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आयतुल्लाह खामेनेई को अंतिम विदाई: तेहरान में भारत समेत दर्जनों देशों के प्रतिनिधि, 9 जुलाई को मशहद में होगा दफन

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आयतुल्लाह खामेनेई को अंतिम विदाई: तेहरान में भारत समेत दर्जनों देशों के प्रतिनिधि, 9 जुलाई को मशहद में होगा दफन

सारांश

आयतुल्लाह खामेनेई की अंतिम विदाई महज एक राजकीय अंत्येष्टि नहीं — यह ईरान के वैश्विक प्रभाव का एक अंतिम प्रदर्शन है। भारत से लेकर बोलीविया तक के प्रतिनिधियों की उपस्थिति बताती है कि खामेनेई का नेटवर्क कितना व्यापक था। 9 जुलाई को मशहद में दफन के साथ एक युग का अंत होगा।

मुख्य बातें

आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए 3 जुलाई 2026 को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।
भारतीय धार्मिक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा; रूस, चीन, तुर्किये, इराक, बांग्लादेश सहित दर्जनों देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
अफगान नेता अहमद शाह मसूद के पुत्र अहमद मसूद भी श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा शनिवार और रविवार को भी जारी रहेगी; सोमवार को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
अंतिम संस्कार की रस्में कोम, बगदाद, कर्बला और नजफ में होंगी; 9 जुलाई को मशहद में दफन।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने देशवासियों से 'पूरे उत्साह और गरिमा' के साथ समारोहों में शामिल होने की अपील की।

ईरान के इस्लामी क्रांति के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए 3 जुलाई 2026 को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय धार्मिक नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ, साथ ही रूस, चीन, तुर्किये, इराक और बांग्लादेश सहित कई देशों के गणमान्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

श्रद्धांजलि सभा में कौन-कौन शामिल हुए

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धांजलि सभा में भारत, रूस, चीन, तुर्किये, इराक, बोस्निया और हर्जेगोविना, हंगरी तथा बांग्लादेश के धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया। इनके अतिरिक्त इंडोनेशिया और अफगानिस्तान के इस्लामी विद्वान एवं धार्मिक बुद्धिजीवी भी समारोह में उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय रूप से, अफगान नेता अहमद शाह मसूद के पुत्र अहमद मसूद भी इस अवसर पर मौजूद थे। लेबनान के अमल मूवमेंट का एक प्रतिनिधिमंडल तथा सीरिया, लेबनान, इराक और मोरक्को के रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रतिनिधियों ने भी दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इराक के काताइब हिज्बुल्लाह के कुछ मुजाहिदीन भी इस सभा में शामिल रहे।

स्पेन, इक्वाडोर और बोलीविया के सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी इमाम खुमैनी मोसल्ला पहुंचे और उन्होंने खामेनेई को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी

भारत में ईरान के इस्लामी गणराज्य के दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 'भारतीय धार्मिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के इस्लामी गणराज्य के शहीद नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी।' यह भागीदारी भारत और ईरान के बीच धार्मिक और कूटनीतिक संबंधों की निरंतरता को रेखांकित करती है।

अंतिम संस्कार का कार्यक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धांजलि सभा शनिवार और रविवार को भी जारी रहेगी, जिस दौरान पार्थिव शरीर को ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद सोमवार को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। आगे की अंतिम रस्में पवित्र शहर कोम में संपन्न होंगी।

इराक के बगदाद, कर्बला और नजफ में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंततः 9 जुलाई 2026 को मशहद में आयतुल्लाह खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

ईरानी राष्ट्रपति की अपील

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने देशवासियों से अंतिम संस्कार समारोहों में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'जब वीर ईरान इस्लाम और क्रांति के सच्चे सेवक को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा है, तो मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे पूरे उत्साह, गरिमा और बड़ी संख्या में इन समारोहों में शामिल हों। इससे राष्ट्रीय एकता और इस्लामी व्यवस्था के उच्च आदर्शों के प्रति लोगों की निष्ठा की एक यादगार तस्वीर दुनिया के सामने आएगी।'

यह ऐसे समय में आया है जब ईरान वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक और क्षेत्रीय दबावों का सामना कर रहा है, और खामेनेई के निधन के बाद देश में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें टिकी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

रूस, चीन और लेबनान के अमल मूवमेंट जैसे विविध प्रतिनिधियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि ईरान ने दशकों में एक बहुस्तरीय वैश्विक नेटवर्क खड़ा किया था। गौरतलब है कि यह वही नेटवर्क है जिसे पश्चिमी देश 'प्रतिरोध की धुरी' कहते हैं। खामेनेई के उत्तराधिकार का सवाल अभी अनुत्तरित है, और इस शून्य को भरने की होड़ ईरान की आंतरिक राजनीति को नई दिशा देगी। भारत की भागीदारी संतुलित कूटनीति की परंपरा के अनुरूप है, लेकिन काताइब हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक ही मंच पर उपस्थिति, भले ही अनायास हो, कूटनीतिक संवेदनशीलता की मांग करती है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयतुल्लाह खामेनेई का अंतिम संस्कार कहां और कब होगा?
रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान में श्रद्धांजलि सभाओं के बाद सोमवार को अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद कोम, बगदाद, कर्बला और नजफ में कार्यक्रम होंगे और अंततः 9 जुलाई 2026 को मशहद में दफन किया जाएगा।
खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में भारत की ओर से कौन शामिल हुआ?
भारत में ईरानी दूतावास के अनुसार, भारतीय धार्मिक नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुआ। यह प्रतिनिधिमंडल किन विशिष्ट नेताओं से बना था, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में और कौन-कौन से देश शामिल हुए?
रिपोर्टों के अनुसार, रूस, चीन, तुर्किये, इराक, बोस्निया और हर्जेगोविना, हंगरी, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और अफगानिस्तान के धार्मिक नेता व विद्वान उपस्थित रहे। स्पेन, इक्वाडोर और बोलीविया के सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी मोसल्ला पहुंचे।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने क्या अपील की?
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने देश के सभी नागरिकों से अपील की कि वे 'पूरे उत्साह, गरिमा और बड़ी संख्या में' अंतिम संस्कार समारोहों में शामिल हों। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय एकता और इस्लामी व्यवस्था के प्रति लोगों की निष्ठा दुनिया के सामने प्रदर्शित होगी।
अहमद मसूद खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में क्यों शामिल हुए?
अफगान नेता अहमद शाह मसूद के पुत्र अहमद मसूद श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहे। रिपोर्टों के अनुसार, इंडोनेशिया और अफगानिस्तान के इस्लामी विद्वानों के साथ वे भी इस समारोह का हिस्सा बने, हालांकि उनकी उपस्थिति के राजनीतिक निहितार्थ पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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