बनारस लोकोमोटिव वर्क्स से निर्मित लोकोमोटिव का अंतिम बैच मापुटो पहुंचा
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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा की है कि मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड के अंतर्गत दो लोकोमोटिव का अंतिम बैच मापुटो पहुंच चुका है।
रेल मंत्रालय ने अपने पोस्ट में बताया कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) द्वारा निर्मित 3,300 एचपी के दो लोकोमोटिव का अंतिम बैच मापुटो पहुँचने के बाद, भारतीय रेलवे ने मोजाम्बिक को कुल 10 लोकोमोटिव की आपूर्ति पूरी कर ली है। यह घटना वैश्विक रेल निर्माण में भारत की क्षमता को उजागर करती है।
इससे पहले, 11 मार्च 2021 को पीयूष गोयल ने मोजाम्बिक को निर्यात के लिए 3000 एचपी के केप गेज लोकोमोटिव को हरी झंडी दिखायी थी।
यह ध्यान देने योग्य है कि 19 जुलाई 2025 को बनारस रेल इंजन कारखाने ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की थी। इस कारखाने ने अपने 2,500वें इलेक्ट्रिक रेल इंजन का समर्पण किया था। महाप्रबंधक नरेशपाल सिंह ने अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में डब्ल्यूएपी-7 श्रेणी के 6,000 एचपी इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
यह समारोह भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी नवाचार से निर्मित 2,500वां इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बीएलडब्ल्यू की तेज गति से काम करने की क्षमता को दर्शाता है। मात्र आठ वर्षों में इस उपलब्धि को प्राप्त करना भारतीय रेलवे के विनिर्माण इतिहास में एक रिकॉर्ड है।
बीएलडब्ल्यू ने अपनी स्थापना के बाद से कुल 10,822 इंजनों का निर्माण किया है, जिसमें 7,498 डीजल और 2,500 इलेक्ट्रिक इंजन शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, इसने 472 इलेक्ट्रिक इंजनों का उत्पादन किया है और यह अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डरों को भी पूरा कर रहा है। मोजाम्बिक के लिए ऑर्डर किए गए 10 एसी डीजल-इलेक्ट्रिक इंजनों में से दो भेजे गए हैं। इस कारखाने से मोजाम्बिक को 10 लोकोमोटिव की आपूर्ति की जा चुकी है।