भारतीय रेलवे ने रायपुर में ₹175 करोड़ की होमिंग सुविधा परियोजना को दी मंजूरी, 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को मिलेगा नया बेस
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने 10 जुलाई 2026 को रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर (HHP) डीजल शेड में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं विकसित करने हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति दी है। रेल मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार यह परियोजना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत क्रियान्वित की जाएगी।
होमिंग सुविधा क्या होती है
होमिंग का तात्पर्य किसी लोकोमोटिव को एक निर्दिष्ट शेड में स्थायी रूप से आवंटित करने से है, जो उसके प्राथमिक रखरखाव केंद्र के रूप में कार्य करता है। यह शेड नियमित रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण, मरम्मत और समग्र देखभाल सुनिश्चित करता है, ताकि लोकोमोटिव का संचालन सुरक्षित और दक्ष बना रहे। गौरतलब है कि पर्याप्त होमिंग क्षमता के अभाव में लोकोमोटिव का रखरखाव चक्र बाधित होता है, जिसका सीधा असर ट्रेन परिचालन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।
परियोजना की आवश्यकता और पृष्ठभूमि
रेल मंत्रालय के अनुसार यह स्वीकृति भारतीय रेलवे के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े के तीव्र विस्तार और माल ढुलाई तथा यात्री परिचालन में हो रही वृद्धि के अनुरूप बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आई है जब रेलवे तेज़ी से डीज़ल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर संक्रमण कर रही है और नए लोकोमोटिव की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है।
इन अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं से रायपुर डिपो में मौजूदा बुनियादी ढाँचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और भविष्य में तकनीकी विस्तार के लिए आवश्यक स्थान भी उपलब्ध हो सकेगा।
बुलेट ट्रेन परियोजना पर रेल मंत्री का अपडेट
इसी माह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष सूरत से बिलिमोरा तक का पहला सेक्शन चालू हो जाएगा, इसके बाद वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, तत्पश्चात अहमदाबाद से ठाणे और अंत में अहमदाबाद से मुंबई वाले सेक्शन पूरे किए जाएंगे।
वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना 2029 तक अलग-अलग चरणों में पूरी होगी और गुजरात क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पहले ही सम्पन्न हो चुका है।
तकनीकी चुनौतियाँ
रेल मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि शहरी क्षेत्रों में बुलेट ट्रेन का निर्माण तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल है। उन्होंने कहा, 'शहर के अंदर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बहुत जटिल है। कई जगहों पर रेलवे ट्रैक को पार करना होगा और कई स्थानों पर मौजूदा रेलवे लाइनों के ऊपर बने फ्लाईओवर को भी पार करना होगा। कई जगहों पर डबल क्रॉसिंग की ज़रूरत है, जिससे यह तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।' रायपुर होमिंग परियोजना और बुलेट ट्रेन विस्तार मिलकर भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक सुसंगत तस्वीर पेश करते हैं।