15 अगस्त: भारत समेत 4 और देश मनाते हैं आज़ादी का जश्न — लिकटेंस्टीन से बहरीन तक की कहानी
सारांश
मुख्य बातें
15 अगस्त को जब भारत में तिरंगा लहराता है और लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन गूंजता है, तब दुनिया के चार अन्य देश भी इसी तारीख को अपनी स्वतंत्रता या राष्ट्रीय पहचान का उत्सव मनाते हैं। 1947 में ब्रिटिश राज से मुक्ति के बाद से यह दिन भारत के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पर्व बन चुका है, लेकिन इतिहास के पन्ने बताते हैं कि 15 अगस्त की वैश्विक विरासत कहीं अधिक व्यापक है।
कोरिया: 'ग्वांगबोकजोल' — प्रकाश की वापसी
15 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की पराजय के साथ ही कोरियाई प्रायद्वीप को 35 वर्षों की जापानी सत्ता से मुक्ति मिली। 1910 से 1945 तक जापान के अधीन रहे कोरिया को जापान के आत्मसमर्पण के बाद स्वाधीनता प्राप्त हुई।
कालांतर में यह भूभाग दो राष्ट्रों — उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया — में विभाजित हो गया। बँटवारे के बावजूद दोनों देश 15 अगस्त को 'ग्वांगबोकजोल' अर्थात 'प्रकाश की वापसी का दिन' के रूप में मनाते हैं। दक्षिण कोरिया में इस दिन सरकारी अवकाश रहता है, परेड निकाली जाती है और राष्ट्रपति राष्ट्र को संबोधित करते हैं। उत्तर कोरिया में इसे मुक्ति दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त है। दोनों के लिए यह तिथि विदेशी आधिपत्य से मुक्ति का सामूहिक प्रतीक है।
कांगो गणराज्य: फ्रांसीसी उपनिवेश से संप्रभुता तक
मध्य अफ्रीका का कांगो गणराज्य 15 अगस्त 1960 को फ्रांस के औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र हुआ। दीर्घकालीन संघर्ष के बाद मिली इस संप्रभुता को देश 'कांगोलेज नेशनल डे' के रूप में मनाता है।
राजधानी ब्राज़ाविले में इस दिन सैन्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राष्ट्रपति का भाषण आयोजित होता है। कांगो के नागरिकों के लिए यह दिन राष्ट्रीय गर्व और आत्मसम्मान का जीवंत प्रतीक है।
बहरीन: ब्रिटिश संरक्षण का अंत
खाड़ी क्षेत्र का देश बहरीन 15 अगस्त 1971 को ब्रिटेन के संरक्षण से मुक्त हुआ। एक द्विपक्षीय समझौते के तहत ब्रिटेन ने बहरीन पर अपना नियंत्रण समाप्त किया और देश को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त हुई।
उल्लेखनीय है कि बहरीन अपना आधिकारिक राष्ट्रीय दिवस 16 दिसंबर को मनाता है, क्योंकि उसी दिन 1971 में देश के प्रथम अमीर शेख ईसा बिन सलमान अल खलीफा ने सत्ता ग्रहण की थी। तथापि, ऐतिहासिक दृष्टि से 15 अगस्त ही वह तिथि है जब बहरीन ब्रिटिश अधिपत्य से वास्तव में मुक्त हुआ।
लिकटेंस्टीन: यूरोप की सबसे पुरानी स्वतंत्रता की कड़ी
यूरोप का लघु राष्ट्र लिकटेंस्टीन 15 अगस्त 1866 को जर्मन परिसंघ से अलग हुआ था। यद्यपि उस समय इसे पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हुई थी, तथापि इसी दिन देश ने संप्रभुता की दिशा में ऐतिहासिक पहला कदम रखा।
1940 में लिकटेंस्टीन ने 15 अगस्त को अपना राष्ट्रीय दिवस घोषित किया। इसके पीछे एक रोचक तथ्य यह भी था कि तत्कालीन राजकुमार फ्रांसिस जोसेफ द्वितीय का जन्मदिन भी 15 अगस्त को पड़ता था। आज इस दिन देश में आतिशबाजी, लोक संगीत, शाही महल के सामने विशेष समारोह और झील किनारे उत्सव आयोजित होते हैं।
भारत की 15 अगस्त: करोड़ों बलिदानों की विरासत
भारत के लिए 15 अगस्त 1947 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य बलिदान की गाथा है। इसी दिन प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से अपना ऐतिहासिक 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' भाषण दिया था।
यह ऐसे समय में स्मरणीय है जब वैश्विक स्तर पर उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्षों का इतिहास नए सिरे से लिखा जा रहा है। 15 अगस्त की यह साझी विरासत दुनिया को याद दिलाती है कि स्वतंत्रता का मूल्य हर देश में संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प से चुकाया गया है — चाहे वह भारत हो, कोरिया हो, कांगो हो या लिकटेंस्टीन।