बलूच कार्यकर्ता समी देन के घर छापा: मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की सदस्य समी देन बलूच के कराची स्थित आवास पर 30 जून को तड़के पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों ने छापेमारी की — उनकी गैर-मौजूदगी में और बिना किसी पूर्व सूचना के। इस कार्रवाई को मानवाधिकार संगठनों ने बलूच नागरिकों के विरुद्ध राज्य के 'दबाव और आक्रामकता के अभियान' का हिस्सा बताते हुए कड़ी निंदा की है।
छापेमारी का घटनाक्रम
समी देन बलूच के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में उनके घर पर बार-बार छापेमारी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी बिना किसी कानूनी वारंट के परिसर में दाखिल हुए, परिवार को डराया, घर की तलाशी ली और सामान जब्त किया। समी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह और पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी, मैं आपसे तत्काल स्पष्टीकरण की मांग करती हूँ। अभी-अभी कानून प्रवर्तन और खुफिया अधिकारियों ने मेरी जानकारी और उपस्थिति के बिना मेरे परिवार के घर पर छापा मारा। अगर यह आपकी सरकार के तहत हुआ है तो आपको जनता को जवाब देना होगा। और अगर नहीं, तो फिर यह स्पष्ट करना आपकी जिम्मेदारी है कि सिंध में इस तरह की मनमानी कौन कर रहा है।'
मानवाधिकार आयोग की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए सिंध सरकार से स्वतंत्र और तत्काल जाँच की माँग की। आयोग ने कहा, 'अगर यह पुष्टि होती है कि कराची में मानवाधिकार कार्यकर्ता समी देन बलूच के घर पर छापा मारा गया है, तो यह प्रक्रिया, गोपनीयता और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।' आयोग ने समी देन और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की।
BYC और बलूच महिला फोरम का आरोप
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने इस कार्रवाई को पाकिस्तान सरकार द्वारा अपने नेतृत्व के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक दमन अभियान का हिस्सा बताया। संगठन ने कहा, 'इन कदमों का उद्देश्य उन आवाज़ों को दबाना है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघनों, जबरन गायब किए जाने और बलूचिस्तान में राज्य दमन को उजागर करती हैं।' बलूच वुमेन फोरम (BWF) ने इस छापेमारी और क्वेटा में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा व गिरफ्तारियों को राज्य के दमनात्मक रवैये का प्रमाण बताया।
समी देन का संघर्ष और पारिवारिक पृष्ठभूमि
BWF के अनुसार, समी देन बलूच अपने पिता देन मोहम्मद बलूच की सुरक्षित वापसी के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से संघर्ष कर रही हैं, जिन्हें कथित तौर पर 17 वर्ष पहले जबरन गायब कर दिया गया था। संगठन का कहना है कि इन वर्षों में उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया, धमकाया गया और परेशान किया गया — लेकिन उन्होंने अपना रुख नहीं बदला। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाया जा रहा है।
आगे की स्थिति
अब तक सिंध सरकार या पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की ओर से इस छापेमारी पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। मानवाधिकार संगठन सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाए हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना वारंट की यह कार्रवाई पाकिस्तान के संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है और असहमति को दबाने की नीति का हिस्सा है।