बांग्लादेश में महिलाओं पर हिंसा: BMP रिपोर्ट में 756 हत्याएँ, 376 दुष्कर्म के मामले उजागर
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश महिला परिषद (BMP) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध हिंसा चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। 28 जुलाई 2026 को ढाका के जातीय प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी इस रिपोर्ट में बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, आत्महत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज हिंसा और बाल विवाह के आँकड़े सामने रखे गए। रिपोर्ट के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि देश में हर उम्र की महिलाएँ और बच्चियाँ हिंसा के गंभीर जोखिम में हैं।
रिपोर्ट के प्रमुख आँकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, वयस्क महिलाओं के विरुद्ध हत्या के 756 मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए। इसके अलावा 376 दुष्कर्म पीड़िताओं और 125 यौन उत्पीड़न के मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
बच्चियों के विरुद्ध हिंसा के आँकड़े भी गंभीर हैं — सामूहिक दुष्कर्म के 142, आत्महत्या के 203 और दुष्कर्म के प्रयास के 117 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यौन हिंसा का सर्वाधिक खतरा बच्चियों को झेलना पड़ रहा है।
उम्र और पेशे के आधार पर विश्लेषण
उम्र के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि बचपन में बच्चियाँ यौन हिंसा के अधिक जोखिम में रहती हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ हत्या और आत्महत्या के मामले बढ़ते हैं। BMP अध्यक्ष फौजिया मुस्लिम ने 6 से 9 वर्ष की आयु की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों की अधिक संख्या को 'समाज के लिए बेहद चिंताजनक' बताया।
पेशे के आधार पर विश्लेषण में गृहिणियाँ सबसे अधिक प्रभावित वर्ग के रूप में सामने आईं — हत्या के पीड़ितों में उनकी हिस्सेदारी 58%, आत्महत्या के मामलों में 63% और दहेज हिंसा के मामलों में 94% रही।
छात्राएँ भी इस संकट से अछूती नहीं हैं — दुष्कर्म के प्रयास के मामलों में उनकी हिस्सेदारी 80%, आत्महत्या के मामलों में 67% और सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में 39% रही।
हिंसा के पीछे की वजहें
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में न तो घर और न ही शैक्षणिक संस्थान महिलाओं और बच्चियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित स्थान बन पाए हैं। BMP ने इसके लिए दोषियों का सज़ा से बच निकलना, प्रभावशाली व्यक्तियों का हस्तक्षेप, जाँच में देरी, कमज़ोर गवाही एवं साक्ष्य संग्रह, और पीड़ितों को ही दोषी ठहराने की सामाजिक प्रवृत्ति को जिम्मेदार बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में महिला अधिकार संगठन लगातार न्यायिक सुधारों की माँग उठाते रहे हैं। गौरतलब है कि जवाबदेही की कमी और धीमी न्यायिक प्रक्रिया को बार-बार हिंसा के मामलों में बड़ी बाधा के रूप में चिह्नित किया गया है।
BMP की माँगें और आगे की राह
बांग्लादेश महिला परिषद ने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित न्याय, जवाबदेही को मज़बूत करने और जनजागरूकता बढ़ाने की माँग की है। BMP अध्यक्ष फौजिया मुस्लिम ने कहा, 'हिंसा का शिकार बनने के लिए महिलाओं की कोई निश्चित उम्र नहीं है — छह साल की बच्ची से लेकर 60 वर्ष से अधिक उम्र की गृहिणी तक, महिलाएँ जीवन के हर चरण में जोखिम का सामना कर रही हैं।'
उन्होंने दुष्कर्म के साथ-साथ महिलाओं की हत्याओं में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेश में महिलाएँ यौन हिंसा के साथ-साथ अपने जीवन पर बढ़ते खतरे का भी सामना कर रही हैं। इस रिपोर्ट के बाद अब सवाल यह है कि बांग्लादेश सरकार इन आँकड़ों पर ठोस नीतिगत कदम कब उठाएगी।