान: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा

सारांश

असम के जंगलों में 5,800 से अधिक हाथी — देश में दूसरा सबसे बड़ा हाथी आवास। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे माँ कामाख्या की भूमि से जोड़ते हुए राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नई परिभाषा दी।

मुख्य बातें

असम हाथियों की आबादी के मामले में भारत में दूसरे स्थान पर है।
राज्य के जंगलों में 5,800 से अधिक एशियाई हाथी निवास करते हैं।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 8 अक्टूबर 2026 को एक्स पर यह जानकारी साझा की।
सरमा ने हाथियों की उपस्थिति को कामाख्या मंदिर की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ा।
राज्य सरकार वन गलियारों की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने पर केंद्रित है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि हाथियों की आबादी के मामले में असम पूरे देश में दूसरे स्थान पर है, और राज्य के जंगलों में 5,800 से अधिक हाथी विचरण करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की, जिसमें उन्होंने असम की समृद्ध वन्यजीव विरासत और राष्ट्रीय हाथी संरक्षण में राज्य की अहम भूमिका को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री का बयान और सांस्कृतिक संदर्भ

मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में असम की आध्यात्मिक पहचान से हाथियों की उपस्थिति को जोड़ते हुए कहा, 'जहाँ माँ कामाख्या निवास करती हैं, वहाँ भगवान गजानन का भी मौजूद रहना स्वाभाविक है।' उल्लेखनीय है कि कामाख्या मंदिर असम की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है। इस प्रकार उन्होंने राज्य की प्राकृतिक और धार्मिक विरासत को एकसूत्र में पिरोया।

असम की पारिस्थितिक भूमिका

असम के घने वन और संरक्षित क्षेत्र एशियाई हाथियों के लिए अनिवार्य आवास माने जाते हैं। ये क्षेत्र राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अनेक प्रजातियों को भी आश्रय देते हैं। हाथी बीजों के प्रसार में और वन पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना एवं पुनरुत्पादन प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिससे संपूर्ण इकोलॉजिकल संतुलन बना रहता है।

मानव-हाथी संघर्ष: एक सतत चुनौती

बड़ी हाथी आबादी के साथ-साथ असम के कुछ क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। इंसानी बस्तियों के निकट हाथियों की आवाजाही के कारण समय-समय पर जान-माल का नुकसान और फसलों व संपत्ति की क्षति होती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों का केंद्र बिंदु हाथियों के आवास की सुरक्षा, वन गलियारों (कॉरिडोर) का रखरखाव और समुदायों तथा वन्यजीवों के बीच टकराव को न्यूनतम करना रहा है।

विरासत को पहचान से जोड़ने की रणनीति

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सरमा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम सरकार लगातार राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को अपनी नीतिगत पहचान के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रस्तुत कर रही है। 5,800 से अधिक हाथियों की उपस्थिति के साथ असम देश के प्रमुख हाथी आवास क्षेत्रों में अपनी स्थिति मज़बूत बनाए हुए है और भारत के समग्र वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार के संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता इस समृद्ध जैव-विविधता को बनाए रखने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

800 हाथियों का आँकड़ा प्रभावशाली है, मुख्यधारा की कवरेज प्रायः यह नहीं पूछती कि मानव-हाथी संघर्ष में कितनी जानें गई हैं और राज्य के संरक्षण बजट का वास्तविक उपयोग कहाँ हुआ। वन गलियारों के सिकुड़ने की समस्या — जो देशभर में हाथी मौतों का प्रमुख कारण है — पर ठोस नीतिगत जवाबदेही अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाथियों की आबादी में असम का भारत में कौन-सा स्थान है?
हाथियों की संख्या के मामले में असम भारत में दूसरे स्थान पर है। राज्य के जंगलों में 5,800 से अधिक एशियाई हाथी निवास करते हैं, जो इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण हाथी आवासों में से एक बनाता है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाथियों को कामाख्या मंदिर से क्यों जोड़ा?
सरमा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 'जहाँ माँ कामाख्या निवास करती हैं, वहाँ भगवान गजानन का भी मौजूद रहना स्वाभाविक है।' इस प्रकार उन्होंने असम की आध्यात्मिक पहचान और प्राकृतिक विरासत को एकसूत्र में पिरोया।
असम में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति क्या है?
असम के कुछ क्षेत्रों में इंसानी बस्तियों के नज़दीक हाथियों की आवाजाही से जान-माल के नुकसान और फसल-संपत्ति की क्षति की घटनाएँ होती रही हैं। राज्य सरकार का ध्यान वन गलियारों की सुरक्षा और संघर्ष को न्यूनतम करने पर केंद्रित है।
असम के हाथी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
हाथी बीजों के प्रसार में मदद करते हैं और वन पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना एवं पुनरुत्पादन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, जिससे इकोलॉजिकल संतुलन बना रहता है। असम के संरक्षित क्षेत्र कई दुर्लभ प्रजातियों को भी आश्रय देते हैं।
असम में हाथी संरक्षण के प्रमुख प्रयास क्या हैं?
राज्य सरकार हाथियों के आवास की सुरक्षा, वन गलियारों (कॉरिडोर) के रखरखाव और समुदायों तथा वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ये प्रयास राष्ट्रीय और वैश्विक वन्यजीव संरक्षण लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले