बांग्लादेश में बाल श्रम संकट: 12 लाख नए बच्चे वर्कफोर्स में, 50% घरेलू बाल कामगार शोषण के शिकार
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में बाल श्रम की स्थिति गंभीर रूप धारण कर चुकी है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, चाइल्ड सपोर्ट सर्विस हेल्पलाइन 1098 पर जनवरी से 10 जून 2025 के बीच शोषण से जुड़े 101 कॉल आए, जबकि इमरजेंसी हेल्पलाइन 999 पर मई 2025 तक कार्यस्थल पर बच्चों के शोषण की 33 शिकायतें दर्ज की गईं। मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे (MICS) 2025 के अनुसार, 2019 से अब तक लगभग 12 लाख और बच्चे देश के वर्कफोर्स में शामिल हो चुके हैं।
बाल श्रम में चिंताजनक उछाल
MICS 2025 के आँकड़े बताते हैं कि 5 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 9.2 फीसदी बच्चे फिलहाल बाल श्रम में संलग्न हैं, जो 2019 के 6.8 फीसदी की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश ने बाल मजदूरी उन्मूलन का वचन दे रखा है, और यह आँकड़े 12 जून को मनाए गए विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के आसपास सार्वजनिक हुए। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, आर्थिक कठिनाइयाँ बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम पर जाने के लिए मजबूर कर रही हैं।
घरेलू बाल कामगारों की दुर्दशा
ढाका स्थित संस्था एक्शन फॉर सोशल डेवलपमेंट (ASD) के सर्वे 'ढाका शहर में घरेलू काम करने वाले बच्चों की स्थिति' के अनुसार, राजधानी में घरेलू कार्य में लगे लगभग 50 फीसदी बच्चे किसी न किसी रूप में शोषण का सामना करते हैं। इसके अलावा, 31.45 फीसदी बच्चों पर अत्यधिक काम का बोझ डाला जाता है। बाल अधिकार संस्था 'शिशुराय सब' की संयोजक लैला खांडाकर ने बताया कि होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, ईंट भट्टों और अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले बच्चों को प्रतिदिन लंबे घंटे काम करना पड़ता है, साथ ही मारपीट, अपमान, खराब कार्यदशा, कम या शून्य मजदूरी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों की राय: निगरानी तंत्र की विफलता
लैला खांडाकर ने कहा, "हमारे पास संस्थागत क्षेत्र में निगरानी की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। और अनौपचारिक क्षेत्र में ज्यादातर काम बच्चे करते हैं। इसलिए वे कार्यस्थलों पर गाली-गलौज और शोषण के शिकार होते हैं और इसका कोई इलाज नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि बाल मजदूरी की माँग इसलिए अधिक है क्योंकि बच्चों को कमज़ोर, आसानी से नियंत्रित होने वाला और अन्याय का विरोध न करने वाला समझा जाता है।
डोमेस्टिक वर्कर्स नेशनल फोरम बांग्लादेश की अध्यक्ष जकिया सुल्ताना ने बताया कि उन्होंने स्वयं आठ वर्ष की उम्र में घरेलू कामगार के रूप में काम शुरू किया था और कई प्रकार के शोषण का सामना किया। उन्होंने कहा कि दशकों बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है — गरीब परिवारों के आठ साल के बच्चे आज भी घरों में काम करते हुए उसी तरह के दुर्व्यवहार का शिकार हो रहे हैं।
सुल्ताना ने कहा, "हम जानते हैं कि ये घटनाएँ मीडिया में आई हैं और इन पर चर्चा हुई है। लेकिन हम यह जानते हुए भी कि घरेलू काम करने वाले बच्चे लगातार कई तरह के दुर्व्यवहार — जिसमें यौन शोषण भी शामिल है — का शिकार होते हैं, उन्हें रोक नहीं सकते।"
आम जनता और बच्चों पर असर
गौरतलब है कि यह स्थिति बांग्लादेश की उस आर्थिक पृष्ठभूमि में उभरी है जहाँ गरीब परिवार बच्चों को स्कूल से निकालकर आजीविका के लिए काम पर भेजने को मजबूर हो रहे हैं। यह न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि देश की भावी पीढ़ी की शिक्षा और कौशल विकास को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि अनौपचारिक क्षेत्र में प्रभावी निगरानी तंत्र की स्थापना, घरेलू कामगार बच्चों के लिए कानूनी संरक्षण का विस्तार और गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता — ये तीन कदम बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए अनिवार्य हैं। बांग्लादेश सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह अपने बाल मजदूरी उन्मूलन के वादों को ज़मीनी हकीकत में बदले।