बलूचिस्तान: पसनी में शिक्षक परवेज मजहर की हत्या, परिवार का पाकिस्तानी बलों पर संदिग्धों को शरण देने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान के पसनी में सरकारी हाई स्कूल के अरबी शिक्षक परवेज मजहर की कथित अपहरण के बाद हत्या कर दी गई, और उनके परिजनों ने 17 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर इस मामले में नामजद संदिग्धों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि संदिग्धों को पुलिस के हवाले नहीं किया गया, तो वे मकरान कोस्टल हाईवे को बाधित कर देंगे।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय सूत्रों के हवाले से मिली रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी हाई स्कूल बब्बर शोर में कार्यरत अरबी भाषा के शिक्षक परवेज मजहर को कथित तौर पर एक दिन पहले उनके परिवार के सामने से अगवा किया गया और बुधवार को उन्हें पसनी में मृत पाया गया। मजहर के बच्चे भी उन प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जो पसनी प्रेस क्लब के बाहर न्याय की माँग कर रहे थे।
परिवार का आरोप है कि मजहर को एक सशस्त्र समूह — जिसे वे सरकार-समर्थित 'डेथ स्क्वॉड' बताते हैं — ने अगवा किया और एक निजी यातना केंद्र में ले जाकर उनकी हत्या कर दी। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि एफआईआर में नामजद संदिग्धों को तत्काल पुलिस के सुपुर्द किया जाए।
सरकार पर आरोप और प्रदर्शनकारियों की माँग
प्रदर्शनकारियों का कथित तौर पर आरोप है कि नामजद संदिग्धों को पाकिस्तानी सेना का संरक्षण प्राप्त है, जिस कारण कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने पुलिस से माँग की कि इन संदिग्धों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
यह मामला बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के व्यापक संदर्भ में आया है, जहाँ वर्षों से मानवाधिकार संगठन ऐसे मामलों को दस्तावेज़ीकृत करते रहे हैं।
क्वेटा में 6,390 दिनों से जारी धरना
क्वेटा में 'वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स' (वीबीएमपी) का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को 6,390वें दिन में प्रवेश कर गया — यह बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के विरुद्ध चल रहे लंबे संघर्ष का प्रतीक है। इस धरने में कामरान खान के पिता और भाई भी शामिल हुए।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने 1 अप्रैल 2026 को क्वेटा के कंबरानी रोड स्थित किल्ली कश्मीरबाद से कामरान खान को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर ले गई। वीबीएमपी के चेयरमैन नसरुल्ला बलोच ने बताया कि एक सरकारी आयोग ने कामरान का मामला दर्ज करते हुए संबंधित संस्थाओं को नोटिस भेजे हैं।
विशेषज्ञ और नेताओं की प्रतिक्रिया
बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की प्रमुख नेता सम्मी दीन बलोच — जिनके पिता दीन मुहम्मद बलोच को स्वयं जबरन गायब किया जा चुका है — ने बलूचिस्तान में जबरन विस्थापन, घर तोड़ने और बुनियादी जरूरतों तक पहुँच रोकने को समुदायों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा, 'लोगों को उनकी जमीन से जबरन विस्थापित करने से न तो स्थायी शांति कायम हो सकती है और न ही वास्तविक सुरक्षा मिल सकती है।' उन्होंने आगे बताया कि दो दशकों से जारी जबरन विस्थापन ने हज़ारों परिवारों को उनकी पुश्तैनी जमीन, घर और आजीविका से वंचित किया है।
क्षेत्रीय स्थिति और आगे की चुनौतियाँ
इस वर्ष मस्तुंग से लेकर ग्वादर तक ऐसी नई घटनाएँ सामने आई हैं। जेहरी, मशके और जमुरान में लंबे समय तक कर्फ्यू और सड़कें बंद रहने के कारण वहाँ के निवासियों की भोजन व अन्य आवश्यक वस्तुओं तक पहुँच महीनों तक बाधित रही।
नसरुल्ला बलोच ने माँग की कि यदि किसी लापता व्यक्ति पर अपराध का आरोप है, तो अधिकारियों को उसे कानून के अनुसार अदालत में प्रस्तुत करना चाहिए — परिवारों को अनिश्चितता में नहीं छोड़ना चाहिए। बलूचिस्तान में इस मुद्दे पर न्यायिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है।