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बांग्लादेश में साइबर अपराध का संकट: 97% पीड़ित महिलाएं और बच्चे, 89% मामले अनरिपोर्टेड

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बांग्लादेश में साइबर अपराध का संकट: 97% पीड़ित महिलाएं और बच्चे, 89% मामले अनरिपोर्टेड

सारांश

बांग्लादेश में साइबर अपराध का संकट गहराता जा रहा है — 97% पीड़ित महिलाएं और बच्चे हैं, फिर भी 89% मामले सामाजिक डर से अनरिपोर्टेड रहते हैं। पाँच साल में 4,794 केस दर्ज, लेकिन 72% अनसुलझे। समर्पित साइबर इकाई के अभाव में यह संकट और गहरा होता दिख रहा है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में साइबर अपराध के लगभग 97 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं और बच्चे हैं — पुलिस मुख्यालय और खुफिया सूत्रों के अनुसार।
'साइबर सपोर्ट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन' की रिपोर्ट जनवरी 2025 से 29 मामलों के विश्लेषण पर आधारित है।
देश में हर 5 में से 3 लड़कियों ने साइबर उत्पीड़न का सामना किया; 89% पीड़ित शिकायत नहीं करते।
शिकायत दर्ज कराने वालों में भी 72% मामले अनसुलझे रहे या सबूतों की कमी से बंद किए गए।
पिछले 5 वर्षों में तीन डिजिटल कानूनों के तहत कुल 4,794 मामले दर्ज।
IGP अली हुसैन फकीर ने साइबर अपराध को देश की सबसे बड़ी कानून-व्यवस्था चुनौती बताया; समर्पित साइबर इकाई का अभाव जारी।

बांग्लादेश में साइबर अपराध के मामले खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके हैं — पुलिस मुख्यालय और खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन अपराधों के लगभग 97 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं और बच्चे हैं। 20 जुलाई 2026 को सामने आई यह रिपोर्ट बताती है कि ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क तेज़ी से अपना दायरा विस्तृत कर रहे हैं और किशोर वर्ग इनका सबसे आसान निशाना बन रहा है।

पीड़ितों की तस्वीर: कौन हो रहा है सबसे अधिक प्रभावित

बांग्लादेश स्थित संस्था 'साइबर सपोर्ट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर हिंसा के 29 मामलों के विश्लेषण में पाया गया कि पिछले वर्ष के पहले छह महीनों में साइबर हिंसा के शिकार लोगों में 97 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे थे। पुलिस जांच यह भी उजागर करती है कि देश में हर पाँच में से तीन लड़कियों और युवतियों ने किसी न किसी रूप में साइबर उत्पीड़न का सामना किया है।

गौरतलब है कि सामाजिक बदनामी और डर के चलते इन मामलों में से करीब 89 प्रतिशत पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते। और जिन्होंने शिकायत की, उनमें भी लगभग 72 प्रतिशत मामले या तो अनसुलझे रहे या सबूतों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिए गए।

वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन जुए का गठजोड़

साइबर अपराधी तेज़ी से बैंकिंग और वित्तीय जानकारी चुराने में लगे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी मात्रा में धनराशि ऑनलाइन गैम्बलिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े मोबाइल फाइनेंशियल सर्विस (MFS) खातों के ज़रिए स्थानांतरित की जा रही है। फिशिंग, सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार और ऑनलाइन जुए की गतिविधियाँ एक साथ बढ़ रही हैं, जो डिजिटल अपराध के एक जटिल तंत्र की ओर इशारा करती हैं।

कानूनी ढांचा और दर्ज मामलों के आंकड़े

बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली अखबार डेली सन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों के पुलिस आंकड़ों में सूचना और अश्लीलता नियंत्रण अधिनियम-2012, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अधिनियम-2006 और डिजिटल सुरक्षा अधिनियम-2018 के तहत कुल 4,794 मामले दर्ज किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में एक समर्पित साइबर अपराध इकाई का अभाव एक बड़ी संस्थागत चुनौती बना हुआ है।

