असम चाय के 200 साल: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 5 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में प्रथम भारतीय चाय बागान मालिकों में से एक और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया। यह आयोजन असम में चाय उद्योग की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में संपन्न हुआ। सरमा ने इस अवसर पर दीवान को राज्य के इतिहास और चाय उद्योग दोनों के लिए अमूल्य बताया।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार को आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री सरमा ने गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने लिखा कि जब असम 'असम चाय' के 200 साल का जश्न मना रहा है, तो पहले भारतीय चाय बागान मालिक और स्वतंत्रता सेनानी मनीराम दीवान का सम्मान करना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा दीवान की स्थायी विरासत के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि असम में विकास और विरासत दोनों को एक साथ सम्मान दिया जाता है।
मनीराम दीवान: चाय और स्वाधीनता दोनों के अग्रदूत
मनीराम दीवान असम में चाय की खेती के शुरुआती विकास से गहराई से जुड़े थे। उन्होंने प्रारंभ में ब्रिटिश प्रशासन के साथ काम किया और उभरते चाय उद्योग को समझने के बाद अपने स्वयं के चाय बागान स्थापित किए। वे उस दौर में चाय उद्योग में कदम रखने वाले शुरुआती प्रमुख भारतीय उद्यमियों में गिने जाते हैं, जब यह उद्योग लगभग पूरी तरह ब्रिटिश हितों के नियंत्रण में था।
बाद में दीवान ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ प्रतिरोध में एक प्रमुख आवाज़ बन गए। 1857 के विद्रोह के दौरान उन्होंने असम में अहोम राजशाही को बहाल करने के प्रयासों का समर्थन किया और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार किया और 1858 में उन्हें फाँसी दे दी गई, जिससे वे औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध असम के प्रतिरोध का एक अमिट प्रतीक बन गए।
असम चाय उद्योग की 200 साल की यात्रा
असम का आधुनिक चाय उद्योग 19वीं सदी में उस समय आकार लेने लगा जब इस क्षेत्र में चाय के देशज पौधे खोजे गए। इसके बाद ब्रिटिश प्रशासन ने व्यावसायिक चाय बागानों का विकास किया और असम विश्व के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में उभरा।
समय के साथ असम की चाय ने अपने विशिष्ट स्वाद, सशक्त गुण और अनूठी सुगंध के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान अर्जित की। यह उद्योग आज भी राज्य की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार है और लाखों लोगों के लिए रोज़गार का स्रोत है।
आम जनता और श्रमिकों पर असर
200 वर्षों की इस ऐतिहासिक वर्षगांठ के अवसर पर चाय मजदूरों, उत्पादकों, उद्यमियों और उन समुदायों के योगदान को नए सिरे से रेखांकित किया जा रहा है, जिन्होंने पीढ़ियों से इस उद्योग को जीवित रखा है। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया है।
क्या होगा आगे
असम में चाय उद्योग की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला इस बात की ओर इशारा करती है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र की विरासत और भविष्य दोनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण इस श्रृंखला की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है, जो आने वाली पीढ़ियों को असम की उद्यमशीलता और स्वाधीनता की गाथा से परिचित कराएगी।