14 अक्टूबर 2026
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आजम खां पर जौहर यूनिवर्सिटी मामले में नई FIR, ₹416 करोड़ के गबन का आरोप

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आजम खां पर जौहर यूनिवर्सिटी मामले में नई FIR, ₹416 करोड़ के गबन का आरोप

सारांश

जौहर यूनिवर्सिटी निर्माण में ₹416 करोड़ के कथित गबन को लेकर आजम खां पर रामपुर में नई FIR दर्ज हुई है। ED की जांच-सामग्री के आधार पर दर्ज इस मुकदमे में भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएँ शामिल हैं — SP नेता की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

मुख्य बातें

13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खां और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ नई FIR दर्ज।
ED के अनुसार जौहर यूनिवर्सिटी निर्माण लागत ₹494.46 करोड़ और ट्रस्ट का दर्ज पूंजीगत खर्च केवल ₹78.32 करोड़ — अंतर करीब ₹416.14 करोड़ का।
FIR में BNS की धाराएँ 61, 316(5), 318(4) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ 7, 13(1)(d) व 13(2) शामिल।
ED की शिकायत में ₹85.81 करोड़ के सरकारी व ठेकेदार-संबंधित कार्यों का उल्लेख; ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल।
आरोप अभी जांच के विषय हैं; उत्तर प्रदेश पुलिस अब स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर गहरी हो गई हैं। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन और सामग्री के दुरुपयोग के मामले में 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मुकदमा प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की गई जांच-सामग्री के आधार पर दर्ज किया गया है।

मुख्य आरोप और कानूनी धाराएँ

दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 61, 316(5) और 318(4) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ 7, 13(1)(d) और 13(2) लगाई गई हैं। इन धाराओं में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। गौरतलब है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच के विषय हैं और अदालत में साबित नहीं हुए हैं।

₹416 करोड़ के वित्तीय अंतर का दावा

ED के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में इमारतों के निर्माण की अनुमानित लागत करीब ₹494.46 करोड़ आंकी गई है। दूसरी ओर, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच कुल ₹78.32 करोड़ का पूंजीगत व्यय दर्ज है। एजेंसी ने इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब ₹416.14 करोड़ के अंतर का दावा किया है।

सरकारी धन और निर्माण सामग्री के दुरुपयोग का आरोप

ED की शिकायत में करीब ₹55.8 करोड़ के ठेकेदारों से जुड़े निर्माण कार्यों, ₹23.41 करोड़ के सरकारी कार्यों और ₹6.60 करोड़ के विधायक एवं विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से संबंधित कार्यों का उल्लेख है। इन सभी मदों की कुल राशि करीब ₹85.81 करोड़ बताई गई है। एजेंसी ने ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए हैं।

ठेकेदारों के ज़रिये दान दिखाने की आशंका

एजेंसी की आशंका है कि ठेकेदारों के माध्यम से कुछ रकम ट्रस्ट तक पहुँचाई गई और उसे दान के रूप में दर्शाया गया। जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर सरकारी धन तथा निर्माण सामग्री के कथित उपयोग की पड़ताल की गई है।

क्या होगा आगे

इस मामले में आजम खां, ट्रस्ट, संबंधित ठेकेदारों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब आजम खां पहले से कई कानूनी मामलों में उलझे हुए हैं। जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े विभिन्न मामलों में न्यायालयों में सुनवाई जारी है और अब इस नई एफआईआर के बाद कानूनी प्रक्रिया एक नए दौर में प्रवेश करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जेल, और फिर ज़मानत। सवाल यह है कि क्या ₹416 करोड़ के दावे किए गए वित्तीय अंतर के पीछे ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य हैं या यह उस पैटर्न का हिस्सा है जिसे विपक्षी दल राजनीतिक उत्पीड़न कहते रहे हैं। ED की PMLA जांच और पुलिस की स्वतंत्र जांच के बीच समन्वय कितना पारदर्शी होगा, यह देखना महत्त्वपूर्ण है। न्याय की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष हो और अदालत में आरोप साबित किए जाएँ।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजम खां पर जौहर यूनिवर्सिटी मामले में क्या आरोप हैं?
आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन और निर्माण सामग्री का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। ED के अनुसार निर्माण लागत और ट्रस्ट के दर्ज खर्च के बीच करीब ₹416.14 करोड़ का अंतर है। ये आरोप अभी जांच के विषय हैं।
यह FIR कब और कहाँ दर्ज हुई?
यह FIR 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज की गई। ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जांच-सामग्री साझा की, जिसके आधार पर यह मुकदमा दर्ज किया गया।
FIR में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ 7, 13(1)(d) और 13(2) शामिल हैं। इन धाराओं में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधान हैं।
ED ने ट्रस्ट के दान पर क्या सवाल उठाए हैं?
ED को आशंका है कि ठेकेदारों के माध्यम से कुछ रकम ट्रस्ट तक पहुँचाई गई और उसे दान के रूप में दर्शाया गया। एजेंसी ने ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर सवाल उठाए हैं, हालाँकि ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
उत्तर प्रदेश पुलिस अब आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, संबंधित ठेकेदारों और अन्य लोगों की भूमिका की स्वतंत्र जांच करेगी। जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े अन्य मामलों में भी न्यायालयों में सुनवाई जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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