11 अगस्त 2026
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एसआईआर से अवैध मतदाताओं की होगी पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी: भाजपा सांसद रेखा शर्मा

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एसआईआर से अवैध मतदाताओं की होगी पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी: भाजपा सांसद रेखा शर्मा

सारांश

भाजपा सांसद रेखा शर्मा का कहना है कि 2002 के बाद से मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण न होने से अपात्र नाम जुड़े — खासकर पश्चिम बंगाल में। उनके अनुसार एसआईआर न केवल चुनावी शुचिता, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।

मुख्य बातें

भाजपा राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने 17 जून 2026 को यमुनानगर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया।
उनके अनुसार वर्ष 2002 के बाद से मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण नहीं हुआ, जिससे बड़ी संख्या में अपात्र नाम सूची में जुड़ गए।
सांसद ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए लोगों को फर्जी दस्तावेज देकर मतदाता सूची में शामिल किया गया।
BLA और BLO के सहयोग से व्यापक सत्यापन अभियान जारी है; वैध नागरिकों का नाम सूची में बना रहेगा।
फर्जी आधार कार्ड और पहचान पत्रों से सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया।
नीट-यूजी परीक्षा सामग्री के प्रसार में टेलीग्राम के कथित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने 17 जून 2026 को यमुनानगर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अपरिहार्य बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2002 के बाद से मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण न होने के कारण बड़ी संख्या में अपात्र नाम सूची में जुड़ गए, जिसका राजनीतिक लाभ कुछ दलों को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ी सामग्री के प्रसार में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग की बातें सामने आई हैं।

एसआईआर क्यों ज़रूरी है

रेखा शर्मा के अनुसार, 2002 के बाद से देश में जनसंख्या संरचना में व्यापक बदलाव आया — कई नागरिकों का निधन हुआ, लाखों लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए और नए मतदाता जुड़े, लेकिन मतदाता सूचियों का उसी अनुपात में सत्यापन नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अब बूथ लेवल एजेंट (BLA) और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के सहयोग से व्यापक स्तर पर जाँच और सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए अनिवार्य है।

पश्चिम बंगाल पर गंभीर आरोप

सांसद ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में वर्षों से बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए, जिससे राज्य की राजनीति प्रभावित हुई। उनके अनुसार, बांग्लादेश से आए लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराकर मतदाता सूची में जोड़ा गया और इसका राजनीतिक लाभ सत्तारूढ़ दल को मिला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती हैं। यह उल्लेखनीय है कि ये आरोप BJP के नेताओं की ओर से पहले भी लगाए जाते रहे हैं और TMC इन्हें राजनीति से प्रेरित बताती है।

वैध मतदाताओं को चिंता नहीं: रेखा शर्मा

रेखा शर्मा ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से केवल उन्हीं लोगों को चिंता होनी चाहिए जिनके दस्तावेज या मतदाता पहचान अवैध तरीके से बनाई गई है। उन्होंने कहा कि वैध भारतीय नागरिकों का नाम सूची में बना रहेगा और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मतदाता और उनके परिवार से संबंधित आवश्यक जानकारी ली जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य स्थान पर रह रहा है, तब भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका सत्यापन किया जा सकता है।

फर्जी दस्तावेज और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग

सांसद ने आरोप लगाया कि अवैध रूप से भारत में रह रहे कुछ लोग फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक संसाधनों का लाभ केवल पात्र भारतीय नागरिकों तक पहुँचे। राष्ट्रीय सुरक्षा और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए अवैध निवासियों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई को उन्होंने आवश्यक बताया।

नीट-यूजी और टेलीग्राम का कथित दुरुपयोग

नीट-यूजी परीक्षा विवाद पर बोलते हुए रेखा शर्मा ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी सामग्री और प्रश्नों की जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से प्रसारित किए जाने की बातें कथित तौर पर सामने आई थीं। उन्होंने दावा किया कि टेलीग्राम की तकनीकी संरचना के कारण उस पर साझा की जाने वाली जानकारी को ट्रैक करना अपेक्षाकृत कठिन होता है, जिसके चलते कुछ लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जाँच एजेंसियाँ पहले से सक्रिय हैं और यह मुद्दा संसद में भी उठाया जा चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें तथ्य और आरोप के बीच की रेखा पतली है — पश्चिम बंगाल में अवैध मतदाताओं की संख्या का कोई स्वतंत्र सत्यापित आँकड़ा उन्होंने नहीं दिया। एसआईआर की प्रक्रिया चुनाव आयोग की है, लेकिन इसे BJP के राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर पेश किया जाना विपक्ष की आशंकाओं को और गहरा करता है। टेलीग्राम और नीट-यूजी का संदर्भ जोड़ना दो अलग मुद्दों को एक ही बयान में समेटने की कोशिश है, जो फोकस को कमज़ोर करती है। असली सवाल यह है कि क्या सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शी अपील तंत्र है ताकि वैध नागरिक, विशेषकर प्रवासी मज़दूर और ग्रामीण महिलाएँ, अनजाने में सूची से न हटाई जाएँ।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा संचालित एक व्यापक सत्यापन प्रक्रिया है जिसमें BLO और BLA घर-घर जाकर मतदाताओं की पात्रता की जाँच करते हैं। इसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और अपात्र नामों को सूची से हटाकर वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है।
भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने पश्चिम बंगाल पर क्या आरोप लगाए?
रेखा शर्मा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए लोगों को फर्जी दस्तावेज देकर मतदाता सूची में शामिल किया गया और इसका राजनीतिक लाभ सत्तारूढ़ दल को मिला। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की पहचान कर अब कार्रवाई की जा रही है।
क्या एसआईआर से वैध मतदाताओं का नाम सूची से हट सकता है?
रेखा शर्मा के अनुसार वैध और पात्र भारतीय नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता नहीं होनी चाहिए, उनका नाम सूची में बना रहेगा। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य स्थान पर रह रहा है, तब भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका सत्यापन किया जा सकता है।
नीट-यूजी विवाद में टेलीग्राम की क्या भूमिका बताई गई?
रेखा शर्मा ने दावा किया कि नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ी सामग्री और प्रश्न कथित तौर पर टेलीग्राम के माध्यम से प्रसारित किए गए। उनके अनुसार टेलीग्राम की तकनीकी संरचना के कारण उस पर साझा जानकारी को ट्रैक करना कठिन होता है।
अवैध निवासियों द्वारा सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर क्या कहा गया?
सांसद ने आरोप लगाया कि कुछ अवैध निवासी फर्जी आधार कार्ड और पहचान पत्रों के ज़रिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक संसाधनों का लाभ केवल पात्र भारतीय नागरिकों तक सीमित रखना है।
राष्ट्र प्रेस
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