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बांग्लादेश में शिक्षा पर GDP का 2% से कम खर्च, युवा बेरोजगारी दर 2022 में 27.8% तक पहुँची

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बांग्लादेश में शिक्षा पर GDP का 2% से कम खर्च, युवा बेरोजगारी दर 2022 में 27.8% तक पहुँची

सारांश

बांग्लादेश में हर साल 20 लाख युवा कामकाजी आयु में प्रवेश करते हैं, पर शिक्षा पर GDP का 2% से भी कम खर्च उन्हें बाज़ार के लायक नहीं बना पाता। उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी 2013 के 9.7% से उछलकर 2022 में 27.8% पर पहुँच गई है — और 55% युवा देश छोड़ना चाहते हैं।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च GDP के 2% से कम — यूनेस्को की अनुशंसित सीमा 4-6% से काफी नीचे, एशिया-प्रशांत में सबसे कम।
7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के केवल 49% बच्चों में पढ़ने और बुनियादी गणित की क्षमता विकसित हो पाती है।
उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर 2013 के 9.7% से बढ़कर 2022 में 27.8% हो गई।
15 से 24 वर्ष आयु वर्ग में NEET युवाओं का अनुपात लगभग 40% — वैश्विक औसत से दोगुना।
लगभग 55% युवा विदेश पलायन चाहते हैं; 1990-2024 के बीच प्रवासी बांग्लादेशियों की संख्या 50.8 लाख से 87 लाख हुई।
51% महिलाएँ 18 वर्ष से पहले विवाह कर लेती हैं; शहरी महिला श्रम भागीदारी 2016 के 31% से घटकर 2023 में 25% ।

बांग्लादेश में युवा रोजगार संकट की जड़ें देश की कमज़ोर शिक्षा प्रणाली में धँसी हैं — जहाँ शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2 प्रतिशत से भी कम है। द डेली स्टार में 18 जुलाई 2026 को प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, यह खर्च यूनेस्को द्वारा अनुशंसित 4 से 6 प्रतिशत की सीमा से काफी नीचे है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे कम है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि छात्र श्रम बाज़ार में प्रवेश करने से पहले ही ऐसी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बन जाते हैं, जो उन्हें रोजगार के लिए ज़रूरी कौशल नहीं दे पाती।

सीखने का संकट: आँकड़े जो चिंताजनक हैं

रिपोर्ट के अनुसार, 7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के केवल 49 प्रतिशत बच्चों में ही पढ़ने और बुनियादी गणित की क्षमता विकसित हो पाती है। शिक्षा प्रणाली में रटने की संस्कृति हावी है, जबकि आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक कौशल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप, कई उच्च माध्यमिक (HSC) उत्तीर्ण छात्रों का शैक्षणिक स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सातवीं कक्षा के बराबर रह जाता है। उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रभावी तालमेल का भी अभाव है, जिससे वे चौथी औद्योगिक क्रांति की ज़रूरतों के अनुरूप तैयार नहीं हो पाते।

युवा जनसंख्या और रोजगार संकट की गहराई

बांग्लादेश की कुल आबादी 17.5 करोड़ से अधिक है, जिनमें 4.7 करोड़ युवा 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हैं। देश की आधी से ज़्यादा आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है और औसत आयु लगभग 27 वर्ष है। हर साल करीब 20 लाख युवा कामकाजी आयु वर्ग में प्रवेश करते हैं, लेकिन अधिकांश को अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पाता। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर 2013 में 9.7 प्रतिशत थी, जो 2022 में बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब देश एक विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश का दावा करता है, पर उसे भुना नहीं पा रहा।

NEET युवाओं की चिंताजनक तस्वीर

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग हर पाँच में से एक युवा न तो रोजगार में है, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ा है — इन्हें NEET (Not in Education, Employment or Training) श्रेणी में रखा जाता है। 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग में यह आँकड़ा करीब 40 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुना है। गौरतलब है कि बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की आयु सीमा (32 वर्ष) तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं, उसके बाद निजी क्षेत्र का रुख करते हैं या देश छोड़ देते हैं।

