बहरीन में ईरानी हमले से मुहर्रक की रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त, कोई हताहत नहीं; खाड़ी में तनाव चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
बहरीन के गृह मंत्रालय ने 28 जून 2025 को पुष्टि की कि मुहर्रक क्षेत्र में एक रिहायशी इमारत ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त हुई, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मनामा ने ईरान पर आवासीय इलाकों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है, जिससे पश्चिम एशिया में पहले से उबलता तनाव और गहरा हो गया है।
मुहर्रक में क्या हुआ
बहरीन के गृह मंत्रालय के अनुसार, मुहर्रक के एक आवासीय भवन को नुकसान पहुँचा और घटनास्थल पर संबंधित अधिकारी तत्काल पहुँच गए। मंत्रालय ने आम नागरिकों से संयम बनाए रखने की अपील की और बताया कि देश में अलार्म सायरन सक्रिय कर दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
कुवैत की कड़ी निंदा
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरान की इस कार्रवाई को 'बार-बार की गई गंभीर आक्रामकता' बताते हुए कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने कहा, "यह कुवैत की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।" मंत्रालय ने यह भी चेताया कि इस तरह के हमले क्षेत्र में तनाव कम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को कमज़ोर करते हैं और शांति बहाली के प्रयासों को सीधी चुनौती देते हैं।
आईआरजीसी की चेतावनी और सीजफायर विवाद
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान में कहा कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि अमेरिका का सीरिक शहर पर किया गया हमला होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को कमज़ोर नहीं कर सकता।
यह तनाव तब और बढ़ा जब सिंगापुर के एक कार्गो जहाज पर शुक्रवार को आईआरजीसी के हमले के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के तटीय इलाकों पर कार्रवाई का दावा किया। इसके बाद तेहरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू किया।
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर पर ठनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर चेतावनी देते हुए कहा, "अगर ईरान नहीं बचा तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा।" दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने दक्षिणी तटीय इलाकों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों को 'क्रूर' करार देते हुए कहा कि यह तेहरान और वाशिंगटन के बीच हुए मेमोरेंडम (एमओयू) के तहत लागू युद्धविराम का सीधा उल्लंघन है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, "यह साफ है कि अमेरिकी सरकार अपने वादों और प्रतिबद्धताओं की कोई परवाह नहीं करती और समझौतों को तोड़ना उसकी नीति का हिस्सा है।" यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क के धागे पहले से ही बेहद कमज़ोर हैं।
आगे क्या होगा
खाड़ी देशों में बढ़ती अस्थिरता और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव के मद्देनज़र वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र अब इस पर है कि क्या अमेरिका-ईरान के बीच एमओयू के तहत बनी युद्धविराम व्यवस्था पूरी तरह टूट जाती है या कोई नई कूटनीतिक पहल शुरू होती है।