बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने 10 नागरिकों को जबरन गायब किया, 15 वर्षीय छात्र भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कम से कम 10 नागरिकों को जबरन गायब कर दिया है — इनमें एक 15 वर्षीय छात्र भी शामिल है। 4 नवंबर 2026 को सामने आई ये रिपोर्टें अलग-अलग जिलों — अवारान, पसनी, क्वेटा और पंजगुर — की घटनाओं को उजागर करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब प्रांत में गैर-न्यायिक हत्याओं और जबरन गायब किए जाने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
अवारान और पसनी में छापेमारी
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने 1 नवंबर को अवारान जिले के झाओ इलाके में छापेमारी करते हुए मौलाबख्श और उनके बेटे गफ्फार को हिरासत में लिया और उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। अगले दिन उसी क्षेत्र में एक और कार्रवाई में दोस्त मोहम्मद को कथित तौर पर यातनाएँ देने के बाद हिरासत में लिया गया। तीनों का तब से कोई पता नहीं है।
इसी दिन, पसनी क्षेत्र के शादी कौर इलाके से दो भाइयों — कहदा गंज और बैगमान — को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें भी एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और वे तब से लापता हैं।
क्वेटा में चार मामले: छात्र से स्ट्रीट वेंडर तक
प्रांतीय राजधानी क्वेटा में कथित जबरन गायब किए जाने के चार अलग-अलग मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 15 वर्षीय छात्र याह्या बलूच को 27 अक्टूबर की सुबह किल्ली कंबरानी स्थित उसके घर से अगवा किया गया। इस मामले में पाकिस्तान की अंतर-सेवा खुफिया (ISI), सैन्य खुफिया (MI) और आतंकवाद-विरोधी विभाग (CTD) के कर्मियों पर संलिप्तता का आरोप लगाया गया है।
28 वर्षीय दुकानदार जफर बलूच को कथित तौर पर 16 अक्टूबर को किरानी रोड से हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों में इसे उनका दूसरा जबरन गायब होना बताया गया है, और इसमें MI व CTD कर्मियों की भूमिका बताई गई है। क्वेटा के पूर्वी बाईपास क्षेत्र के निवासी 20 वर्षीय छात्र किफायत बलूच को 18 सितंबर को कथित तौर पर बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के बाहर CTD कर्मियों ने हिरासत में लिया।
इसके अतिरिक्त, 25 वर्षीय स्ट्रीट वेंडर मोहम्मद आजम — जो खुदादद के पुत्र हैं और हुड्डा के मनोजान रोड के निवासी हैं — को कथित तौर पर 20 अगस्त को एयरपोर्ट रोड पर एलाइड स्कूल के पास ISI और CTD कर्मियों द्वारा उठाया गया।
पंजगुर में सीमा पर हिरासत
पंजगुर जिले में 18 वर्षीय ड्राइवर जुबैर बलूच को कथित तौर पर 5 अक्टूबर को पारोम में जिराक सीमा के पास फ्रंटियर कोर के कर्मियों ने हिरासत में लिया। वह भी तब से लापता है। गौरतलब है कि यह घटना बलूचिस्तान के एक सुदूर सीमावर्ती इलाके में हुई, जहाँ स्वतंत्र निगरानी व्यावहारिक रूप से असंभव है।
व्यापक संदर्भ: बढ़ती घटनाओं का पैटर्न
ये ताजा मामले उस लंबी श्रृंखला की कड़ी हैं, जिसे मानवाधिकार संगठन बलूचिस्तान में 'व्यवस्थागत जबरन गायब' करने की नीति बताते हैं। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार और सेना ऐसे मामलों में जवाबदेही से बचती रही हैं। पाकिस्तानी सेना ने इन विशिष्ट आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आँकड़ों के अनुसार बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के मामले पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़े हैं, और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ इस पर गहरी चिंता जता चुकी हैं।
यह रिपोर्टें ऐसे समय में सामने आई हैं जब बलूचिस्तान में सशस्त्र संघर्ष और नागरिक असंतोष दोनों में तेजी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पाकिस्तान की नागरिक सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है कि वे इन मामलों में पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करें।