शिवसागर बाढ़: 16 दिनों से तख्तों पर जीवन, AGP और महिला संगठन ने बांटी राहत सामग्री
सारांश
मुख्य बातें
असम के शिवसागर में 4 अगस्त 2026 को बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है — सैकड़ों परिवारों के घरों में पानी भरा है और निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हैं। असम भासिक सांख्यालघु परिषद के तत्वावधान में शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण अभियान चलाया गया।
मुख्य घटनाक्रम
असम गण परिषद (AGP) के कई नेताओं ने इस राहत अभियान में सक्रिय भागीदारी की। शिवसागर जिला AGP अध्यक्ष घाना गोगोई सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारियों ने बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच आवश्यक सामग्री पहुँचाई। संगठन ने इसे अपनी मानवीय पहल का हिस्सा बताया।
बुजुर्ग दंपत्ति की मार्मिक कहानी
शिवसागर के भदहरा गाँव में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी दृष्टि-श्रवण बाधित पत्नी की स्थिति विशेष रूप से दयनीय है। डोरिका नदी के उफान ने उनके घर का एक हिस्सा बहा दिया है। पिछले 16 दिनों से यह दंपत्ति ईंटों पर रखे लकड़ी के तख्तों से बने कामचलाऊ मंच पर गुज़ारा कर रहे हैं — उनकी टूटी झोपड़ी में रहने लायक जगह बमुश्किल बची है।
महिला संगठन 'अपरूपा' की पहल
बाढ़ राहत में उतरे महिला समूह 'अपरूपा' की प्रतिनिधि लूना लीला ने बताया, '76 महिला समूहों से चंदा इकट्ठा किया गया और 22-23 महिलाएँ राहत पहुँचाने के लिए एकजुट हुईं। हम बाढ़ के पानी के बीच खड़े हैं — यह हालात खुद बोलते हैं। एक-दूसरे की मदद करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।'
सरकार की प्रतिक्रिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में बाढ़ राहत कार्य अब अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा, 'राहत वितरण के साथ-साथ हम व्यवस्थित तरीके से क्षतिग्रस्त सार्वजनिक अवसंरचना का पुनर्निर्माण करेंगे और हर प्रभावित परिवार को पुनर्वास के रास्ते पर सहयोग देंगे।'
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊपरी असम में सामान्य से 400 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे उन जिलों में अचानक बाढ़ आई जहाँ आमतौर पर ऐसी स्थिति नहीं होती। उन्होंने चराईदेव जिले का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया और कहा, 'असम सरकार और भारत सरकार मिलकर प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करेंगी।' उन्होंने यह भी बताया कि उनके तीन सहयोगी आपदा की शुरुआत से ही प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब ऊपरी असम के कई जिले असाधारण मानसूनी वर्षा की चपेट में हैं। गौरतलब है कि असम हर वर्ष बाढ़ से जूझता है, लेकिन इस बार की तीव्रता और भौगोलिक विस्तार असामान्य बताया जा रहा है। पुनर्निर्माण और पुनर्वास की दिशा में राज्य सरकार और केंद्र के समन्वित प्रयास आने वाले हफ्तों में निर्णायक होंगे।