10 जुलाई 2026
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भारतीय रेलवे ने रायपुर में ₹175 करोड़ की होमिंग सुविधा परियोजना को दी मंजूरी, 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को मिलेगा नया बेस

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भारतीय रेलवे ने रायपुर में ₹175 करोड़ की होमिंग सुविधा परियोजना को दी मंजूरी, 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को मिलेगा नया बेस

सारांश

भारतीय रेलवे ने रायपुर में ₹175 करोड़ की होमिंग सुविधा परियोजना को हरी झंडी दी है, जो SECR के HHP शेड में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को समायोजित करेगी। यह डीज़ल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर रेलवे के संक्रमण का ठोस संकेत है।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने 10 जुलाई 2026 को ₹175 करोड़ की होमिंग सुविधा परियोजना को मंजूरी दी।
परियोजना रायपुर स्थित SECR के HHP डीज़ल शेड में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए होगी।
होमिंग शेड लोकोमोटिव के नियमित रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण और मरम्मत का प्राथमिक केंद्र होता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार बुलेट ट्रेन परियोजना 2029 तक चरणबद्ध रूप से पूरी होगी।
गुजरात में बुलेट ट्रेन का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा; पहला सेक्शन सूरत-बिलिमोरा अगले वर्ष चालू होने की उम्मीद।

भारतीय रेलवे ने 10 जुलाई 2026 को रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर (HHP) डीजल शेड में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं विकसित करने हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति दी है। रेल मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार यह परियोजना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत क्रियान्वित की जाएगी।

होमिंग सुविधा क्या होती है

होमिंग का तात्पर्य किसी लोकोमोटिव को एक निर्दिष्ट शेड में स्थायी रूप से आवंटित करने से है, जो उसके प्राथमिक रखरखाव केंद्र के रूप में कार्य करता है। यह शेड नियमित रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण, मरम्मत और समग्र देखभाल सुनिश्चित करता है, ताकि लोकोमोटिव का संचालन सुरक्षित और दक्ष बना रहे। गौरतलब है कि पर्याप्त होमिंग क्षमता के अभाव में लोकोमोटिव का रखरखाव चक्र बाधित होता है, जिसका सीधा असर ट्रेन परिचालन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

परियोजना की आवश्यकता और पृष्ठभूमि

रेल मंत्रालय के अनुसार यह स्वीकृति भारतीय रेलवे के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े के तीव्र विस्तार और माल ढुलाई तथा यात्री परिचालन में हो रही वृद्धि के अनुरूप बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आई है जब रेलवे तेज़ी से डीज़ल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर संक्रमण कर रही है और नए लोकोमोटिव की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है।

इन अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं से रायपुर डिपो में मौजूदा बुनियादी ढाँचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और भविष्य में तकनीकी विस्तार के लिए आवश्यक स्थान भी उपलब्ध हो सकेगा।

बुलेट ट्रेन परियोजना पर रेल मंत्री का अपडेट

इसी माह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष सूरत से बिलिमोरा तक का पहला सेक्शन चालू हो जाएगा, इसके बाद वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, तत्पश्चात अहमदाबाद से ठाणे और अंत में अहमदाबाद से मुंबई वाले सेक्शन पूरे किए जाएंगे।

वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना 2029 तक अलग-अलग चरणों में पूरी होगी और गुजरात क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पहले ही सम्पन्न हो चुका है।

तकनीकी चुनौतियाँ

रेल मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि शहरी क्षेत्रों में बुलेट ट्रेन का निर्माण तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल है। उन्होंने कहा, 'शहर के अंदर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बहुत जटिल है। कई जगहों पर रेलवे ट्रैक को पार करना होगा और कई स्थानों पर मौजूदा रेलवे लाइनों के ऊपर बने फ्लाईओवर को भी पार करना होगा। कई जगहों पर डबल क्रॉसिंग की ज़रूरत है, जिससे यह तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।' रायपुर होमिंग परियोजना और बुलेट ट्रेन विस्तार मिलकर भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक सुसंगत तस्वीर पेश करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े संरचनात्मक प्रश्न को उजागर करती है जिसे रेलवे अक्सर नज़रअंदाज़ करती है — लोकोमोटिव खरीद और रखरखाव बुनियादी ढाँचे के बीच की खाई। इलेक्ट्रिक बेड़े का विस्तार तभी सार्थक है जब शेड क्षमता उसके साथ कदम मिलाकर चले; अन्यथा नए लोकोमोटिव भी पुरानी बाधाओं में फँस जाते हैं। बुलेट ट्रेन के 2029 के लक्ष्य और गुजरात में 80% प्रगति के दावों की असली परीक्षा शहरी खंडों में होगी, जहाँ तकनीकी जटिलता और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ अभी भी अनसुलझी हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रेलवे की रायपुर होमिंग सुविधा परियोजना क्या है?
यह ₹175 करोड़ की परियोजना रायपुर स्थित SECR के HHP डीज़ल शेड में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं विकसित करेगी। रेल मंत्रालय ने इसे 10 जुलाई 2026 को स्वीकृति दी।
होमिंग शेड का क्या मतलब होता है और यह क्यों ज़रूरी है?
होमिंग शेड वह निर्दिष्ट स्थान होता है जहाँ एक लोकोमोटिव को स्थायी रूप से आवंटित किया जाता है और जो उसके रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण तथा मरम्मत का प्राथमिक केंद्र होता है। पर्याप्त होमिंग क्षमता के बिना लोकोमोटिव का रखरखाव चक्र बाधित होता है, जिसका असर ट्रेन परिचालन पर पड़ता है।
बुलेट ट्रेन परियोजना कब तक पूरी होगी?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार बुलेट ट्रेन परियोजना 2029 तक अलग-अलग चरणों में पूरी होगी। पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक अगले वर्ष चालू होने की उम्मीद है।
गुजरात में बुलेट ट्रेन का कितना काम पूरा हो चुका है?
रेल मंत्री के अनुसार गुजरात क्षेत्र में बुलेट ट्रेन का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शहरी खंडों में डबल क्रॉसिंग और मौजूदा रेलवे लाइनों को पार करने की तकनीकी चुनौतियाँ अभी भी शेष हैं।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण लक्ष्यों से कैसे जुड़ी है?
भारतीय रेलवे तेज़ी से डीज़ल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ रही है और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े का विस्तार हो रहा है। रायपुर की यह परियोजना उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें नए लोकोमोटिव के अनुरूप रखरखाव बुनियादी ढाँचा तैयार किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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