पुलिस महानिरीक्षक की चेतावनी

बांग्लादेश के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) अली हुसैन फकीर ने साइबर अपराध और ऑनलाइन अफवाहों के प्रसार को देश के सामने मौजूद कानून-व्यवस्था से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया है। राजशाही स्थित शारदा पुलिस अकादमी में कैडेट सब-इंस्पेक्टरों के 42वें बैच की पासिंग आउट परेड के दौरान उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गैम्बलिंग, फिशिंग और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार तेज़ी से बढ़ रहा है।

आगे की राह: क्या होगा अगला कदम

कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच से स्पष्ट होता है कि डिजिटल तकनीक के अंधाधुंध इस्तेमाल का फायदा उठाकर अपराधी इसे एक खतरनाक हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक एक समर्पित साइबर अपराध इकाई स्थापित नहीं होती और पीड़ितों के लिए रिपोर्टिंग को सुरक्षित व सुलभ नहीं बनाया जाता, तब तक इन आंकड़ों में सुधार की उम्मीद कम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दक्षिण एशिया में तेज़ी से बढ़ते डिजिटल विभाजन की कहानी कहते हैं — जहाँ इंटरनेट की पहुँच बढ़ी, लेकिन सुरक्षा ढांचा पीछे रह गया। 89% मामलों का अनरिपोर्टेड रहना यह भी बताता है कि कानूनी तंत्र पर भरोसे की भारी कमी है, और 72% मामलों का अनसुलझा रहना उस अविश्वास को और गहरा करता है। समर्पित साइबर इकाई के अभाव में 4,794 दर्ज मामले महज़ हिमशैल की नोक हैं। भारत के लिए भी यह आईना है — जहाँ साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं और पड़ोस में यह संकट चेतावनी की घंटी बजा रहा है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में साइबर अपराध के 97% पीड़ित महिलाएं और बच्चे क्यों हैं?
पुलिस मुख्यालय और खुफिया सूत्रों के अनुसार, साइबर ठग महिलाओं और किशोरों को इसलिए निशाना बनाते हैं क्योंकि वे डिजिटल जागरूकता में पीछे हैं और सामाजिक दबाव के कारण शिकायत करने से बचते हैं। 'साइबर सपोर्ट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन' के 29 मामलों के विश्लेषण ने इस प्रवृत्ति की पुष्टि की है।
बांग्लादेश में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज क्यों नहीं होती?
रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 89% पीड़ित सामाजिक बदनामी और डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते। और जो शिकायत करते हैं, उनमें से 72% मामले सबूतों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिए जाते हैं, जिससे पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और कम होता जाता है।
बांग्लादेश में साइबर अपराध के लिए कौन-से कानून हैं?
बांग्लादेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए तीन प्रमुख कानून हैं — सूचना और अश्लीलता नियंत्रण अधिनियम-2012, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अधिनियम-2006, और डिजिटल सुरक्षा अधिनियम-2018। पिछले पाँच वर्षों में इन तीनों के तहत कुल 4,794 मामले दर्ज किए गए हैं।
बांग्लादेश के IGP ने साइबर अपराध पर क्या कहा?
पुलिस महानिरीक्षक अली हुसैन फकीर ने राजशाही स्थित शारदा पुलिस अकादमी में कैडेट सब-इंस्पेक्टरों के 42वें बैच की पासिंग आउट परेड के दौरान साइबर अपराध को देश की सबसे बड़ी कानून-व्यवस्था चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने ऑनलाइन गैम्बलिंग, फिशिंग और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार पर विशेष चिंता जताई।
बांग्लादेश में साइबर अपराध से निपटने की सबसे बड़ी बाधा क्या है?
देश में एक समर्पित साइबर अपराध इकाई का अभाव सबसे बड़ी संस्थागत बाधा है। इसके साथ ही MFS खातों के ज़रिए धनराशि के अवैध हस्तांतरण और पीड़ितों की कम रिपोर्टिंग दर मिलकर इस संकट को और जटिल बनाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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