बांग्लादेश में युवा बेरोजगारी संकट गहराया, देशव्यापी सर्वे में सामने आईं चौंकाने वाली चुनौतियाँ
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में युवा बेरोजगारी संकट तेज़ी से गहराता जा रहा है। 12 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सामने आए एक देशव्यापी सर्वे के अनुसार, देश में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा अवसरों की कमी के कारण बेकार बैठने को मजबूर हैं। शोपनोपुरी कल्याण संस्था और बांग्लादेश को-क्रिएशन द्वारा संयुक्त रूप से कराए गए इस सर्वे ने बेरोजगारी को युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में चिह्नित किया है।
सर्वे की मुख्य बातें
'बांग्लादेश में युवाओं की समस्याएँ और संभावित समाधान' शीर्षक वाले इस सर्वे में ढाका सहित देश भर से छात्र, युवा आयोजक, स्वयंसेवक, समाजसेवी और युवा नवाचार प्रतिनिधि शामिल हुए। सर्वे में बेरोजगारी के अलावा कौशल की कमी, मानसिक तनाव, डिजिटल लत, ऑनलाइन गैंबलिंग और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को भी युवाओं की प्रमुख समस्याओं के रूप में रेखांकित किया गया।
यह सर्वे संयुक्त राष्ट्र की थीम 'अलग-अलग हालात, एक जैसी उम्मीदें' के तहत अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस को मनाने के उद्देश्य से कराया गया था। हर वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिन वैश्विक स्तर पर युवाओं की चुनौतियों और अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत विकास में उनकी भूमिका को रेखांकित करने का अवसर होता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता दबाव
डिसेबल वेलफेयर सोसाइटी बांग्लादेश की सदस्य सालेहा के ने युवाओं में बढ़ते तनाव और मानसिक दबाव को एक गंभीर चिंता का विषय बताया। गबुरा वेलफेयर सोसाइटी के आयोजन सचिव रबीउल इस्लाम ने कहा कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता, आत्मविश्वास में गिरावट और उचित मार्गदर्शन के अभाव में बांग्लादेश में बड़ी संख्या में युवा मानसिक दबाव के शिकार हो रहे हैं।
जियो एवेंजर्स की प्रतिनिधि संजीदा सुमिया सुचोना ने कहा कि वर्षों की पढ़ाई और कौशल विकास के बाद भी उचित रोज़गार, वित्तीय स्थिरता और बेहतर जीवन न मिल पाने से कई युवा गहरी निराशा में डूब रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में आर्थिक अस्थिरता पहले से ही युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।
डिजिटल लत और नशे की बढ़ती समस्या
सर्वे में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने डिजिटल तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता के साथ-साथ ऑनलाइन गैंबलिंग और कैसीनो गेम्स में युवाओं की बढ़ती संलिप्तता को खतरनाक बताया। इस्लामिक सोसाइटी संघा बुरीमारी के संस्थापक और निदेशक एमडी शरीफुल इस्लाम अभि ने मोबाइल फोन के दुरुपयोग और नशे की लत को युवाओं में बढ़ती समस्याओं का प्रमुख कारण बताया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
दीपांचल फाउंडेशन के सलाहकार अमन उल्लाह ने एक महत्त्वपूर्ण प्रवृत्ति की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, बांग्लादेश के युवाओं में 'ट्रांजिट माइंडसेट' तेज़ी से पनप रहा है — यानी कई युवा अपने देश को एक अस्थायी पड़ाव के रूप में देख रहे हैं, न कि ऐसी जगह के रूप में जहाँ वे अपना भविष्य बना सकें। उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती संख्या में युवा विदेश पलायन को सफल जीवन का मुख्य मार्ग मान रहे हैं। गौरतलब है कि यह प्रवृत्ति न केवल बांग्लादेश के मानव संसाधन को कमज़ोर करती है, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए भी गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है।
आगे की राह
सर्वे में शामिल विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने सरकार और नागरिक समाज से युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाने, कौशल विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मज़बूत करने की अपील की है। बांग्लादेश में युवा आबादी के भविष्य को दिशा देने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की ज़रूरत अब पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।