27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम के चुनावों में आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में जुटे सीएम हेमंत सोरेन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम के चुनावों में आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में जुटे सीएम हेमंत सोरेन

सारांश

असम में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासियों के अधिकारों की आवाज उठाई। उन्होंने विश्वनाथ में आयोजित रैली में उनकी पहचान और सम्मान की बात की। यह राजनीतिक गोलबंदी आदिवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

हेमंत सोरेन ने आदिवासियों के अधिकारों की बात की।
आदिवासियों को एकजुट होने की अपील की गई।
चाय उद्योग में आदिवासियों का योगदान महत्वपूर्ण है।

रांची/विश्वनाथ (असम), 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम में विधानसभा चुनाव की हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो के प्रमुख हेमंत सोरेन आदिवासियों की गोलबंदी के माध्यम से राजनीति का एक नया दृष्टिकोण विकसित करने में लगे हुए हैं। इसी क्रम में, उन्होंने मंगलवार को असम के विश्वनाथ जिले में आयोजित एक भव्य जनसभा में चाय बागानों में काम करने वाले लाखों आदिवासियों की पहचान, सम्मान और उनके अधिकारों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हजारों वर्षों से असम के विकास और चाय उद्योग में योगदान देने वाले आदिवासियों को आज तक उनका उचित हक और आदिवासी का दर्जा नहीं मिलना एक बड़ी विडंबना है। इस रैली का आयोजन जय भारत पार्टी, आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम और अन्य संगठनों द्वारा किया गया था, जहां सीएम सोरेन ने कहा कि असम के गरीब, किसान, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग लंबे समय से शोषण और अत्याचार का शिकार हो रहे हैं।

इससे पहले, 1 फरवरी को भी हेमंत सोरेन ने असम के तिनसुकिया जिले में आदिवासियों की एक बड़ी रैली को संबोधित किया था। मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित इस सभा में भारी संख्या में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "आप इस देश के चाय व्यापार की रीढ़ हैं, लेकिन इसके बदले में आपको क्या मेहनताना मिलता है, यह किसी से छिपा नहीं है। हक की इस लड़ाई में प्रदीप नाग जैसे क्रांतिकारी नेताओं ने अपनी जान तक दी है, जिसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा।"

झारखंड अलग राज्य के संघर्ष का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 वर्षों के संघर्ष और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद हमें हमारा हक मिला। उन्होंने स्वर्गीय शक्ति नाथ महतो के उस संकल्प को याद किया जिसमें कहा गया था कि पहली पंक्ति के लोग शहीद होंगे, दूसरी पंक्ति के लोग जेल जाएंगे और तीसरी पंक्ति के लोग राज्य को सजाएंगे।

सीएम सोरेन ने असम के आदिवासियों से अपील की कि यदि वे अपनी स्थिति में परिवर्तन चाहते हैं, तो उन्हें एक छत और एक छांव के नीचे आना होगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश में कुछ शक्तियां सक्रिय हैं जो आदिवासी समुदाय को आर्थिक और बौद्धिक रूप से कमजोर बनाकर उन्हें केवल 'मजदूर' बनाए रखना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, "आदिवासी समाज कभी किसी का बुरा नहीं चाहता, लेकिन अब हम अपना हक लेना जानते हैं। इसके लिए हमें कानूनी लड़ाई भी लड़नी होगी और चट्टान की तरह एकजुट रहना होगा।" झारखंड सरकार द्वारा आदिवासियों को दिए जा रहे अधिकारों का हवाला देते हुए उन्होंने असम में भी बड़े राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता बताई।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता की अपील कर रहे हैं। यह स्थिति राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, और इससे आने वाले चुनावों में प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम हेमंत सोरेन का मुख्य संदेश क्या था?
सीएम हेमंत सोरेन ने आदिवासियों को एकजुट होने और अपने अधिकारों की मांग करने के लिए प्रेरित किया।
यह रैली किसके द्वारा आयोजित की गई थी?
यह रैली जय भारत पार्टी, आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित की गई थी।
हेमंत सोरेन ने किस मुद्दे पर जोर दिया?
उन्होंने चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों की पहचान और उनके अधिकारों का मुद्दा उठाया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले