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आईआईटी-गांधीनगर में 'समर्थ' हब: ₹190 करोड़ से बनेगा सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र

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आईआईटी-गांधीनगर में 'समर्थ' हब: ₹190 करोड़ से बनेगा सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र

सारांश

आईआईटी-गांधीनगर में ₹190 करोड़ की लागत से 'समर्थ' सेमीकंडक्टर हब की स्थापना होने जा रही है। पाँच वर्षों में 10,000 से अधिक विद्यार्थियों, तकनीशियनों और पेशेवरों को फैब-रेडी प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है — यह भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

आईआईटी-गांधीनगर में 'समर्थ' (सिलिकॉन एंड एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग हब) शीघ्र स्थापित होगा।
केंद्र सरकार ( MeitY ), गुजरात सरकार और आईआईटी-गांधीनगर ने मिलकर ₹190 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
अगले पाँच वर्षों में 10,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य — जिनमें 5,600 डिग्री विद्यार्थी , 1,500 टेक्नीशियन और 1,000 सर्टिफिकेट कोर्स प्रतिभागी शामिल हैं।
केंद्र में नैनो फैब्रिकेशन, सीएमओएस, आईसी डिजाइन और डिवाइस मॉडलिंग जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ होंगी।
गुजरात के इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ एमओयू की तैयारी; राज्य के विद्यार्थियों के लिए मामूली शुल्क पर प्रवेश की व्यवस्था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-गांधीनगर में शीघ्र ही 'समर्थ' (सिलिकॉन एंड एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग हब) की स्थापना होने जा रही है, जिसके लिए केंद्र सरकार, गुजरात सरकार और आईआईटी-गांधीनगर ने मिलकर ₹190 करोड़ का बजट आवंटित किया है। यह केंद्र सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने और 10,000 से अधिक प्रशिक्षित पेशेवरों की एक सक्षम कार्यबल तैयार करने के लक्ष्य के साथ काम करेगा। 3 जुलाई 2025 को इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा सामने आई है।

समर्थ क्या है और इसका उद्देश्य क्या है

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी-गांधीनगर की त्रिपक्षीय साझेदारी से स्थापित होने वाला 'समर्थ' मुख्यतः सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अनुसंधान, विकास और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर केंद्रित रहेगा। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को 'फैब-रेडी' बनाना है — अर्थात वे सीधे सेमीकंडक्टर प्लांट में काम करने के लिए तैयार होंगे।

नवाचार, उद्योग भागीदारी और व्यापक कार्यबल निर्माण के ज़रिये भारत में विश्व स्तरीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम खड़ा करना इस केंद्र का दीर्घकालिक लक्ष्य है। गौरतलब है कि गुजरात को पहले से ही सेमीकंडक्टर निवेश का प्रमुख गंतव्य माना जाता है, और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार इस दिशा में तेज़ी से काम कर रही है।

प्रशिक्षण लक्ष्य और पाठ्यक्रम संरचना

आगामी पाँच वर्षों में 'समर्थ' के अंतर्गत कुल 5,600 अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 1,500 टेक्नीशियनों को वोकेशनल एवं टेक्निकल पाठ्यक्रमों में और 1,000 लोगों को सर्टिफिकेट कोर्स के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रोफेशनल अपस्किलिंग के अंतर्गत 230 फैकल्टी सदस्यों और 230 उद्योग पेशेवरों को उन्नत प्रशिक्षण मिलेगा। समर स्कूल और वन-डे एक्सपोजर प्रोग्राम के माध्यम से 2,700 से अधिक विद्यार्थियों को इस क्षेत्र से परिचित कराया जाएगा। इस प्रकार कुल मिलाकर 10,000 से अधिक लोगों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना है।

आधुनिक प्रयोगशालाएँ और सुविधाएँ

यह केंद्र अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस होगा। इसमें नैनो फैब्रिकेशन और सीएमओएस प्रक्रिया प्रशिक्षण सुविधा के साथ-साथ डिवाइस प्रोसेस कैरेक्टराइजेशन सुविधा होगी, जहाँ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और चिप निर्माण प्रक्रिया की जाँच, टेस्टिंग और गुणवत्ता परीक्षण किया जा सकेगा।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर प्रोसेस एवं डिवाइस डिजाइन लैब, डिवाइस मॉडलिंग लैब और आईसी डिजाइन एवं प्रोटोटाइप लैब का भी निर्माण किया जाएगा। राज्य के विद्यार्थी यहाँ मामूली शुल्क पर अध्ययन कर सकेंगे।

संस्थागत साझेदारी और क्रियान्वयन की स्थिति

आईआईटी-गांधीनगर ने इस केंद्र के संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की खरीद और निर्माण कार्य हेतु कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, गुजरात के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ एमओयू करने की तैयारियाँ भी चल रही हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संदर्भ में कहा है: 'हमारा लक्ष्य केवल एक फैक्ट्री स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम बनाना है। भारत अब सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहा है, जिसमें डिजाइन इंजीनियर से लेकर मशीन निर्माता और लॉजिस्टिक्स तक के सभी स्तर शामिल हैं।'

आगे की राह

केंद्र के शीघ्र प्रारंभ होने के बाद विद्यार्थी उद्योग की माँग के अनुरूप सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। स्थानीय और वैश्विक साझेदारियों के ज़रिये 'समर्थ' एक समन्वित प्लेटफॉर्म के रूप में उभरेगा, जो भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को मानव संसाधन की मज़बूत नींव देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — भारत में कई तकनीकी केंद्रों की घोषणाएँ कागज़ पर प्रभावशाली रही हैं, पर ज़मीन पर देरी एक परिचित कहानी है। ₹190 करोड़ का बजट वैश्विक सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण निवेश की तुलना में सीमित है, और 10,000 प्रशिक्षित पेशेवरों का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब उद्योग में वास्तविक रोज़गार के अवसर उसी गति से बढ़ें। गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए 'फैब-रेडी' इंजीनियरों की माँग और आपूर्ति के बीच का अंतर एक महत्वपूर्ण प्रश्न बना रहेगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'समर्थ' सेमीकंडक्टर हब क्या है?
'समर्थ' (सिलिकॉन एंड एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग हब) आईआईटी-गांधीनगर में स्थापित होने वाला एक राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, प्रोफेसरों और उद्योग पेशेवरों को फैब-रेडी सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण देकर भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
'समर्थ' के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है और इसे कौन फंड कर रहा है?
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी-गांधीनगर ने मिलकर कुल ₹190 करोड़ का बजट आवंटित किया है। यह तीन संस्थाओं की साझा वित्तीय प्रतिबद्धता है।
'समर्थ' से कितने और कौन-से लोग प्रशिक्षित होंगे?
अगले पाँच वर्षों में 10,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। इनमें 5,600 डिग्री विद्यार्थी (UG/PG/PhD), 1,500 टेक्नीशियन, 1,000 सर्टिफिकेट कोर्स प्रतिभागी, 460 फैकल्टी एवं उद्योग पेशेवर और 2,700 से अधिक विद्यार्थी समर स्कूल/एक्सपोजर प्रोग्राम के ज़रिये शामिल हैं।
इस केंद्र में कौन-सी प्रयोगशालाएँ और सुविधाएँ होंगी?
'समर्थ' में नैनो फैब्रिकेशन एवं सीएमओएस प्रक्रिया प्रशिक्षण सुविधा, डिवाइस प्रोसेस कैरेक्टराइजेशन सुविधा, सेमीकंडक्टर प्रोसेस एवं डिवाइस डिजाइन लैब, डिवाइस मॉडलिंग लैब और आईसी डिजाइन एवं प्रोटोटाइप लैब शामिल होंगी। ये सुविधाएँ चिप निर्माण से लेकर डिज़ाइन तक का व्यावहारिक अनुभव देंगी।
गुजरात के विद्यार्थियों के लिए 'समर्थ' में प्रवेश कैसे होगा?
राज्य के विद्यार्थियों के लिए मामूली शुल्क पर अध्ययन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आईआईटी-गांधीनगर गुजरात के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ एमओयू करने की तैयारी में है, जिससे अधिक से अधिक संस्थानों के विद्यार्थी इस केंद्र का लाभ उठा सकें।
राष्ट्र प्रेस
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