पलायन और लैंगिक असमानता: दोहरा संकट

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 55 प्रतिशत युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाना चाहते हैं। 1990 से 2024 के बीच विदेश में रहने वाले बांग्लादेशियों की संख्या 50.8 लाख से बढ़कर 87 लाख हो गई, जो देश की कुल आबादी का लगभग 5 प्रतिशत है। लैंगिक मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है — बांग्लादेश में एशिया में बाल विवाह की सबसे ऊँची दर दर्ज की जाती है, जहाँ 51 प्रतिशत महिलाएँ 18 वर्ष से पहले विवाह कर लेती हैं। शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी 2016 के 31 प्रतिशत से घटकर 2023 में 25 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी बेहद सीमित है, जिससे उनके भविष्य को प्रभावित करने वाले फैसलों में उनकी आवाज़ पर्याप्त रूप से शामिल नहीं हो पाती।

आगे की राह

विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम 'युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को आज और भविष्य में साकार करना' बांग्लादेश के लिए अब भी एक अनुत्तरित सवाल बनी हुई है। रिपोर्ट में शिक्षा पर खर्च बढ़ाने, उद्योग-शिक्षा तालमेल सुधारने और नीति निर्माण में युवाओं को शामिल करने की ज़रूरत पर बल दिया गया है — ताकि देश अपनी विशाल युवा आबादी को बोझ नहीं, बल्कि संपत्ति में बदल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी युवा आबादी, को व्यर्थ जाने दे रहा है। GDP का 2% से कम शिक्षा पर खर्च करना नीतिगत उपेक्षा है, न संसाधनों की कमी। चिंताजनक यह है कि उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी का बढ़ना यह साबित करता है कि समस्या केवल पहुँच की नहीं, गुणवत्ता की भी है। जब तक उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच की खाई नहीं पाटी जाती और नीति निर्माण में युवाओं को वास्तविक भागीदारी नहीं मिलती, तब तक विश्व जनसंख्या दिवस की थीमें महज़ नारे बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में युवा बेरोजगारी संकट की मुख्य वजह क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य वजह कमज़ोर शिक्षा प्रणाली है — जहाँ GDP का 2% से भी कम शिक्षा पर खर्च होता है और रटने की संस्कृति हावी है। इससे छात्र श्रम बाज़ार के लिए ज़रूरी व्यावहारिक कौशल हासिल नहीं कर पाते।
बांग्लादेश में उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर कितनी है?
द डेली स्टार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर 2013 के 9.7% से बढ़कर 2022 में 27.8% हो गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि डिग्री हासिल करना रोजगार की गारंटी नहीं रही।
बांग्लादेश में कितने युवा NEET श्रेणी में आते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग में लगभग 40% युवा NEET (न रोजगार में, न शिक्षा में, न प्रशिक्षण में) हैं, जो वैश्विक औसत से करीब दोगुना है। कुल मिलाकर हर पाँच में से एक युवा इस स्थिति में है।
बांग्लादेश से युवाओं का विदेश पलायन कितना बढ़ा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 55% युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाना चाहते हैं। 1990 से 2024 के बीच विदेश में रहने वाले बांग्लादेशियों की संख्या 50.8 लाख से बढ़कर 87 लाख हो गई, जो कुल आबादी का लगभग 5% है।
बांग्लादेश में महिलाओं की श्रम भागीदारी पर क्या असर पड़ा है?
रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी 2016 के 31% से घटकर 2023 में 25% रह गई है। इसके साथ ही 51% महिलाएँ 18 वर्ष से पहले विवाह कर लेती हैं, जो एशिया में बाल विवाह की सबसे ऊँची दरों में से एक है।
राष्ट्र प्रेस
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