चगाई परमाणु परीक्षण की 28वीं वर्षगांठ पर बलूच संगठनों का विरोध, 28 मई को बताया 'काला दिन'
सारांश
मुख्य बातें
बलूच स्टूडेंट काउंसिल (BSC) और अन्य बलूच संगठनों ने 28 मई 1998 को बलूचिस्तान के चगाई जिले में किए गए पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों की 28वीं वर्षगांठ पर आयोजित सरकारी जश्न की कड़ी निंदा की है। संगठनों का कहना है कि यह तारीख बलूच जनता के लिए उत्सव नहीं, बल्कि विस्थापन, पर्यावरणीय विनाश और जबरन सैन्यीकरण की पीड़ादायक स्मृति है।
मुख्य घटनाक्रम
29 मई 2026 को क्वेटा से आई रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के इस्लामाबाद और पंजाब प्रांत में सक्रिय बलूच स्टूडेंट काउंसिल ने एक बयान जारी कर कहा, 'हम दुनिया को फिर याद दिलाना चाहते हैं कि यह तारीख बलूच राष्ट्र के लिए जश्न नहीं, बल्कि कब्जे, सैन्यीकरण और बलूच लोगों की लगातार पीड़ा की याद है।' संगठन के अनुसार, चगाई में परमाणु परीक्षण स्थानीय बलूच आबादी की सहमति के बिना थोपे गए थे।
इसी दिन दुनिया भर में बलूच कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए। बीएससी ने आरोप लगाया कि इस इलाके को परीक्षण का मैदान बनाया गया, जबकि बलूच लोगों की आवाज़, अधिकार और अस्तित्व को नज़रअंदाज़ किया गया।
बलूच संगठनों के आरोप
बीएससी ने कहा कि 'राष्ट्रीय हितों' के नाम पर लागू नीतियों का सर्वाधिक खामियाजा बलूचिस्तान ने भुगता है और आज भी वहाँ के लोग अपनी ही ज़मीन पर हाशिये पर जीने को मजबूर हैं। संगठन ने कहा, '28 मई इस बात की याद दिलाता है कि बलूचिस्तान को उसके लोगों की मातृभूमि की तरह नहीं, बल्कि एक उपनिवेश की तरह देखा गया।'
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि बलूच लोगों का लगातार विस्थापन, संसाधनों का शोषण, जनसंख्या में बदलाव की कोशिशें और विरोध की आवाज़ को दबाना एक बड़े दमन का हिस्सा है — जिसे कई बलूच नेता 'धीरे-धीरे होने वाला नरसंहार' बताते हैं। यह आरोप पाकिस्तान सरकार द्वारा अस्वीकृत है और इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बलूच अमेरिकन कांग्रेस की प्रतिक्रिया
बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने 28 मई को 'बलूचिस्तान के इतिहास का काला दिन' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '28 मई बलूचिस्तान के इतिहास का एक काला दिन है। इसी दिन 1998 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में परमाणु विस्फोट किया था, जिसने इस क्षेत्र को तबाही की राह पर डाल दिया।'
तारा चंद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि पाकिस्तान को 'कट्टरपंथी और आतंकवादी राज्य' के रूप में मान्यता दी जाए और उसके परमाणु हथियार वापस लिए जाएँ। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान में एक-तिहाई आबादी मानसिक बीमारियों से जूझ रही है — हालाँकि इस दावे का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने चगाई में पाँच परमाणु परीक्षण किए थे, जो भारत के पोखरण परीक्षणों के जवाब में किए गए थे। उस समय से बलूच समूह इस तारीख को 'यौम-ए-सियाह' (काला दिन) के रूप में मनाते आए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।
आगे की राह
बीएससी ने चगाई परीक्षणों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले छात्रों, पत्रकारों और मानवाधिकार समर्थकों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और कहा, 'सच्चाई, न्याय, सम्मान और अपने अस्तित्व की लड़ाई इस दिन के बाद भी जारी रहेगी।' पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।