30 जुलाई 2026
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भारत-नेपाल सीमा के पास एसएसबी ने बांग्लादेशी नागरिक को पकड़ा, पानीटंकी में बिना दस्तावेज़ के घुसपैठ

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भारत-नेपाल सीमा के पास एसएसबी ने बांग्लादेशी नागरिक को पकड़ा, पानीटंकी में बिना दस्तावेज़ के घुसपैठ

सारांश

पश्चिम बंगाल के पानीटंकी में एसएसबी ने भारत-नेपाल सीमा के पास बांग्लादेशी नागरिक नंदन दास को हिरासत में लिया। दास नेपाल में ठगे जाने के बाद भारत के रास्ते घर लौटने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों को संदेह है कि उसने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया।

मुख्य बातें

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने 14 जून 2026 को पानीटंकी के बीआईटी ओल्ड ब्रिज पर बांग्लादेशी नागरिक नंदन दास को हिरासत में लिया।
दास को अंतरराष्ट्रीय सीमा से 350 मीटर दूर बॉर्डर पिलर नंबर 90 के पास पकड़ा गया।
उसके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट , बोर्डिंग पास , 3 सिम कार्ड और ₹2,580 की भारतीय मुद्रा बरामद।
दास ने दावा किया कि एजेंट ने सर्बिया में नौकरी का वादा कर ₹3–5 लाख ठग लिए और फरार हो गया।
कुछ अधिकारियों को संदेह है कि दास ने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया ताकि उसे बांग्लादेश वापस भेजा जाए।
दास को विदेशी अधिनियम के तहत पुलिस को सौंपा गया; जेल की सज़ा संभव।

पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिले में भारत-नेपाल सीमा के निकट सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने रविवार, 14 जून 2026 को एक बांग्लादेशी नागरिक को हिरासत में लिया। पानीटंकी स्थित बीआईटी ओल्ड ब्रिज पर नियमित जाँच के दौरान पकड़े गए इस व्यक्ति के पास भारत में प्रवेश के लिए आवश्यक कोई वैध दस्तावेज़ नहीं था।

कौन है नंदन दास और कहाँ से पकड़ा गया

हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान नंदन दास के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के मदारिपुर जिले के शिबचर स्थित उमेदपुर गाँव का निवासी है। एसएसबी अधिकारियों के अनुसार, उसे अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 350 मीटर की दूरी पर बॉर्डर पिलर नंबर 90 के समीप रूटीन तलाशी के दौरान रोका गया।

उसके पास से एक बांग्लादेशी पासपोर्ट, बांग्लादेश से नेपाल का एयरलाइन बोर्डिंग पास, एक मोबाइल फोन, दो बांग्लादेशी सिम कार्ड, एक नेपाली सिम कार्ड और ₹2,580 की भारतीय मुद्रा बरामद की गई।

पूछताछ में क्या सामने आया

एसएसबी अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान दास ने दावा किया कि वह 1 फरवरी 2026 को एक एजेंट की सहायता से काठमांडू, नेपाल गया था। एजेंट ने उसे सर्बिया में रोज़गार दिलाने का वादा किया था, जिसके लिए दास ने कथित तौर पर ₹3 से 5 लाख की रकम अदा की। हालाँकि, रकम लेने के बाद एजेंट फरार हो गया।

वीज़ा की अवधि समाप्त होने के पश्चात दास ने नेपाल के पोखरा में काम करना शुरू किया और वहाँ लगभग दो महीने रोज़गार करता रहा। इसके बाद उसने भारत के रास्ते बांग्लादेश लौटने का निर्णय लिया।

अधिकारियों को संदेह — जानबूझकर आत्मसमर्पण की आशंका

एसएसबी के कुछ अधिकारियों को संदेह है कि दास ने स्वेच्छा से भारतीय सीमा में प्रवेश किया और एसएसबी जवानों के समक्ष खुद को सौंप दिया। इसके पीछे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उसे पता था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को उनके देश वापस भेजा जा रहा है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में सीमा पर ऐसे मामलों में वृद्धि देखी गई है जहाँ व्यक्ति स्वयं को अधिकारियों के हवाले करते हैं।

कानूनी कार्रवाई

भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में दास को विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस अपराध में उसे जेल की सज़ा हो सकती है। मामले की आगे जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नेपाल में फँसाव, और फिर भारत के रास्ते वापसी — एक परिचित पैटर्न है जो सीमा पर बार-बार दोहराया जाता है। अधिकारियों का यह संदेह कि दास ने जानबूझकर आत्मसमर्पण किया, यह भी दर्शाता है कि बांग्लादेश वापसी के लिए भारतीय हिरासत को एक 'रास्ता' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है — जो सीमा प्रबंधन की एक गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसएसबी ने बांग्लादेशी नागरिक को कहाँ और कैसे पकड़ा?
सशस्त्र सीमा बल ने 14 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के पानीटंकी स्थित बीआईटी ओल्ड ब्रिज पर नियमित जाँच के दौरान नंदन दास को हिरासत में लिया। वह अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 350 मीटर दूर बॉर्डर पिलर नंबर 90 के पास पाया गया।
नंदन दास के पास से क्या बरामद हुआ?
उसके पास से एक बांग्लादेशी पासपोर्ट, बांग्लादेश से नेपाल का एयरलाइन बोर्डिंग पास, एक मोबाइल फोन, दो बांग्लादेशी सिम कार्ड, एक नेपाली सिम कार्ड और ₹2,580 की भारतीय मुद्रा बरामद की गई।
नंदन दास भारत-नेपाल सीमा पर क्यों था?
दास के अनुसार, वह 1 फरवरी 2026 को एजेंट के ज़रिए काठमांडू गया था, जिसने सर्बिया में नौकरी दिलाने का वादा किया था। एजेंट के फरार हो जाने और वीज़ा समाप्त होने के बाद उसने नेपाल के पोखरा में दो महीने काम किया और फिर भारत के रास्ते बांग्लादेश लौटने की कोशिश की।
क्या नंदन दास ने जानबूझकर आत्मसमर्पण किया?
कुछ एसएसबी अधिकारियों को संदेह है कि दास ने स्वेच्छा से सीमा पार की और खुद को जवानों के सामने पेश किया, यह जानते हुए कि बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजा जा रहा है। हालाँकि यह अभी जाँच का विषय है।
नंदन दास के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई होगी?
उसे विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में उसे जेल की सज़ा हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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