अयोध्या के संतों का कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पर प्रहार: 'राम मंदिर निर्माण में कितना दान दिया?'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में 30 जून 2026 को उस समय तीखा विवाद खड़ा हो गया जब राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने की खबरें सामने आईं। इस घटना पर अयोध्या के प्रमुख संतों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। जगद्गुरु करपात्री जी महाराज, महामंडलेश्वर विष्णु दास, संत शेष मणि शरण और साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने एकस्वर में कांग्रेस की आलोचना की।
संतों की तीखी प्रतिक्रिया
जगद्गुरु करपात्री जी महाराज ने कहा कि जिस पार्टी ने श्रीराम को 'काल्पनिक' बताया और रामसेतु के अस्तित्व को नकारा, वह अब दर्शन करने क्यों आई है। उन्होंने पूछा कि चढ़ावा चोरी का प्रकरण उजागर होने के बाद इस दौरे का क्या औचित्य है और कांग्रेस ने राम मंदिर निर्माण में अब तक कितना दान दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी चाहते तो श्रीराम मंदिर का निर्माण बहुत पहले हो गया होता। उनके अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल अयोध्या में राजनीति करने आया है और कांग्रेस पार्टी इसके लिए दंड की अधिकारी है।
महंत सीताराम दास का 'कालनेमि' वाला बयान
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की तुलना पौराणिक पात्र 'कालनेमि' से करते हुए कहा कि इनकी भावनाएँ दूषित हैं और ये सनातनियों को आहत करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के गठबंधन सहयोगियों ने सनातन धर्म को 'डेंगू बीमारी' तक कह दिया है।
महंत ने यह भी कहा कि जो सच्चे भाव से दर्शन करना चाहते हैं उन्हें रोका नहीं जाएगा, लेकिन 'कालनेमि भेष' में आने वालों को दर्शन नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता अजय राय ने हाल ही में दर्शन किए थे, फिर महज 15 दिन में दोबारा आने की ज़रूरत क्यों पड़ी। उनके अनुसार यदि कांग्रेस वास्तव में धर्म के प्रति सजग है तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल के लिए भी आंदोलन छेड़े।
महामंडलेश्वर विष्णु दास का आरोप
सीता राम योग सदन के महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि जो पार्टी श्रीराम के अस्तित्व को 'काल्पनिक' बताती रही, वह अब 'बहुरूपिया भेष' में दर्शन के लिए आई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती थी कि यहाँ बाबरी मस्जिद बने, राम मंदिर नहीं। ऐसे लोगों के आने से धाम की बदनामी होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश में खुशहाली है और ऐसे 'कालनेमियों' की अयोध्या में कोई जगह नहीं है।
संत शेष मणि शरण का पक्ष
संत शेष मणि शरण ने स्पष्ट किया कि श्रीराम का दरबार सभी के लिए खुला है, लेकिन कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को इसलिए रोका गया क्योंकि आशंका थी कि वे मंदिर परिसर में धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी करेंगे। उन्होंने कहा कि श्रीराम राजनीति का मंच नहीं हैं और चढ़ावा चोरी के मामले से पहले ये लोग कहाँ थे, यह भी जानना ज़रूरी है।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला पहले से चर्चा में है। संतों की इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलचल और तेज़ होने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और राज्य विधानसभाओं में भी गूँज सकता है।