अयोध्या मां भगवती मंदिर पर ध्वजारोहण: साध्वी ऋतंभरा का आह्वान — 'भारत की बेटियों को दुर्गा बनाना होगा'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर स्थित मां भगवती मंदिर के शिखर पर शुक्रवार, 29 मई को ध्वजारोहण का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें साध्वी ऋतंभरा ने मातृशक्ति का आह्वान करते हुए सांस्कृतिक संरक्षण, गौसंरक्षण और सामाजिक जागरण के विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में दुर्गा वाहिनी और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी करीब 4,000 मातृशक्ति की सहभागिता रही।
मुख्य संबोधन: दुर्गा बनो, संस्कृति बचाओ
साध्वी ऋतंभरा ने अपने ओजपूर्ण संबोधन में कहा कि भारत की बेटियों को अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं की रक्षा के लिए 'दुर्गा' का रूप धारण करना होगा। उन्होंने कहा, 'आज की पीढ़ी को भारत की नारी होने का अर्थ समझाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।' उनके अनुसार परिवार और समाज में संस्कारों की रक्षा की जिम्मेदारी मातृशक्ति के कंधों पर है और संतानों को माथे के सिंदूर की कीमत से परिचित कराया जाना चाहिए।
साध्वी ने स्वतंत्रता और उच्छृंखलता के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की मर्यादाओं को बनाए रखना आज के समय की माँग है। उन्होंने महिलाओं से कौशल्या, देवकी, अंजनी और सुनैना जैसी आदर्श माताओं के चरित्र को अपने जीवन में उतारने का आग्रह किया।
लव जिहाद और गौसंरक्षण पर चिंता
साध्वी ऋतंभरा ने लव जिहाद के मुद्दे पर संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा, 'हमें संकल्प लेना होगा कि हमारी बच्चियाँ लव जिहाद का शिकार नहीं बनेंगी। इसके लिए हर बेटी को दुर्गा बनाने की आवश्यकता है।' गौसंरक्षण के विषय पर उन्होंने कहा कि जब तक गौमाता के रक्त की एक-एक बूंद धरती को व्याकुल कर रही है, तब तक समाज को चैन से नहीं बैठना चाहिए।
राम जन्मभूमि आंदोलन का स्मरण
साध्वी ऋतंभरा ने राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों के संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद रामलला की पुनः प्रतिष्ठा संभव हुई है। उन्होंने कहा, 'हमारे पूर्वजों ने 500 वर्षों तक संघर्ष किया, माताओं ने अपने पुत्रों का बलिदान दिया और आज उसी समर्पण की ध्वजा मां भगवती मंदिर पर लहरा रही है।' कार्यक्रम में उन्होंने कविता और ओजपूर्ण पंक्तियों के माध्यम से भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया — 'देश से है प्यार तो हर पल ये कहना चाहिए, मैं रहूँ या ना रहूँ भारत ये रहना चाहिए।'
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की मीनाक्षी ताई, महामंडलेश्वर साध्वी मैत्री जी, केंद्रीय पिछड़ा आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति और साध्वी परिषद की महामंत्री साध्वी प्रज्ञा भारती भी उपस्थित रहीं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि कार्यक्रम में दुर्गा वाहिनी और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी हजारों महिलाएँ शामिल हुईं और कुल सहभागिता करीब 4,000 रही।
आगे की दिशा
मां भगवती मंदिर पर ध्वजारोहण के साथ यह कार्यक्रम अयोध्या में सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। साध्वी ऋतंभरा के संबोधन ने महिला सशक्तिकरण को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए एक नई बहस को जन्म दिया है, जो आने वाले दिनों में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।