बांग्लादेश में 9 लाख से अधिक ग्रेजुएट बेरोजगार, एक दशक में आठ गुना बढ़ी संख्या
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (BBS) के लेबर फोर्स सर्वे 2023 के अनुसार, देश में 9 लाख 6 हजार से अधिक विश्वविद्यालय स्नातक बेरोजगार हैं — और यह संख्या पिछले एक दशक में लगभग आठ गुना बढ़ चुकी है। शिक्षा के विस्तार और रोजगार की उपलब्धता के बीच यह बढ़ती खाई अब नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
आँकड़े क्या कहते हैं
BBS लेबर फोर्स सर्वे 2023 के अनुसार, बेरोजगार स्नातकों की संख्या 2022 में 7 लाख 99 हजार से बढ़कर 9 लाख 6 हजार हो गई — यानी मात्र एक वर्ष में 1 लाख से अधिक की वृद्धि। सरकार की आर्थिक रणनीतिक टास्कफोर्स ने पाया कि बांग्लादेश में हर 100 बेरोजगारों में से 28 उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। स्नातक बेरोजगारी दर 2010 में 4.9% से बढ़कर 2022 में 12% हो गई है।
शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई
पिछले दस वर्षों में बांग्लादेश में विश्वविद्यालयों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है और उच्च शिक्षा तक पहुँच व्यापक हुई है। परंतु QS वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2025 और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की रिपोर्टों के अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था न तो गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा कर पा रही है और न ही स्नातकों को बाज़ार की माँग के अनुरूप कौशल दे पा रही है। अर्थशास्त्रियों और नियोक्ताओं का कहना है कि युवाओं के पास मौजूद कौशल और उद्योग जगत की ज़रूरतों के बीच का अंतर लगातार गहरा होता जा रहा है।
NEET युवाओं की स्थिति
द डेली स्टार ने लेटेस्ट लेबर फोर्स सर्वे (LFS) 2024 के हवाले से बताया कि बांग्लादेश में हर पाँच में से एक युवा — कुल मिलाकर लगभग 86 लाख — न तो काम कर रहा है, न पढ़ रहा है और न ही किसी प्रशिक्षण में है। इन्हें NEET (Not in Education, Employment or Training) श्रेणी में रखा गया है। इनमें से लगभग दो-तिहाई महिलाएँ हैं — जो इस बात की ओर संकेत करता है कि लड़कियों की शिक्षा में हुई प्रगति के बावजूद श्रमबाज़ार में उनकी भागीदारी अभी भी सीमित है।
सामाजिक और राजनीतिक असर
बेरोजगारी की यह स्थिति बांग्लादेश की सड़कों पर भी दिखने लगी है। हाल के दिनों में हायर सेकेंड्री सर्टिफिकेट (HSC) के अभ्यर्थियों सहित युवाओं ने कई मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किए। बांग्लादेश में दक्षिण एशिया की सबसे युवा आबादी है और देश के विकास के लिए इसी जनसांख्यिकीय लाभांश पर भरोसा किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताई है। गौरतलब है कि यदि इस संकट का समाधान नहीं निकाला गया तो यह जनसांख्यिकीय लाभ एक बड़ी सामाजिक चुनौती में बदल सकता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, समाधान के लिए शिक्षा प्रणाली को उद्योग की माँग से जोड़ना, व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना और महिला श्रमशक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। बांग्लादेश के नीति-निर्माताओं के सामने यह चुनौती है कि वे शिक्षा के विस्तार को रोजगार सृजन से किस प्रकार जोड़ें।