6 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम चाय के 200 साल: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम चाय के 200 साल: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया

सारांश

असम में चाय के 200 साल पूरे होने के मौके पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया — एक ऐसे व्यक्ति का सम्मान, जो भारत के पहले चाय उद्यमियों में से एक थे और 1858 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 5 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया।
यह आयोजन असम में चाय उद्योग की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हुआ।
मनीराम दीवान भारत के शुरुआती प्रमुख चाय बागान मालिकों में से एक और असम के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे।
1857 के विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें 1858 में फाँसी दी थी।
सरमा ने एक्स पर लिखा कि असम 'विकास और विरासत दोनों का सम्मान करता है।'

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 5 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में प्रथम भारतीय चाय बागान मालिकों में से एक और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया। यह आयोजन असम में चाय उद्योग की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में संपन्न हुआ। सरमा ने इस अवसर पर दीवान को राज्य के इतिहास और चाय उद्योग दोनों के लिए अमूल्य बताया।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री सरमा ने गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने लिखा कि जब असम 'असम चाय' के 200 साल का जश्न मना रहा है, तो पहले भारतीय चाय बागान मालिक और स्वतंत्रता सेनानी मनीराम दीवान का सम्मान करना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा दीवान की स्थायी विरासत के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि असम में विकास और विरासत दोनों को एक साथ सम्मान दिया जाता है।

मनीराम दीवान: चाय और स्वाधीनता दोनों के अग्रदूत

मनीराम दीवान असम में चाय की खेती के शुरुआती विकास से गहराई से जुड़े थे। उन्होंने प्रारंभ में ब्रिटिश प्रशासन के साथ काम किया और उभरते चाय उद्योग को समझने के बाद अपने स्वयं के चाय बागान स्थापित किए। वे उस दौर में चाय उद्योग में कदम रखने वाले शुरुआती प्रमुख भारतीय उद्यमियों में गिने जाते हैं, जब यह उद्योग लगभग पूरी तरह ब्रिटिश हितों के नियंत्रण में था।

बाद में दीवान ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ प्रतिरोध में एक प्रमुख आवाज़ बन गए। 1857 के विद्रोह के दौरान उन्होंने असम में अहोम राजशाही को बहाल करने के प्रयासों का समर्थन किया और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार किया और 1858 में उन्हें फाँसी दे दी गई, जिससे वे औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध असम के प्रतिरोध का एक अमिट प्रतीक बन गए।

असम चाय उद्योग की 200 साल की यात्रा

असम का आधुनिक चाय उद्योग 19वीं सदी में उस समय आकार लेने लगा जब इस क्षेत्र में चाय के देशज पौधे खोजे गए। इसके बाद ब्रिटिश प्रशासन ने व्यावसायिक चाय बागानों का विकास किया और असम विश्व के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में उभरा।

समय के साथ असम की चाय ने अपने विशिष्ट स्वाद, सशक्त गुण और अनूठी सुगंध के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान अर्जित की। यह उद्योग आज भी राज्य की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार है और लाखों लोगों के लिए रोज़गार का स्रोत है।

आम जनता और श्रमिकों पर असर

200 वर्षों की इस ऐतिहासिक वर्षगांठ के अवसर पर चाय मजदूरों, उत्पादकों, उद्यमियों और उन समुदायों के योगदान को नए सिरे से रेखांकित किया जा रहा है, जिन्होंने पीढ़ियों से इस उद्योग को जीवित रखा है। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया है।

क्या होगा आगे

असम में चाय उद्योग की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला इस बात की ओर इशारा करती है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र की विरासत और भविष्य दोनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण इस श्रृंखला की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है, जो आने वाली पीढ़ियों को असम की उद्यमशीलता और स्वाधीनता की गाथा से परिचित कराएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह आयोजन प्रतीकात्मकता से आगे नहीं जाएगा। दीवान की विरासत — उद्यमिता और प्रतिरोध दोनों — एक ऐसी याद दिलाती है कि असम की चाय की असली कहानी महलों में नहीं, बागानों की मिट्टी में लिखी गई है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीराम दीवान कौन थे और असम के लिए उनका महत्त्व क्यों है?
मनीराम दीवान भारत के पहले प्रमुख चाय बागान मालिकों में से एक थे और असम के एक ऐतिहासिक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान असम में अहोम राजशाही बहाली का समर्थन किया और 1858 में ब्रिटिश शासन द्वारा फाँसी दिए जाने के बाद औपनिवेशिक प्रतिरोध के प्रतीक बन गए।
असम में चाय के 200 साल का जश्न क्यों मनाया जा रहा है?
असम में वाणिज्यिक चाय उद्योग की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी जब इस क्षेत्र में चाय के देशज पौधे खोजे गए और ब्रिटिश प्रशासन ने बागान विकसित किए। 2026 में उस यात्रा के 200 वर्ष पूरे होने पर राज्य इस उद्योग की विरासत और योगदान को रेखांकित कर रहा है।
गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में प्रतिमा का अनावरण किसने किया?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 5 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया। यह आयोजन असम चाय की 200वीं वर्षगांठ समारोह के तहत आयोजित था।
मनीराम दीवान का चाय उद्योग से क्या संबंध था?
मनीराम दीवान ने शुरुआत में ब्रिटिश प्रशासन के साथ काम करते हुए चाय उद्योग को समझा और बाद में अपने स्वयं के चाय बागान स्थापित किए। वे उस दौर में इस क्षेत्र में उतरने वाले शुरुआती भारतीय उद्यमियों में से थे जब यह उद्योग पूरी तरह ब्रिटिश नियंत्रण में था।
असम का चाय उद्योग आज किस स्थिति में है?
असम का चाय उद्योग आज भी राज्य की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है और लाखों लोगों के लिए रोज़गार का प्रमुख स्रोत है। अपने विशिष्ट स्वाद और सुगंध के कारण असम की चाय को विश्व भर में विशेष पहचान प्राप्त है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले